पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की 152 सीटों पर गुरुवार को मतदान है. पहले फेज में 1478 उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करीब 3.60 करोड़ वोटर्स तय करेंगे. पहले फेज का चुनाव बीजेपी और टीएमसी के लिए भले ही किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है, लेकिन ममता बनर्जी से ज्यादा बीजेपी की साख दांव पर लगी है. ऐसे में देखना है कि पहले चरण में किसका जादू बंगाल में चलता है?
बंगाल के पहले चरण न केवल सीटों की संख्या के लिहाज से बड़ा है, बल्कि यह उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल और मतुआ गढ़ तक फैला हुआ है. बीजेपी की सत्ता में आने का दारोमदार इसी फेज के चुनाव पर टिका हुआ है तो सीएए की सियासी प्रयोगशाला भी है.
चुनाव आयोग के मुताबिक पहले चरण की 152 सीटों पर कुल 1,478 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिसमें बीजेपी सभी 152 सीट पर अपने उम्मीदवार उतार रखी है तो टीएमसी 148 सीट पर ही किस्मत आजमा रही है. कांग्रेस 151 सीट पर चुनाव लड़ रही है जबकि सीपीएम 98 सीट पर उम्मीदवार उतारे हैं. पहले फेज में 929 प्रत्याशी निर्दलीय और अन्य छोटे दलों से उतरे हैं.
पहले चरण की सीटों का पूरा गुणा-गणित
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में राज्य के 16 जिलों की 152 सीटों पर वोटिंग है, जिसमें उत्तर बंगाल की कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, उत्तर दिनाजपुर, दक्षिण दिनाजपुर और मालदा इलाके की सीटें है. इसी तरह जंगलमहल और दक्षिण बंगाल की पुरुलिया, बांकुरा, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर का हिस्सा (नंदीग्राम समेत), बीरभूम और मुर्शिदाबाद सीटों पर वोटिंग है.
पहले चरण की 152 सीटों पर कुल 1,478 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं. इस चरण में कुल 167 महिला उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं. पहले चरण में चुनाव को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष बनाने के लिए बड़े पैमाने पर तैयारी की गई है. 3.60 करोड़ मतदाता इन उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला करेंगे.
कुल 44,376 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 5,444 बूथों की कमान पूरी तरह से महिला चुनाव कर्मियों के हाथों में होगी. सुरक्षा के लिए केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड 2,450 कंपनियां (लगभग 2.5 लाख जवान) तैनात की गई हैं.
बंगाल में बीजेपी का सबसे मजबूत किला
पश्चिम बंगाल में बीजेपी का सबसे मजबूत किला पहले चरण का इलाका है. उत्तर बंगाल की 54, जंगलमहल 42 और दक्षिण बंगाल की 56 सीटों पर चुनाव है, जिसमें दक्षिण बंगाल का इलाका छोड़कर दोनों इलाके बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ माने जाते हैं. 2019 लोकसभा और 2021 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने इन्हीं इलाकों में टीएमसी को सबसे ज्यादा धूल चटाई थी.
2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 77 सीटों पर जीत मिली थी, जिसमें से 59 विधायक इन्हीं पहले चरण की सीटों पर जीत मिली थी. टीएमसी ने पहले फेज 152 में से 92 सीट पर जीत दर्ज की थी जबकि एक सीट अन्य को मिली थी. कूचबिहार, अलीपुरद्वार और जलपाईगुड़ी जिलों की ज्यादातर सीटें बीजेपी के पास हैं.
2019 लोकसभा चुनाव में इन सीटों पर बीजेपी ने 86 पर बढ़त बनाई. 2021 विधानसभा चुनाव में 59 सीटें जीतीं. इसके बाद 2024 लोकसभा चुनाव में 64 सीटों पर आगे रही. यही वजह है कि अमित शाह की अगुवाई में पार्टी ने अपनी पूरी ताकत इस चरण में झोंक रखी थी.
हालांकि, TMC का प्रदर्शन भी कम मजबूत नहीं रहा है. 2011 में उसने 68 सीटें जीतीं, 2016 में 86 सीटों पर कब्जा किया. 2019 लोकसभा चुनाव में 57 सीटों पर बढ़त बनाई. TMC ने 2021 में 92 सीटें जीतकर बड़ा संदेश दिया और 2024 लोकसभा चुनाव में 76 सीटों पर आगे रही.
TMC के लिए यह चरण परंपरागत तौर पर मजबूत रहा है, हालांकि 2019 में उसे झटका भी लगा था. पहले चरण की सीटों में मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिले अहम हैं, जहां 50 से 66 फीसदी तक मुस्लिम हैं. इन तीन जिलों की 43 सीटों में से पिछली बार TMC ने 35 सीटें जीती थीं, जबकि BJP को 8 सीटें मिली थीं.
इस बार BJP ने हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण पर जोर देते हुए यहां TMC की बढ़त को चुनौती देने की रणनीति बनाई है. चुनाव से पहले माहौल भी तनावपूर्ण नजर आया. दुर्गापुर में प्रचार के आखिरी दिन BJP और TMC कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई.
