अमनपुर, कासगंज जिले का एक शांत सब-डिविजन लेवल का कस्बा और नगर पंचायत है, जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ दोआब मैदानी इलाकों में बसा है. ऐतिहासिक ब्रज क्षेत्र का हिस्सा होने के नाते, इस इलाके की जड़ें प्राचीन कृषि बस्तियों से जुड़ी हैं और धीरे-धीरे यह मुगल और ब्रिटिश काल के दौरान एक साधारण ग्रामीण व्यापार केंद्र के रूप में विकसित हुआ. स्थानीय अर्थव्यवस्था में खेती का दबदबा बना हुआ है, जबकि पारंपरिक जातिगत समीकरण इसकी राजनीति के केंद्र में हैं. अमनपुर, एटा लोकसभा क्षेत्र के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. एक सामान्य, अनारक्षित सीट होने के नाते, यहां लोधी राजपूतों के प्रभाव के साथ-साथ शाक्य, अनुसूचित जाति और मुस्लिम समुदायों की बड़ी आबादी है, जिससे यह जिले के ज्यादा कड़े मुकाबले वाले निर्वाचन क्षेत्रों में से एक बन गया है.
अमनपुर उन नए विधानसभा क्षेत्रों में से एक है जिन्हें 2008 के परिसीमन आयोग के आदेश के तहत बनाया गया था. इसमें अमनपुर, सहावर और मोहनपुर नगर पंचायतों की सीमाएं शामिल हैं, साथ ही अमनपुर, सहावर, मानपुर नगरिया और सिधपुरा कानूनगो सर्कल के तहत आने वाले कई गांव भी इसमें आते हैं. इस निर्वाचन क्षेत्र का स्वरूप मुख्य रूप से ग्रामीण है, और इसके कुल मतदाताओं में से नौ-दसवें से ज़्यादा लोग गांवों से हैं.
2008 की परिसीमन प्रक्रिया के बाद अस्तित्व में आने के बाद से, अमनपुर में अब तक सिर्फ तीन विधानसभा चुनाव हुए है. चुनावी इतिहास छोटा होने के बावजूद, यहां बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिले हैं.
बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने 2012 में पहला चुनाव जीता, जब ममताेश शाक्य ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह सोलंकी को 3,656 वोटों के मामूली अंतर से हराया. ममताेश शाक्य बाद में BJP में शामिल हो गईं.
BJP, जो 2012 में छठे स्थान पर रही थी, उसने 2017 में जबरदस्त वापसी की. इस वापसी के पीछे एक बड़ा कारण पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की जन क्रांति पार्टी का BJP में विलय था. पार्टी ने देवेंद्र प्रताप को मैदान में उतारा, जिन्होंने पिछला चुनाव जन क्रांति पार्टी के टिकट पर लड़ा था. बदलते राजनीतिक समीकरणों का फायदा उठाते हुए, देवेंद्र प्रताप ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार वीरेंद्र सिंह सोलंकी को 41,804 वोटों के बड़े अंतर से हराया. 2022 में BJP और समाजवादी पार्टी, दोनों ने नए उम्मीदवार उतारे. BJP ने और भी बड़े अंतर से यह सीट अपने नाम की. हरिओम वर्मा ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार सत्यभान को 43,329 वोटों से हराया. हरिओम वर्मा को 96,377 वोट मिले, जबकि सत्यभान को 53,048 वोट मिले.
लोकसभा चुनावों के दौरान अमनपुर विधानसभा क्षेत्र में भी BJP का प्रदर्शन कुछ ऐसा ही रहा. 2009 में परिसीमन के बाद हुए पहले संसदीय चुनाव में, BJP अपनी पकड़ नहीं बना पाई क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह पार्टी से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ रहे थे. इसके बावजूद, कल्याण सिंह ने BSP से 19,255 वोटों की बढ़त बनाकर इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोट हासिल किए, जिससे इलाके में उनके मजबूत व्यक्तिगत प्रभाव का पता चलता है.
BJP में वापसी के बाद, पार्टी ने अमनपुर में अपनी मजबूत पकड़ बना ली. 2014 में पार्टी ने समाजवादी पार्टी पर 51,650 वोटों की और 2019 में 44,927 वोटों की बढ़त बनाई. हालांकि 2024 में यह अंतर काफी कम हो गया, फिर भी BJP अपनी बढ़त बनाए रखने में कामयाब रही. BJP उम्मीदवार राजवीर सिंह को 86,522 वोट मिले, जबकि समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार देवेश शाक्य को 81,734 वोट मिले. इस तरह पार्टी को विधानसभा क्षेत्र में 4,788 वोटों की बढ़त मिली.
