चंदौसी, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के संभल जिले में स्थित एक सब-डिविजन स्तर का शहर है, जिसका अपना म्युनिसिपल बोर्ड है. संभल जिला प्रशासन के कई ऑफिस चंदौसी में स्थित हैं, हालांकि जिले का हेडक्वार्टर बहजोई है, जो खुद चंदौसी सब-डिविजन में ही आता है. 1755 में रोहिलखंड के शासकों द्वारा बसाया गया यह शहर एक व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ, जहां व्यापारियों को पश्चिमी इलाकों के साथ व्यापार करने के लिए बसने के लिए प्रोत्साहित किया गया. समय के साथ यह व्यापार का एक बड़ा केंद्र बन गया, खासकर चावल और चीनी के लिए.
1962 में बनी चंदौसी विधानसभा सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है और यह संभल लोकसभा क्षेत्र के पांच हिस्सों में से एक है. इसमें मुख्य रूप से चंदौसी तहसील के इलाके आते हैं, जिनमें चंदौसी शहर, नरौली नगर पंचायत, बहजोई और आस-पास के कई गांव शामिल हैं.
चंदौसी में अब तक 16 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं. बीजेपी ने यह सीट छह बार जीती है, कांग्रेस ने चार बार और समाजवादी पार्टी ने दो बार. वहीं निर्दलीय, भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने एक-एक बार जीत हासिल की है. चंदौसी का इतिहास रहा है कि यहां के लोग किसी एक पार्टी पर लंबे समय तक भरोसा नहीं करते, जिससे कोई भी पार्टी इसे अपना गढ़ नहीं बना पाती. बीजेपी की छह जीत में से तीन बार लगातार दो-दो कार्यकाल की जीत शामिल है, जबकि कांग्रेस शुरुआती दशकों में एक बार लगातार जीत हासिल कर पाई थी.
समाजवादी पार्टी की लक्ष्मी गौतम ने 2012 में चंदौसी सीट जीती थी, उन्होंने बीजेपी की गुलाब देवी को 4,007 वोटों से हराया था. 2017 के चुनावों में सभी प्रमुख उम्मीदवार महिलाएं थीं, जिसमें बीजेपी की गुलाब देवी ने कांग्रेस पार्टी की विमलेश कुमारी को 45,469 वोटों से हराया. 2022 के विधानसभा चुनावों में भी लगभग वैसा ही नजारा दिखा, जिसमें महिला उम्मीदवारों ने ही शीर्ष दो स्थान हासिल किए. बीजेपी की मौजूदा विधायक गुलाब देवी ने कांग्रेस की विमलेश कुमारी को 35,367 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी.
लोकसभा चुनावों में चंदौसी क्षेत्र में बीजेपी का दबदबा कहीं ज्यादा रहा है. 2009 में इसने BSP पर 7,519 वोटों की बढ़त बनाई थी और 2014 में 53,449 वोटों की. 2019 में, BJP ने समाजवादी पार्टी पर 34,943 वोटों की बढ़त बनाई, जबकि 2024 में समाजवादी पार्टी पर इसकी बढ़त बढ़कर 46,318 वोट हो गई. BJP के परमेश्वर लाल सैनी को 114,204 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के जिया-उर-रहमान बर्क को 67,886 वोट मिले.
2012 में चंदौसी में 315,211 वोटर थे, जिनकी संख्या 2017 में बढ़कर 363,471 हो गई. 2019 में यह संख्या 370,038, 2022 में 383,406 और 2024 में 393,756 थी. वोटिंग का प्रतिशत कम रहा है और हाल के दिनों में इसमें गिरावट आई है. यह 2012 में 60.88 प्रतिशत, 2017 में 61.65 प्रतिशत, 2019 में 59.54 प्रतिशत, 2022 में 59.54 प्रतिशत और 2024 में 54.89 प्रतिशत था.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, चंदौसी हिंदू-बहुसंख्यक निर्वाचन क्षेत्र है, जहां अनुसूचित जाति की आबादी काफी ज्यादा है. यह मुख्य रूप से ग्रामीण सीट है, जहां 68.38 प्रतिशत वोटर 137 गांवों में रहते हैं, जबकि 31.62 प्रतिशत वोटर निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तीन कस्बों में रहते हैं.
चंदौसी की स्थानीय अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से खेती और व्यापार पर टिकी है. यह कस्बा ऐतिहासिक रूप से व्यापार का एक महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, खासकर चावल और चीनी के लिए. आसपास के इलाकों में गन्ना एक प्रमुख फसल है. कई निवासी छोटे-मोटे कारोबार, व्यापार और खेती से जुड़े कामों में भी लगे हुए हैं. गन्ने की कीमत, सिंचाई, बिजली की आपूर्ति, रोजगार के अवसर और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे वोटरों के लिए मुख्य चिंता का विषय हैं. भौगोलिक रूप से, चंदौसी पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में बसा है. यहां की जमीन ज्यादातर समतल है और यहां नहरों से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है. यहां जिला और राज्य के हाईवे के जरिए सड़क संपर्क की अच्छी सुविधा है. शहर में रेल कनेक्टिविटी भी ठीक-ठाक है और चंदौसी रेलवे स्टेशन यहां सेवा देता है.
चंदौसी मुरादाबाद से लगभग 45 किमी दूर है. संभल का जिला मुख्यालय बहजोई, यहां से लगभग 17-18 किमी दूर है. संभल शहर लगभग 35-40 किमी, रामपुर लगभग 55-60 किमी, बरेली लगभग 70-80 किमी, मेरठ लगभग 110-120 किमी और दिल्ली लगभग 188 किमी दूर है. उत्तराखंड में, काशीपुर लगभग 55-60 किमी और रामनगर लगभग 75-80 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 356 किमी दूर है.
अगर इतिहास को पैमाना माना जाए, तो चंदौसी में बीजेपी का अब तक का दबदबा वाला प्रदर्शन उसे 2027 के चुनावों में यह सीट जीतने की दौड़ में अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे रखता है. बीजेपी के लिए एकमात्र चिंता की बात यह हो सकती है कि कोई भी पार्टी लगातार तीन बार यह सीट नहीं जीत पाई है. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या बीजेपी इस ट्रेंड को तोड़ पाती है या चंदौसी अपनी परंपरा को बनाए रखती है.
(अजय झा)
Km Vimlesh Kumari
SP
Ran Vijay Singh
BSP
Nota
NOTA
Mithlesh Kumari
INC
Anil Babu
RPD
Sachin Kumar
AAAP
Manju
IND
Rajesh
IND
Ravindra Kumar
ASPKR
Vijay Pal
IND
Tejpal
IND
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