देवबंद, उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का एक ऐतिहासिक कस्बा है, जो दुनिया भर में दारुल उलूम देवबंद के लिए मशहूर है. यह सबसे प्रभावशाली इस्लामी मदरसों में से एक है. जहां एक ओर इस कस्बे का गहरा धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व है, वहीं दूसरी ओर यह विधानसभा क्षेत्र विकास, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहा है.
देवबंद एक सामान्य (अनारक्षित) विधानसभा क्षेत्र है और सहारनपुर लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. यह विधानसभा क्षेत्र 1952 से अस्तित्व में है, जब आजाद भारत में पहली बार चुनाव हुए थे. इसकी मौजूदा सीमाएं 2008 के परिसीमन आदेश के तहत तय की गई थीं. इसके अंतर्गत देवबंद कस्बा, देवबंद तहसील, देवबंद नगर पालिका परिषद के कुछ हिस्से, और भैला व तलहेड़ी बुजुर्ग इलाके आते हैं.
अपने गठन के बाद से अब तक देवबंद में 19 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, जिनमें 2016 का उपचुनाव भी शामिल है. शुरुआती दशकों में यह सीट कांग्रेस पार्टी का गढ़ हुआ करती थी, लेकिन पिछले साढ़े तीन दशकों में यहां जबरदस्त राजनीतिक मुकाबला देखने को मिला है, जिसमें जीतने वाली पार्टियों में लगातार बदलाव होते रहे हैं. यहां के मतदाता समुदाय की उम्मीदों और विकास की जरूरतों के बीच सोच-समझकर संतुलन बिठाते हैं, जिसके चलते वे व्यावहारिक और बदल-बदलकर अपने विकल्प चुनते हैं. इस सीट पर कांग्रेस ने सबसे ज्यादा नौ बार जीत हासिल की है. भाजपा ने चार बार, बहुजन समाज पार्टी ने दो बार, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार, जनता पार्टी, जनता दल और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार जीत दर्ज की है.
2012 में, समाजवादी पार्टी ने यह सीट जीती थी, जिसमें राजेंद्र सिंह राणा ने बसपा के मौजूदा विधायक मनोज चौधरी को 3,050 वोटों से हराया था. 2016 के उपचुनाव में, कांग्रेस पार्टी के माविया अली ने समाजवादी पार्टी की मीना सिंह को 3,559 वोटों से हराया था. 2017 में, भाजपा के बृजेश सिंह ने कड़े मुकाबले के इस सिलसिले को तोड़ते हुए शानदार जीत हासिल की, उन्होंने बसपा के माजिद अली को 29,400 वोटों के भारी अंतर से हराया. कांग्रेस के मौजूदा विधायक माविया अली, जो उस समय समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके थे, तीसरे स्थान पर रहे. 2022 में, भाजपा के बृजेश सिंह ने समाजवादी पार्टी के कार्तिकेय राणा को 7,104 वोटों के कुछ कम अंतर से हराकर इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा. लोकसभा चुनावों में देवबंद विधानसभा क्षेत्र में भी इसी तरह के कड़े मुकाबले के रुझान देखने को मिले हैं. 2009 में BSP, SP से 14,365 वोटों से आगे थी. 2014 में BJP ने बढ़त बनाई और कांग्रेस से 36,903 वोटों से आगे रही. 2019 में BSP ने फिर से अपनी स्थिति मजबूत की और BJP से 6,896 वोटों से आगे रही. हालांकि, 2024 में इस क्षेत्र में BJP कांग्रेस से 21,051 वोटों से आगे रही, BJP के राघव लखनपाल को 94,291 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के इमरान मसूद को 73,238 वोट मिले.
देवबंद के मतदाता आधार में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है. 2012 में इस निर्वाचन क्षेत्र में 292,273 पंजीकृत मतदाता थे, जिनकी संख्या बढ़कर 2017 में 327,564, 2019 में 334,561 और 2022 में 348,944 हो गई. 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान यह संख्या 344,130 थी.
मतदान प्रतिशत आम तौर पर अच्छा रहा है, जो इस सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण सीट पर लोगों की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है. यह 2012 में 67.02 प्रतिशत, 2017 में 71.53 प्रतिशत, 2019 में 69.08 प्रतिशत, 2022 में 69.41 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनावों में 63.72 प्रतिशत रहा.