अमनपुर में पिछले कुछ वर्षों में मतदाताओं की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है. रजिस्टर्ड मतदाताओं की संख्या 2012 में 272,887 से बढ़कर 2017 में 292,812, 2019 में 301,763, 2022 में 310,854 और 2024 में 317,757 हो गई. मतदान में भागीदारी सामान्य रही है और इसमें बहुत कम उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. 2012 में वोटिंग 58.51 प्रतिशत, 2017 में 62.78 प्रतिशत, 2019 में 61.49 प्रतिशत, 2022 के विधानसभा चुनाव में 61.80 प्रतिशत और 2024 के लोकसभा चुनाव में 58.63 प्रतिशत रही.
अमनपुर में OBC आबादी काफी ज्यादा है. लोधी राजपूत यहां का सबसे बड़ा समुदाय है, जो कुल वोटरों का लगभग 20 प्रतिशत है. शाक्य समुदाय की आबादी लगभग 14 प्रतिशत है, जबकि मुस्लिम वोटर लगभग 11.90 प्रतिशत हैं. अनुसूचित जातियों की आबादी कुल वोटरों का 19.12 प्रतिशत है, जिसमें जाटव सबसे बड़ा समूह हैं. ठाकुरों की आबादी लगभग 10 प्रतिशत है, जबकि यादव और ब्राह्मण दोनों ही लगभग 7-7 प्रतिशत हैं. यहां के 90.81 प्रतिशत वोटर गांवों में और केवल 9.19 प्रतिशत शहरी इलाकों में रहते हैं, जिससे अमनपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सबसे ज़्यादा ग्रामीण निर्वाचन क्षेत्रों में से एक बना हुआ है. यहां चुनावी नतीजे मुख्य रूप से लोधी, शाक्य और अनुसूचित जाति के वोटों के एकजुट होने या बंटने से तय होते हैं.
आज के कासगंज जिले के ज्यादातर हिस्सों की तरह, अमनपुर भी प्राचीन ब्रज क्षेत्र का हिस्सा है, जो ऐतिहासिक रूप से शूरसेन महाजनपद और कृष्ण परंपरा से जुड़ा रहा है. सदियों तक यह खेती-बाड़ी करने वाले लोगों की बस्तियों का समूह रहा, जो दोआब के उपजाऊ जलोढ़ मैदानों पर निर्भर थे. मुगल काल के दौरान, यह इलाका आस-पास के गांवों के लिए एक छोटे से रेवेन्यू और मार्केट सेंटर के तौर पर काम करता था. ब्रिटिश शासन के दौरान, अमनपुर कृषि व्यापार, खासकर अनाज और तिलहन से जुड़ी एक स्थानीय मंडी के रूप में विकसित होता रहा. आजादी के बाद, यह इलाका मुख्य रूप से ग्रामीण बना रहा, लेकिन धीरे-धीरे एक प्रशासनिक केंद्र के तौर पर भी उभरा. 2008 में एटा जिले से अलग करके बनाए गए नए कासगंज जिले का यह हिस्सा बन गया.
जिला मुख्यालय कासगंज से लगभग 22 किलोमीटर दूर स्थित अमनपुर, स्टेट हाईवे नेटवर्क के जरिए एटा, सोरों, सहावर और आस-पास के कस्बों से अच्छी तरह सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है. सड़क मार्ग से आगरा लगभग 125 किलोमीटर, मथुरा लगभग 120 किलोमीटर, अलीगढ़ लगभग 95 किलोमीटर, बरेली लगभग 165 किलोमीटर, मेरठ लगभग 245 किलोमीटर, नई दिल्ली लगभग 230 किलोमीटर और लखनऊ लगभग 295 किलोमीटर दूर है. सबसे नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन कासगंज जंक्शन है, जो दिल्ली, बरेली, कानपुर, मथुरा और कई अन्य जगहों के लिए रेल सुविधा देता है. खेती यहां की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. किसान मुख्य रूप से गेहूं, धान, आलू, सरसों और गन्ना उगाते हैं. छोटे पैमाने पर व्यापार, खेती से जुड़े कारोबार और अनाज मंडियां ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सहारा देती हैं, जबकि पिछले दो दशकों में शिक्षण संस्थान, स्वास्थ्य सुविधाएं और सड़क का बुनियादी ढांचा धीरे-धीरे बढ़ा है.
अपने लंबे राजनीतिक करियर के आखिरी दौर में भी, कल्याण सिंह ने इस इलाके में, खासकर अपने लोधी राजपूत समुदाय के बीच, अपने निजी प्रभाव की गहराई दिखाई. अगर 2009 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला न किया होता, तो शायद BJP अमनपुर में हुए सभी सात विधानसभा और लोकसभा चुनावों में क्लीन स्वीप कर लेती. फिर भी, उनका रिकॉर्ड शानदार रहा है. BJP ने उन सात चुनावों में से पांच में जीत हासिल की है या बढ़त बनाई है और 2012 के विधानसभा चुनाव के बाद से लगातार अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखी है. समाजवादी पार्टी, अपने पारंपरिक यादव और मुस्लिम वोट बैंक की अपेक्षाकृत कम मौजूदगी के कारण, मुकाबले की शुरुआत में ही पिछड़ी हुई स्थिति में रहती है. 2027 में BJP को कड़ी टक्कर देने के लिए, उसे अपने मुख्य वोटरों से आगे बढ़कर, खासकर प्रभावशाली लोधी और शाक्य समुदायों के बीच अपनी अपील बढ़ानी होगी. तब तक, ऐसा लगता है कि BJP अपने प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले साफ और स्पष्ट बढ़त के साथ अगले विधानसभा चुनाव में उतरेगी.
