BJP
AITC
CPM
INC
नोटा
NOTA
IND
IND
SUCI
BSP
IND
IND
KPP(U)
IND
GCSD
AMB
Jalpaiguri Vidhan Sabha Election Results Live: जलपाईगुड़ी विधानसभा का रिजल्ट घोषित, BJP ने AITC को हराया
West Bengal Assembly Election Results 2026 Live: दिग्गज उम्मीदवारों में कौन खुश होगा, किसे लगेगा झटका? जानें रुझानों में कौन आगे और कौन पीछे?
Jalpaiguri Vidhan Sabha Result Live: जलपाईगुड़ी सीट पर हो गया बड़ा उलटफेर! जानें ताजा आंकड़े
Jalpaiguri Vidhan Sabha Result Live: पश्चिम बंगाल इलेक्शन रिजल्ट अपडेट्स कैसे चेक करें?
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West Bengal Election Results 2026 Live: पश्चिम बंगाल चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
जलपाईगुड़ी जिले के केंद्र में स्थित जलपाईगुड़ी विधानसभा क्षेत्र कई दशकों से राजनीतिक उतार-चढ़ाव का गवाह रहा है. 2011 से यह सीट अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के लिए आरक्षित है. इससे पहले यह सामान्य श्रेणी की सीट थी. 2001 की जनगणना के आधार पर परिसीमन आयोग ने इसे आरक्षित वर्ग में शामिल करने की अनुशंसा की.
दिलचस्प बात यह है कि आरक्षण लागू होने के बाद भी चुनावी परिणामों में बहुत अंतर नहीं आया. कांग्रेस इस क्षेत्र की सबसे प्रभावशाली पार्टी रही है और अब तक 11 बार जीत चुकी, 9 बार सामान्य सीट रहने पर और 2 बार आरक्षित होने के बाद. इसके अलावा, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक ने 4 बार, जबकि CPI और तृणमूल कांग्रेस ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप कुमार बर्मा ने BJP के सौजीत सिन्हा को मात्र 941 वोटों से पराजित किया. यह दो बड़ी वजहों से ऐतिहासिक था- यह तृणमूल कांग्रेस की जलपाईगुड़ी में पहली जीत थी और BJP पहली बार दूसरे स्थान पर आई. इससे पहले 2011 और 2016 में कांग्रेस के सुखबिलास बर्मा ने लगातार दो जीत हासिल की थीं. 2011 में फॉरवर्ड ब्लॉक के गोविंद चंद्र रॉय को 11,051 वोटों से हराया और 2016 में तृणमूल के धरित्री मोहन रॉय को 5,157 वोटों से शिकस्त दी थी.
BJP का वोट शेयर लगातार बढ़ा, 2011 में 3.45%, 2016 में 7.70% और 2021 में 41.93% (तृणमूल से केवल 0.42% पीछे) रहा. बातस करें लोकसभा चुनावों की तो BJP ने बड़ी बढ़त हासिल की.जलपाईगुड़ी विधानसभा खंड में BJP ने पहली बार मजबूत बढ़त 2019 लोकसभा चुनाव में दिखाई, जब उसने तृणमूल पर 39,185 वोटों की बढ़त दर्ज की. यह बढ़त 2024 में भी बरकरार रही, हालांकि थोड़ी कम होकर 25,534 वोट पर आ गई.
जलपाईगुड़ी में मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है. 2011 में 2,08,102, 2016 में 2,41,740, 2019 में 2,54,555, 2021 में 2,62,500 और 2024 में 2,68,781 रहा.
2011 के सामाजिक आंकड़ों के अनुसार SC मतदाता 49.28%, मुस्लिम मतदाता 10.80% और ग्रामीण आबादी 60.51% जबकि शहरी आबादी 39.49% रही थी.
बात करें मतदान प्रतिशत की तो यहां लगातार उच्च रहा है. 2021 में रिकॉर्ड 86.34%, और 2024 में भी उच्च स्तर का 82.70% रहा था.
जलपाईगुड़ी पूर्वी हिमालय की तलहटी में बसे सुंदर डूअर्स क्षेत्र में स्थित है. यहां उपजाऊ समतल मैदानी क्षेत्र है. यहां का भूभाग मैदानी इलाकों और हल्की ढलानों का मिश्रण है। तीस्ता, तोर्सा, जलढाका, महानंदा, कालजनी, रैडाक और कोरोटोवा जैसी नदियां बाढ़ और उपजाऊ मिट्टी दोनों लेकर आती हैं. क्षेत्र की अर्थव्यवस्था कृषि आधारित है. धान, जूट, आलू यहां की प्रमुख फसलें हैं. साथ ही चाय उत्पादन भी अच्छा होता है. खाद्य प्रसंस्करण, लकड़ी उद्योग और वस्त्र उद्योग यहां के प्रमुख लघु व मध्यम उद्योग हैं.
शहर में जलपाईगुड़ी सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज और नॉर्थ बंगाल यूनिवर्सिटी का दूसरा कैंपस भी स्थित है.