2011 की जनगणना के अनुसार, देवबंद की जनसांख्यिकी मिश्रित है, जिसमें हिंदू बहुसंख्यक आबादी के साथ-साथ मुसलमानों की भी अच्छी-खासी आबादी है. मतदाताओं में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 23.49 प्रतिशत है. लगभग 79.23 प्रतिशत मतदाता ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं, जबकि 20.77 प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में रहते हैं.
देवबंद का एक गहरा ऐतिहासिक महत्व है. यह शहर 19वीं सदी में 1866 में दारुल उलूम देवबंद की स्थापना के साथ मशहूर हुआ. यह इस्लामिक शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बन गया और देवबंद आंदोलन के जरिए भारत के स्वतंत्रता संग्राम में इसने अहम भूमिका निभाई. इस इलाके ने दिल्ली सल्तनत, मुगलों और अंग्रेजों के शासन को देखा है. आजादी के बाद, जहां यह मदरसा दुनिया भर से छात्रों को अपनी ओर खींचना जारी रखे हुए है, वहीं इस निर्वाचन क्षेत्र को पारंपरिक क्षेत्रों से हटकर संतुलित विकास और आर्थिक अवसरों की चुनौतियों का सामना करना पड़ा है.
भौगोलिक रूप से, देवबंद शिवालिक की तलहटी के पास, उपजाऊ ऊपरी दोआब क्षेत्र में स्थित है. यहां का इलाका ज्यादातर समतल है और नहरों से सिंचाई की अच्छी सुविधाएं उपलब्ध हैं. खेती यहां का मुख्य पेशा है, जिसमें गन्ना, गेहूं और धान प्रमुख फसलें हैं. यहां की अर्थव्यवस्था को छोटे व्यवसायों, मदरसे से जुड़े व्यापार और पारंपरिक हस्तशिल्प से भी मजबूती मिलती है. हालांकि, सीमित औद्योगिक विकास और युवाओं में बेरोजगारी अभी भी यहाँ की बड़ी चिंताएं बनी हुई हैं.
बुनियादी ढांचे में राज्य राजमार्गों के जरिए सड़क संपर्क और सहारनपुर शहर से नजदीकी शामिल है. देवबंद रेलवे स्टेशन के जरिए इस इलाके में रेल संपर्क भी ठीक-ठाक है. दारुल उलूम और अन्य संस्थानों की मौजूदगी से यहां की शैक्षिक सुविधाओं को फायदा मिलता है, लेकिन आस-पास के गांवों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, कौशल विकास और आधुनिक सुविधाओं की मांगें अभी भी बनी हुई हैं.
देवबंद कई महत्वपूर्ण केंद्रों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. जिला मुख्यालय सहारनपुर यहां से लगभग 20-25 किलोमीटर दूर है. उत्तराखंड में स्थित देहरादून और हरिद्वार यहां से 70-90 किलोमीटर के दायरे में हैं. देश की राजधानी नई दिल्ली यहां से लगभग 170-190 किलोमीटर दूर है. आस-पास के अन्य कस्बों में रामपुर मनिहारन, सहारनपुर नगर, मुजफ्फरनगर, रुड़की और हरियाणा का यमुनानगर शामिल हैं, जो व्यापार, रोजगार और रोजाना के आवागमन पर असर डालते हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ यहां से 500 km से भी ज्यादा दूर है.
राज्य की सत्ताधारी पार्टी BJP पिछले दो विधानसभा चुनावों में देवबंद सीट को जीतने और अपने पास बनाए रखने में कामयाब रही है. यह इस मिली-जुली आबादी वाली सीट में एक अहम बदलाव का संकेत है. हालांकि, मुस्लिम समुदाय की मजबूत मौजूदगी की वजह से इस सीट पर उसकी पकड़ अभी भी चुनौती का सामना कर रही है. इस निर्वाचन क्षेत्र की अनोखी सामाजिक-धार्मिक बनावट और मतदाताओं का ध्यान विकास के साथ-साथ सामुदायिक मुद्दों पर भी होने की वजह से, 2027 के चुनाव में यहां कड़ा मुकाबला होने की संभावना है. BJP जहां अपनी कल्याणकारी योजनाओं और स्थिरता को उजागर करने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्षी दल स्थानीय लोगों की उम्मीदों और सत्ता-विरोधी लहर का फायदा उठाने की कोशिश करेंगे. संक्षेप में कहें तो, 2027 के विधानसभा चुनावों में देवबंद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की उन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण और कड़ी टक्कर वाली सीटों में से एक बनी रहने की उम्मीद है, जहां अनुसूचित जाति के वोट निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं.