बीजेपी के सीएए-यूजीसी का लिटमट टेस्ट
बंगाल पहले चरण के चुनाव इसीलिए भी बीजेपी के अहम है, क्योंकि सीएए की प्रयोगशाला मानी जाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह सहित पार्टी के तमाम नेता पहले चरण के क्षेत्रों जैसे मतुआ बहुल और उत्तर बंगाल में CAA (नागरिकता संशोधन कानून) और UCC (समान नागरिक संहिता) को प्रमुख मुद्दा बनाने का दांव चला है.
मतुआ और नामशूद्र समुदाय के वोटर्स पहले चरण के चुनाव में निर्णायक भूमिका में हैं. बीजेपी ने वादा किया है कि सत्ता में आने के छह महीने के भीतर बंगाल में UCC लागू किया जाएगा. पश्चिम बंगाल से आए मतुआ समुदाय को सीएए के जरिए नागरिकता देने का वादा बीजेपी ने कर ही अपनी सियासी पैठ बनाई थी, लेकिन अभी भी नागरिकता मुद्दा बना हुआ है. अगर ये मुद्दे इन 152 सीटों पर वोटों में तब्दील नहीं हुए, तो बीजेपी का 'ध्रुवीकरण और पहचान' का पूरा नैरेटिव फेल हो जाएगा. इसीलिए बीजेपी के लिए अहम है.
बीजेपी के धुरंधरों का असल इम्तिहान
पश्चिम बंगाल के पहले चरण में बीजेपी के धुरंधरों का असल इम्तिहान होना है. बंगाल में बीजेपी का चेहरा माने जा रहे शुभेंदु अधिकारी की नंदीग्राम विधानसभा सीट पहले ही चरण में है, जहां पर उनकी किस्मत का फैसला होना है. इसी तरह से बीजेपी के पूर्व प्रदेश दिलीप घोष की खड़गपुर सदर से मैदान में हैं और अग्निमित्रा पॉल का भी असल अग्निपरीक्षा पहले ही फेज की की है. वो आसनसोल दक्षिण सीट से चुनाव लड़ रही है.
बीजेपी बंगाल में भले ही सीएम का चेहरे अपने किसी नेता को घोषित न किया हो, लेकिन शुभेंदु अधिकारी को ममता बनर्जी के खिलाफ उतारकर अघोषित रूप से मुख्यमंत्री उम्मीदवार बना रखा है. पिछले चुनाव में नंदीग्राम सीट से शुभेंदु ने ममता बनर्जी को मात दिया था, लेकिन इस बार उनका मुकाबला टीएमसी से पवित्र कर से है. पवित्र कर कभी शुभेंदु के राइट हैंड माने जाते थे. इस तरह दिलीप घोष और शुभेंदु अधिकारी जैसे बीजेपी नेताओं का इम्तेहान है.
'लक्ष्मी भंडार' बनाम 'मोदी की गारंटी'
टीएमसी की लक्ष्मी भंडार योजना (महिलाओं को 1500 रुपये) का मुकाबला करने के लिए बीजेपी ने इस चरण में 3000 रुपये और 7वें वेतन आयोग का बड़ा दांव खेला है.गाल में सरकारी कर्मचारियों और ग्रामीण महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा इसी चरण में वोट डालेगा. बीजेपी यह परखना चाहती है कि क्या उसकी 'बड़ी आर्थिक गारंटी' ममता की 'मौजूदा स्कीम' पर भारी पड़ती है. बीजेपी लगातार महिला आरक्षण का मुद्दा उठा रही है तो जबाव में टीएमसी लक्ष्मी भंडार को मुद्दा बनाने में जुटी है.
पीएम मोदी ने एक बार फिर संदेशखाली की घटना का जिक्र करते हुए कहा कि एक तरफ बंगाल की बेटियों की चीखें हैं और दूसरी तरफ 'मोदी की गारंटी'है, जो बंगाल में उन्हें सुरक्षा और सम्मान दिलाएगी. प्रधानमंत्री ने बंगाल की महिलाओं को रिझाने के लिए बीजेपी की ओर से 'सुरक्षा' और 'समृद्धि' का रोडमैप पेश किया. इसके जवाब में ममता बनर्जी की महिला ब्रिगेड ने घर- घर जाकर महिलाओं को यह याद दिलाने का काम किया है कि दीदी ने उनकी रसोई का ख्याल रखा है.उनका तर्क साफ है कि केंद्र से पैसा नहीं मिला, फिर भी दीदी ने माताओं-बहनों की जेब खाली नहीं होने दी.
ममता बनर्जी जानती हैं कि दक्षिण बंगाल के उनके मजबूत किले (दूसरे चरण की 142 सीटें) अभी सुरक्षित हैं, लेकिन बीजेपी के लिए समस्या यह है कि उसका सारा जोर उन 152 सीटों पर है जहां वह पहले जीत चुकी है. यहां हार का मतलब सत्ता की दौड़ से बाहर होना. यही वजह है ममता से ज्यादा बीजेपी के लिए पहला चरण का चुनाव अहम माना जा रहा है.