चरथावल, उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में नगर पंचायत वाला एक छोटा सा शहर है. यह अपनी लकड़ी की थोक मंडी के लिए जाना जाता है, जहां मुख्य रूप से यूकेलिप्टस, पॉपुलर, सागौन और शीशम की लकड़ी का व्यापार होता है. मंडी में रोजाना का कारोबार ₹10 लाख से ₹20 लाख के बीच होने का अनुमान है.
चरथावल राज्य के पश्चिमी हिस्से में मुख्य रूप से ग्रामीण इलाके का प्रतिनिधित्व करता है. यह नहर से सिंचित ऊपरी दोआब के मैदानी इलाकों में स्थित है, जहां गेहूं, धान और डेयरी गतिविधियों के साथ-साथ गन्ने की खेती स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. यहां की राजनीतिक लड़ाई मज़बूत सामुदायिक संबंधों और स्थानीय मुद्दों से तय होती है.
चरथावल एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और मुजफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. यह सीट 1967 में बनी थी और 2008 के परिसीमन तक अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों के लिए आरक्षित थी, जिसके बाद यह सभी के लिए खुली हो गई. इसके मौजूदा इलाके में मुजफ्फरनगर तहसील के अंतर्गत बघरा, चर्थावल, कुटेसरा, ढिंधावली, कुकरा कानूनगो सर्कल के तहत कई ग्राम पंचायतें (जैसे नारा, जरावदा, बहादुरपुर, लछेड़ा, सुजरू, बिहारी, हरसौली, टवली, सिमली, वहलना, निर्माण और बरवाला) और चर्थावल नगर पंचायत शामिल हैं.
इस सीट पर समय-समय पर कई पार्टियों ने जीत हासिल की है. अलग-अलग पार्टियों का इस पर कब्जा रहा है, और नतीजे अक्सर उम्मीदवार के चयन, जाट, मुस्लिम, गुर्जर, दलित और ओबीसी समुदायों के समर्थन और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आम मिजाज पर निर्भर करते हैं.
चरथावल ने 1967 से अब तक 15 विधानसभा चुनावों में हिस्सा लिया है. बीजेपी और बीएसपी ने तीन-तीन बार यह सीट जीती है, जबकि कांग्रेस, जनता दल और भारतीय क्रांति दल दो-दो बार जीते हैं. संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार इस सीट पर जीत हासिल की है.
परिसीमन के बाद, जब यह सामान्य अनारक्षित सीट बन गई, तो पिछले तीन चुनावों में तीन अलग-अलग पार्टियां जीती हैं. 2012 में बीएसपी जीती, जब नूर सलीम राणा ने बीजेपी के विजय कुमार कश्यप को 12,706 वोटों से हराया. 2017 में, बीजेपी ने यह सीट जीती जब विजय कुमार कश्यप ने समाजवादी पार्टी के मुकेश चौधरी को 23,231 वोटों के अंतर से हराया. 2022 में, एसपी ने यह सीट वापस हासिल कर ली, जब उनके उम्मीदवार पंकज कुमार मलिक ने बीजेपी की सपना कश्यप को 5,334 वोटों के कम अंतर से हराया. सपना कश्यप, विजय कुमार कश्यप की पत्नी थीं, जिनका 2021 में कोविड-19 की वजह से निधन हो गया था. पंकज कुमार मलिक को 97,363 वोट मिले, जबकि सपना कश्यप को 92,029 वोट मिले.
लोकसभा चुनावों में भी चरथावल विधानसभा क्षेत्र में इसी तरह के राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं, जहां वोटरों का झुकाव मुख्य रूप से समुदाय को एकजुट करने और खेती से जुड़े मुद्दों के आधार पर पार्टियों के बीच बदलता रहा है. 2009 में, बहुजन समाज पार्टी ने राष्ट्रीय लोक दल पर 25,038 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में, बीजेपी ने समाजवादी पार्टी पर 62,635 वोटों की बढ़त हासिल की. 2019 में, आरएलडी ने बीजेपी पर 16,430 वोटों की बढ़त बनाई. 2024 में, समाजवादी पार्टी ने बीजेपी पर 13,681 वोटों की बढ़त बनाई. एसपी के हरेंद्र सिंह मलिक को 95,766 वोट मिले और बीजेपी के संजीव बालियान को 82,085 वोट मिले.
