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स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में सुंदर पिचाई का बायकॉट, क्या है विरोध का इजरायल कनेक्शन

सुंदर पिचाई 2015 से गूगल को लीड कर रहे हैं. वह खुद भी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र रह चुके हैं. पिचाई एआई को लेकर कह चुके हैं कि यह तकनीक टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव है.

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स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में क्यों हुआ सुंदर पिचाई का विरोध. (Photo: Social Media)
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में क्यों हुआ सुंदर पिचाई का विरोध. (Photo: Social Media)

अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में गूगल सीईओ सुंदर पिचाई को उस समय असहज स्थिति का सामना करना पड़ा, जब उनके संबोधन से ठीक पहले बड़ी संख्या में छात्रों ने वॉकआउट कर दिया. इन छात्रों ने जमकर नारेबाजी भी की.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक कार्यक्रम में सुंदर पिचाई अपना भाषण देने वाले थे. लेकिन इस बीच कई छात्र नारेबाजी करने लगे. फिलीस्तीन के समर्थन में छात्रों ने पिचाई की स्पीच के बीच से वॉकआउट किया. कुछ छात्र फिलीस्तीनी झंडे और बैनर लेकर कार्यक्रम से बाहर निकल गए, जबकि कुछ ने Free Palestine के नारे लगाए. 

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कहा जा रहा है कि विरोध करने वाले समूह Students for Justice in Palestine और No Tech for Apartheid थे. इनका आरोप है कि गूगल और उसकी मूलकंपनी एल्फाबेट इंक ऐसी तकनीकी सेवाएं और क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर उपलब्ध कराती हैं जिनका उपयोग इजरायली की सरकारी एजेंसियां कर रही है. प्रदर्शनकारी इजरायल से जुड़े रक्षा अनुबंधों और अमेरिकी सरकारी एजेंसियों के साथ गूगल के काम का विरोध कर रहे थे.

प्रोजेक्ट निम्बस का विरोध क्यों?

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कई रिपोर्ट्स में ये कहा गया कि छात्रों ने गूगल के प्रोजेक्ट निम्बस का विरोध कर पिचाई की स्पीच से पहले ही वॉकआउट किया था. 1.2 अरब डॉलर का यह प्रोजेक्ट निम्बस क्लाउट कंप्यूटिंग और एआई से जुड़ा हुआ है. कहा जा रहा है कि इस क्लाउड कंप्यूटिंग प्रोजेक्ट को गूगल और अमेजॉन ने मिलकर इजरायल सरकार के लिए तैयार किया है. इसके तहत गूगल और अमेजॉन इजरायल सरकार को क्लाउड कंप्यूटिंग, एआई और डेटा स्टोरेज सर्विसेज देते हैं. 

बता दें कि सुंदर पिचाई 2015 से गूगल को लीड कर रहे हैं. वह खुद भी स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र रह चुके हैं. पिचाई एआई को लेकर कह चुके हैं कि यह तकनीक टेक इंडस्ट्री के लिए एक बड़ा तकनीकी बदलाव है और आज की पीढ़ी के ग्रैजुएट्स न केवल इसे विकसित करेंगे, बल्कि इसके प्रभावों के साथ जीवन भी जिएंगे.

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