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Exclusive: यूपी में A-ग्रेड की 170 सीटों पर कांग्रेस की नजर, सपा के लिए खींच दी रेड लाइन!

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अलग ही राह पर अपनी तैयारी कर रही है. कांग्रेस एक तरफ ए ग्रेड की 170 सीटों को चिन्हित कर लिया है तो दूसरी तरफ असदुद्दीन ओवैसी और चंद्रशेखर आजाद के साथ नया गठबंधन बनाने की स्क्रिप्ट लिख रहे हैं.

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इमरान मसूद ने अखिलेश यादव को दिया अल्टीमेटम (Photo-ITG)
इमरान मसूद ने अखिलेश यादव को दिया अल्टीमेटम (Photo-ITG)

उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अपने गठबंधन' की अपनी स्क्रिप्ट तैयार है. कांग्रेस सूबे में दलित नेता चंद्रशेखर आजाद से लेकर असदुद्दीन ओवैसी तक का सभी को टटोल रही है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आजतक से बात करते हुए गठबंधन की रूप रेखा ही नहीं बल्कि कांग्रेस की सीटों का फॉर्मूला तय कर दिया है और सपा के लिए भी रेड लाइन खींच दी है. 

इमरान मसूद ने असदुद्दीन ओवैसी को भाई और चंद्रशेखर आजाद को अपना दोस्त व हमदर्द बताया है. इमरान मसूद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में भी अखिलेश यादव को राहुल गांधी का हाथ थामना ही होगा और अब बीच में तीसरी धारा के लिए कोई जगह नहीं. 

यूपी में सपा के साथ कांग्रेस चल रही सीट शेयरिंग के बीच इमरान मसूद ने दावा किया है कि A ग्रेड की 170 सीटें कांग्रेस ने चिह्नित कर ली है, जिस पर पार्टी के चुनाव लड़ने की तैयारी है. इस तरह से इमरान मसूद ने साफ कर दिया है कि कांग्रेस सूबे में 170 सीटों पर चुनाव लड़ने की प्लानिंग में है, लेकिन सवाल यही है कि सपा यूपी में कांग्रेस को मन के मुताबिक सीटें देगी? 

ओवैसी को इमरान मसूद ने बताया भाई
इमरान मसूद ने यूपी में असदुद्दीन ओवैसी के साथ कांग्रेस गठबंधन पर साधी चप्पी. इमरान मसूद ने बीजेपी को तो सांप्रदायिक तो कहा, लेकिन ओवैसी पर सांप्रदायिक होने का ठप्पा लगाने से बचते रहे. ओवैसी को इमरान मसूद ने अपना बड़ा भाई भाई हैं, ओवैसी उनके साथ काम किए हैं, लेकिन गठबंधन पर कोई भी फैसला पार्टी करेगी. 
 
असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश में 2027 को लेकर अपनी तैयारी शुरू कर दी है. बहराइच के मटेरा से अपनी चुनावी तैयारी की शुरुआत करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने बहराइच की सीट से अपने प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली को अपना उम्मीदवार भी घोषित कर दिया. ओवैसी के सक्रिय होने के साथ ही इमरान मसूद ने जिस तरह नरम तेवर अपना रखा है, उसके सियासी संकेत माने जा रहे हैं. 

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'यूपी में अखिलेश थामे राहुल का हाथ'
यूपी तक के खास पॉडकास्ट में इमरान मसूद ने साफ कहा कि अब देश में सिर्फ दो ही सियासी धारा है. एक तरफ राहुल गांधी तो दूसरी तरफ नरेंद्र मोदी. ऐसे में का राहुल गांधी हाथ थामो या नरेंद्र मोदी का. ममता बनर्जी की पार्टी ताश के पत्ते की तरह बिखर गई है. शिवसेना और एनसीपी जैसी पार्टियां पूरी तरह से टूट कर बिखर गई है अब बीच की कोई लाइन नहीं बची है. 

इमरान मसूद ने कहा कि अखिलेश यादव को भी राहुल गांधी का ही हाथ थामना होगा. अखिलेश यादव इस मुगालते में ना रहे कि वो सूबे में इन दोनों धाराओं के बीच अपनी कोई लकीर खींच पाएंगे. 2027 के चुनाव में राहुल गांधी के लिए अखिलेश यादव का हाथ थामना मजबूरी नहीं है बल्कि अखिलेश यादव के लिए राहुल गांधी का हाथ थामना मजबूरी है. इस तरह इमरान मसूद ने संकेत दिए हैं कि 2027 का चुनाव कांग्रेस से ज्यादा सपा के लिए अहम है, क्योंकि सत्ता में आने पर सीएम अखिलेश यादव बनेंगे? 

कांग्रेस ने की ए ग्रेड की 170 सीटें चन्हित
इमरान मसूद ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सूबे की विधानसभा सीटों को A-B और C तीनों कैटेगरी की वर्गीकरण कर सीटें तय कर ली हैं. कांग्रेस ने सूबे में A कटेगरी की 170  सीटें चिन्हित की है यानी कांग्रेस पार्टी जब सपा के साथ सीट बंटवारे पर बात करेगी तो इन्हीं 170 सीटों के डिमांड करेगी. हालांकि, सीटों की संख्या पार्टी का हाईकमान तय करेगा. 
 
कांग्रेस ने यूपी में अपनी तैयारी शुरू कर दी है ताकि सपा के साथ सीट बंटवारे में मजबूती से बात रख सकें. कांग्रेस की नजर दलित,मुस्लिम और ब्राह्मण बहुल वाली सीटों पर है, क्योंकि पार्टी का जनाधार इन्हीं सीटों पर रहा है. कांग्रेस ने सूबे में जिन सीटों का सेलेक्शन किया है, सपा के साथ बार्गेनिंग के लिए उसमें इन्हीं समीकरण वाली सीटें है. 

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गठबंधन की नई स्क्रिप्ट तैयार कर रही कांग्रेस
इमरान मसूद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस पार्टी अपने गठबंधन की स्क्रिप्ट तैयार कर रही है. इस गठबंधन में कई छोटे दल शामिल हो सकते हैं. चंद्रशेखर आजाद और  असदुद्दीन ओवैसी को अपना भाई बताते हुए इमरान मसूद ने कहा कि अभी कांग्रेस की तरकश में बहुत तीर है. मसूद ने कहा कि सूबे में अपनी स्क्रिप्ट कांग्रेस पार्टी गठबंधन को लेकर खुद लिखने वाली है. 

कांग्रेस एक तरफ ए ग्रेड की 170 सीटों की बात और दूसरी तरफ चंद्रशेखर और ओवैसी की तारीफ! यह इशारा कर रहा है कि कांग्रेस यूपी में अखिलेश यादव के दामन को छोड़ना तो नहीं है, लेकिन पिछलग्गू बनकर भी गठबंधन में नहीं जाएगी. इस बार या तो बैठकर आमने-सामने की बात होगी या फिर अपना गठबंधन लेकर सामने आएगी.

 

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