चरथावल में वोटरों की संख्या लगातार बढ़ी है. 2012 के विधानसभा चुनाव में इस क्षेत्र में 291,092 रजिस्टर्ड वोटर थे और वोटिंग 59.23 प्रतिशत हुई थी. यह संख्या 2017 में बढ़कर 314,338 वोटर (वोटिंग 65.84 प्रतिशत), 2019 में 324,713 वोटर (वोटिंग 68.23 प्रतिशत) और 2022 में 331,171 वोटर (वोटिंग 67.09 प्रतिशत) हो गई. 2024 में, मतदाताओं की संख्या 346,373 थी और वोटिंग प्रतिशत 61.22% रहा.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, इस इलाके में हिंदू आबादी ज्यादा है और मुस्लिम आबादी भी अच्छी-खासी है. कुल मतदाताओं में अनुसूचित जातियों की हिस्सेदारी 15.84% है. यह सीट मुख्य रूप से ग्रामीण रही है. यहां के 95.60% मतदाता गांवों में रहते हैं और सिर्फ 4.40% मतदाता चरथावल शहर के आस-पास के शहरी इलाकों में रहते हैं.
चरथावल का इतिहास पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खेती-बाड़ी पर आधारित अर्थव्यवस्था से गहराई से जुड़ा है. यहां दशकों से गन्ना मुख्य फसल रही है, जिसकी सिंचाई नहरों के जरिए होती है. यह इलाका गांवों और स्थानीय बाजारों के समूह के तौर पर विकसित हुआ, जहां आजादी के बाद भी खेती और उससे जुड़े व्यापार का महत्व बना हुआ है. खेती के अलावा दूसरे तरह के रोजगार बहुत धीरे-धीरे बढ़े हैं.
भौगोलिक नजरिए से, चरथावल समतल और उपजाऊ 'दोआब' जमीन पर बसा है, जो कई तरह की फसलों के लिए बहुत अच्छी है. नहरों से सिंचाई खेती में मदद करती है, जबकि स्थानीय बाजार और खेती से जुड़ी कुछ गतिविधियां अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाती हैं. चुनावों के दौरान सिंचाई की सुविधा, बिजली की सप्लाई, गन्ने की कीमतें और पानी के प्रबंधन जैसे मुद्दे अक्सर उठते रहते हैं.
यहां के बुनियादी ढांचे में जिले की वे सड़कें शामिल हैं जो गांवों को चरथावल शहर और मुजफ्फरनगर से जोड़ती हैं. सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन मुजफ्फरनगर में है. यहां स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और स्थानीय बाजार तो हैं, लेकिन मतदाता अक्सर बेहतर सड़कों, जल निकासी व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा सुविधाओं की मांग करते रहते हैं.
चरथावल, जिला मुख्यालय मुजफ्फरनगर से 13 किलोमीटर दूर है. यहां से मेरठ 65 km, सहारनपुर 47 km, शामली 29 km, पानीपत (हरियाणा) 63 km, बागपत 75 km, रुड़की 50 km, सोनीपत (हरियाणा) 83 km, करनाल (हरियाणा) 61 km, गाजियाबाद 100 km, नोएडा 111 km और दिल्ली 105 km दूर हैं. राज्य की राजधानी लखनऊ यहां से लगभग 444 km दूर है.
राजनीतिक नजरिए से देखें तो 2027 के चुनाव में चरथावल एक कड़े मुकाबले वाली सीट बनी रह सकती है. फिलहाल यह सीट समाजवादी पार्टी के पास है. बीजेपी इसे वापस पाने की कोशिश करेगी, जबकि बीएसपी का भी यहां कुछ प्रभाव है. अब जब आरएलडी (RLD) बीजेपी के साथ है, तो गठबंधन और समुदाय के समर्थन में होने वाले बदलाव अहम साबित होंगे. गन्ने की खेती, स्थानीय मुद्दों और सामुदायिक समीकरणों पर आधारित इस ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में अगला मुकाबला उम्मीदवार के चयन, गठबंधन की मजबूती और इस बात पर निर्भर करेगा कि पार्टियां किसानों की रोजमर्रा की समस्याओं और युवा पीढ़ी की उम्मीदों को कितनी असरदार ढंग से संबोधित करती हैं.
(अजय झा)
Sapna Kashyap
BJP
Salman Sayeed
BSP
Tahir Husain Ansari
AIMIM
Yasmeen Rao
INC
Nota
NOTA
Tarun Singh
ASPKR
Chanderveer
IND
Kapil Kumar
RSPS
Saleem Malik
IND
Abhishek
IND
Ajay Kashyap
IND
Sangeeta
JAISMP
Yawar Roshan
AAAP
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