(अजय झा)
Kartikey Rana
SP
Choudhary Rajendra Singh
BSP
Umair Madani
AIMIM
Yogesh Pratap Singh
ASPKR
Rahat Khalil
INC
Nota
NOTA
Vijendra
IND
Naushad
SANVP
Jaheer
JSP
Praveen Kumar Dhiman
AAAP
बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद की यूपी की सियासत में दोबारा से एंट्री हो गई है. आकाश आनंद ने सोमवार को हाथरस से मिशन-2027 का आगाज भी कर दिया और युवा वोटर्स को साधते नजर आए. इस दौरान उन्होंने जिस तरह अखिलेश यादव को अंकल कहा, उसके सियासी मायने साफ हैं.
उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव का भले ही ऐलान न हुआ हो, लेकिन सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. आकाश आनंद ने हाथरस से जनसभा करके मिशन-2027 का आगाज कर दिया है तो अब बसपा प्रमुख मायावती मंगलवार को प्रेस कॉफ्रेंस करके बीजेपी और कांग्रेस पर जमकर हमले किए.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में इस बार Gen-Z मतदाताओं को वोट बैंक माना जा रहा है. उनकी हिस्सेदारी लगभग 15% है, जो कई सीटों के नतीजों को प्रभावित कर सकती है. ऐसे में बीजेपी, कांग्रेस समेत सभी दल 2027 के चुनाव में युवा वोटरों को साधने की रणनीति बना रहे हैं.
बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद सवा दो साल के बाद यूपी की सियासी पिच पर उतरे तो पहले की तरह की आक्रामक नजर आए. योगी सरकार से लेकर राहुल गांधी और अखिलेश यादव पर हमले किए, लेकिन चंद्रशेखर आजाद पर चुप्पी साधे रखी. ऐसे में सवाल उठता है कि किस रणनीति के साथ आगे बढ़ रहे हैं?
बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद यूपी की सियासी पिच पर उतर गए हैं और पहले की तरह ही आक्रामक तेवर में नजर आए. उस दौरान उन्होंने योगी सरकार पर जमकर हमले किए तो कांग्रेस को निशाने पर लिया. साथ ही अखिलेश यादव को अंकल बताकर तंज कसा.
AIMIM नेता ने दावा किया कि प्रयागराज में राहुल गांधी का छात्र संवाद कार्यक्रम फेल रहा. असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी के नेता ने कहा कि यूपी में AIMIM के बिना योगी को हराना मुश्किल है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भले ही औपचारिएक ऐलान न हुआ हो, लेकिन सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. बसपा प्रमुख मायावती के भतीजे आकाश आनंद सवा दो साल के बाद फिर से यूपी में हाथरस के सादाबाद से चुनावी हुंकार भरेंगे, लेकिन सवाल यही है कि 2024 वाले आक्रामक तेवर में दिखेंगे?
यूपी कांग्रेस के संगठन में बड़े बदलावों को लेकर दिल्ली में बैठक बुलाई गई है. बैठक में 2027 के चुनाव को लेकर संगठन में और क्या-क्या बदलाव करने की जरूरत है, इस पर चर्चा की जाएगी.
BSP अध्यक्ष मायावती दिल्ली के तुगलकाबाद में संत गुरु रविदास के गुरुघर के ध्वंस को लेकर बीजेपी और आम आदमी पार्टी पर भड़कती नजर आई हैं. उन्होंने कहा कि गुरुघर को बुलडोजर से गिराए जाने के बाद श्रद्धालु अस्थायी टीन शेड में माथा टेकने को मजबूर हैं. इस दौरान मायावती ने पंजाब चुनाव से पहले रविदास के नाम पर निकाली जा रही कलश यात्रा पर भी सवाल उठाए.
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लगातार समाजवादी पार्टी पर हमलावर हैं. रविवार को सीएम योगी ने कहा कि सपा ने हर जिले में एक माफिया पाल दिया था. हर थाने और तहसील में माफिया का कब्जा था. गरीब की जमीन पर भी कब्जा होता था. योगी ने कहा, अब यूपी में माफियागिरी नहीं चलेगी. देखें वीडियो.