जलपाईगुड़ी सिलीगुड़ी से 35 किमी, मयनागुड़ी से 18 किमी, धूपगुड़ी से 30 किमी, मालबाजार से 52 किमी, कोलकाता से लगभग 500 किमी, दार्जिलिंग से 73 किमी, कूचबिहार से 76 किमी, अलीपुरद्वार से 55 किमी, कोकराझार (असम) से 110 किमी और भूटान के फुंटशोलिंग से 95 किमी दूर है.
हालांकि 2021 में तृणमूल ने जीत दर्ज की, लेकिन बहुत कम अंतर की वजह से उसकी स्थिति कमजोर मानी जा रही है. BJP 2019 और 2024 लोकसभा चुनावों में मजबूत बढ़त लेकर आ रही है, जो उसके लिए मनोवैज्ञानिक लाभ है. तृणमूल की 2011 से सत्ता में मौजूदगी एंटी-इंकंबेंसी को भी जन्म दे सकती है. वहीं लेफ्ट–कांग्रेस गठबंधन की थोड़ी भी वापसी तृणमूल का सीधा नुकसान कर सकती है.
2026 का जलपाईगुड़ी चुनाव बेहद करीबी, प्रतिस्पर्धी और राजनीतिक रूप से दिलचस्प होने वाला है, जिसमें BJP को बढ़त का एहसास है, जबकि तृणमूल को पूरी ताकत झोंकनी होगी.
(अजय झा)
Soujit Singha (piku)
BJP
Sukhbilas Barma
INC
Nota
NOTA
Subhash Kumar Sarkar
BSP
Rakhi Sarkar
IND
Harekrishna Sarkar
IND
Iswar Barai
AMB
Haridas Biswas
IND
Palendra Nath Roy
SUCI
Prahlad Roy
IND
क्रिकेट के बाद राजनीति में भी अशोक डिंडा का यह प्रदर्शन उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है. उनकी इस जीत ने यह साफ कर दिया है कि मैदान चाहे क्रिकेट का हो या राजनीति का, अशोक डिंडा दोनों जगह अपनी छाप छोड़ने में सक्षम हैं.
आज देश के पांच राज्यों में चुनावी परिणाम आने वाले है. पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में जनता अपना फैसला सुनाएगी. दहां असम में हिमंता बिस्व सरमा की सरकार पूर्ण बहुमत के साथ आती दिख रहीं है वहीं बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच काटे की टक्कर का अंदेशा लगाया जा रहा है.
बंगाल की राजारहाट न्यू टाउन सीट का नतीजा अब बड़े राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गया है. मुस्लिम-बहुल मुसलमान पाड़ा के एक बूथ पर BJP को 97% वोट मिलने के बाद TMC ने चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं. अब EVM से लेकर काउंटिंग प्रक्रिया तक पर बहस छिड़ गई है.
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद TMC की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. अब कोलकाता में पार्टी के मौजूदा मुख्यालय वाली बिल्डिंग के मालिक ने TMC नेतृत्व से दो महीने के भीतर जगह खाली करने को कहा है. मालिक ने लीज खत्म होने और प्रॉपर्टी की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई है.
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी में ममता बनर्जी की पदयात्रा के दौरान सुरक्षा में चूक सामने आई. एक युवक सुरक्षा घेरा तोड़कर उनके करीब पहुंच गया और पैर छूने की कोशिश की. घटना के बाद कुछ देर के लिए पदयात्रा रुकी, फिर दोबारा शुरू हुई.
उत्तर बंगाल की चुनावी जंग में 20 से अधिक सीटों पर हार-जीत तय करने वाले चाय बागान मजदूर आज भी बदहाली में जी रहे हैं. दुनिया भर में अपनी चाय का स्वाद पहुंचाने वाले इन मजदूरों के चूल्हे आज भी लकड़ी से जलते हैं और उनकी दिहाड़ी 250 रुपये पर सिमटी है.
पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में करीब 42 लोगों को सिटिजनशिप सर्टिफिकेट मिल चुका है. वहीं, 700 से 800 लोगों ने सिटिजनशिप सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया है. सर्टिफिकेट मिलने के बाद लोग खुश नजर आ रहे हैं.
पश्चिम बंगाल के मालदा में हिंसक प्रदर्शन को लेकर AIMIM नेता पुलिस की रडार पर आ गए हैं. उन पर कलियाचक में अधिकारियों को घेरने के लिए भीड़ को भड़काने के आरोप लगे हैं. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है. अब तक 18 लोग गिरफ्तार हुए हैं.
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीएम ममता बनर्जी उत्तर बंगाल में चुनाव प्रचार के लिए पहुंचीं हैं. बुधवार को वह जलपाईगुड़ी में जनसभा को संबोधित करेंगी. इससे पहले मंगलवार को उन्होंने सेंट लूसी चर्च जाकर ईसाई समुदाय के लोगों और पादरियों से मुलाकात की.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में तृणमूल कांग्रेस अपनी मजबूत जमीन बचाने की कोशिश में है तो वहीं बीजेपी उन कमजोर कड़ियों को तलाश रही है, जहां सेंध लगाई जा सके. 294 सीटों के विश्लेषण से साफ पता चलता है कि आगामी चुनाव में असली मुकाबला उन सीटों पर है जो किसी का स्थायी गढ़ नहीं हैं.