(अजय झा)
Satyabhan
SP
Subhash Chandra
BSP
Divya Sharma
INC
Arjun Singh
JANADIP
Nota
NOTA
Jitendra
IND
Mahendra Pal Singh
IND
Vineet Shakya
IND
Manoj Kumar
AAAP
Kapil Kumar
IND
Ashish Kumar
INJSP
Usha
IND
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की कानून व्यवस्था और सुरक्षा को लेकर पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. सीएम योगी ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश में आम जनता की आवाज नहीं सुनी जाती थी और अपराधियों को संरक्षण मिलता था. उन्होंने कहा कि आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. अब अगर कोई अपराध करता है तो उस पर तुरंत कठोर कार्रवाई की जाती है. आज प्रदेश में कोई भी गुंडा टैक्स वसूलने की हिम्मत नहीं कर सकता.
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर के चुनार में घोषणा की कि उनकी नई पार्टी जननीति भारत आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में भाग लेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी मजबूत उम्मीदवार मिलने पर सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेगी.
उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के सामने आने के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त रुख अपनाया है. जांच के दौरान यह बात उजागर हुई कि बिना किसी फॉर्म 8 के आवेदन के ही 10,000 से अधिक मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में बदलाव कर दिए गए. चुनाव आयोग ने इस मामले को केवल एक लापरवाही नहीं बल्कि गंभीर अपराध माना है. इसके बाद संबंधित अधिकारियों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की गई है.
उत्तर प्रदेश में शनिवार को मतदाता सूची में नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है. इस अभियान के तहत प्रदेश के सभी जिलों में सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप लगाए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश में शिक्षक और स्नातक मतदाता सरकार से बुरी तरह नाराज हैं. उन्होंने दावा किया कि जनता ने बड़े पैमाने पर बीजेपी के खिलाफ मतदान करना शुरू कर दिया है. अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि अपनी हार सामने देखकर बीजेपी ने आगरा, फतेहपुर, इटावा, औरैया, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और नोएडा जैसे कई जिलों में चुनावी धांधली करने की कोशिश की. प्रशासन और अधिकारियों के जरिए वोट डालने से रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन जनता सब समझ चुकी है और बीजेपी की हार तय है.
बिजनौर की सियासत में गन्ने की मिठास के साथ जातीय समीकरणों का भी अपना गणित है. आठ विधानसभा सीटों वाले इस जिले में BJP-सपा की लड़ाई, दलित-मुस्लिम वोट और 2024 लोकसभा चुनाव में नगीना सीट पर चंद्रशेखर आजाद की जीत ने सियासी तस्वीर को खास बना दिया. आइए जानते हैं इस जिले की और क्या खासियत है.
बदायूं की पूर्व सांसद संघमित्रा मौर्य को 2024 में BJP ने टिकट नहीं दिया था. इसके बाद उनकी नाराजगी और राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहीं. पिता स्वामी प्रसाद मौर्य के कांग्रेस के साथ आने के बाद बिल्सी से चुनाव लड़ने की अटकलें तेज हुईं. अब संघमित्रा ने आज तक से बातचीत में BJP छोड़ने की चर्चा खारिज की है.
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव ने अपना रुख साफ किया है. इटावा के सैफई में मतदान के बाद उन्होंने कहा कि सपा और कांग्रेस दोनों को पता है कि कितनी सीटों पर बंटवारा होना है. उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी को हराने के लिए दोनों दलों को रास्ता निकालना होगा. हालांकि, अखिलेश ने सीटों की संख्या का खुलासा नहीं किया.
पीलीभीत में वोटर लिस्ट की जांच के दौरान 10 हजार से ज्यादा ऐसी एंट्री मिलीं, जो जरूरी आवेदन के बिना की गई थीं. अब पूरे उत्तर प्रदेश में इसी तरह की गड़बड़ियों की जांच के आदेश दिए गए हैं.
समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव रामपुर पहुंचे और जेल में बंद पार्टी नेता आजम खान से मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के छात्रों और एल्युमनी ने इस पूरे घटनाक्रम और असदुद्दीन ओवैसी के हालिया बयानों पर अपनी प्रतिक्रिया दी है.