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पंजाब की राजनीति में कौन किस पर भारी? पंचायत आजतक में नेताओं ने खोले चुनावी पत्ते

आम आदमी पार्टी अपने विकास कार्यों के सहारे सत्ता में टिके रहने का दावा कर रही है, वहीं भाजपा, कांग्रेस, अकाली दल और पंथिक धड़े राज्य की कानून-व्यवस्था, नशा, भ्रष्टाचार और ऐतिहासिक जनभावनाओं को ढाल बनाकर जनता के बीच पैठ बनाने में जुटे हैं.

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पंजाब की सियासत में किसका दावा मजबूत? (Photo-ITG)
पंजाब की सियासत में किसका दावा मजबूत? (Photo-ITG)

पंजाब की मौजूदा सियासत, कानून-व्यवस्था और आगामी राजनीतिक समीकरणों को लेकर आयोजित ‘पंचायत आजतक पंजाब’ के विशेष सत्र ‘साड्डा पंजाब, एथे रख!’ में राज्य के प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच तीखी बहस देखने को मिली. आम आदमी पार्टी (AAP), शिरोमणि अकाली दल (SAD), भारतीय जनता पार्टी (BJP), अकाली दल (वारिस पंजाब दे) और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने पंजाब के विकास, लोकतंत्र और चुनावी रणनीतियों पर अपनी बात रखी.

आम आदमी पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी बलतेज पन्नू ने पंजाब सरकार पर लग रहे 'पुलिस स्टेट' के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अगर आजादी के बाद सही मायनों में आम लोगों की सरकार बनी है, तो वह 2022 में आम आदमी पार्टी के नेतृत्व में बनी है, उन्होंने बताया कि 2022 में सरकार बनने के समय राज्य में केवल 22% नहरी पानी का इस्तेमाल हो रहा था, जिसमें अब व्यापक सुधार हुआ है.  पन्नू ने आगे कहा कि पंजाब का स्कूल इंफ्रास्ट्रक्चर केरल को पीछे छोड़कर देश में नंबर-1 बना है और राज्य में मोहल्ला क्लिनिकों के जरिए ₹10 लाख तक के मुफ़्त व कैशलेस इलाज की सुविधा दी जा रही है. सुरक्षित माहौल का ही नतीजा है कि टाटा स्टील जैसे बड़े इंडस्ट्रियल ग्रुप पंजाब में निवेश कर रहे हैं. 

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शिरोमणि अकाली दल के वरिष्ठ नेता डॉ. दलजीत सिंह चीमा ने सरकार के दावों का खंडन करते हुए राज्य की जमीनी लोकतांत्रिक स्थिति और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले का हवाला देते हुए बताया कि पटियाला नगर निगम, बांघा म्युनिसिपल कमेटी और धर्मकोट के 50 से अधिक वार्डों में अदालत द्वारा री-इलेक्शन के आदेश दिए गए हैं, उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से पहले हाई कोर्ट के रिटायर्ड जज की एक फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनी थी, जिसने रिपोर्ट दी कि पंजाब में लोगों को नामांकन दाखिल नहीं करने दिए गए, रास्ते में पर्चे छीने गए, नामांकन रद्द किए गए और वोटरों को वोट डालने से रोका गया. 

भाजपा के पंजाब प्रदेश उपाध्यक्ष फतेह जंग सिंह बाजवा ने साफ किया कि भारतीय जनता पार्टी पंजाब की जनता की नब्ज पहचानकर 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी कर रही है, उन्होंने स्पष्ट किया कि गठबंधन तभी संभव होता है जब आपकी खुद की सभी 117 सीटों पर मजबूत मौजूदगी हो. राज्य की कानून-व्यवस्था पर बात करते हुए उन्होंने माना कि पंजाब में आज कोई भी व्यक्ति खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है.

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जेलों से अपराध संचालित होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि गुजरात या अन्य राज्यों की जेलों में अपराधी होने का मतलब यह नहीं कि वे किसी राजनीतिक दल की जेब में हैं, बाजवा ने कहा कि पंजाब को धारा 370 हटाने और नक्सलवाद को खत्म करने जैसी दृढ़ इच्छाशक्ति वाली भाजपा सरकार की जरूरत है, और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में 2029 तक पंजाब को पूरी तरह नशा मुक्त करने का लक्ष्य तय किया गया है.

अकाली दल (वारिस पंजाब दे) के नेता मनप्रीत सिंह अयाली ने पंजाब की राजनीति के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए पारंपरिक दलों की नाकामियों को उजागर किया, उन्होंने कहा कि अकाली दल जब अपने सिद्धांतों बेअदबी मामलों, सच्चा सौदा डेरा माफी और किसान विरोधी कृषि कानूनों के रुख से भटका, तो पंथ और किसान दोनों उससे दूर हो गए, जिसका नतीजा 2022 में पार्टी का महज 3 सीटों पर सिमटना रहा.  

कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 1966 में पंजाबी सूबा गठन के दौरान पंजाब के हकों की अनदेखी, 1984 का दरबार साहिब हमला, सिख दंगे और जसवंत सिंह खालड़ा जैसे मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के फर्जी एनकाउंटर के चलते सिख समुदाय कांग्रेस को कभी स्वीकार नहीं कर सकता, अयाली ने जोर देकर कहा कि 2024 के लोकसभा चुनावों में खडूर साहिब और फरीदकोट में निर्दलीय पंथिक उम्मीदवारों की जीत ने साबित किया कि राज्य में जब भी पंथिक लहर चलती है, तब अन्य दल बेअसर हो जाते हैं.

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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बीरेंदर ढिल्लों ने केंद्र की भाजपा सरकार और राज्य की आम आदमी पार्टी सरकार दोनों पर तीखे प्रहार किए, उन्होंने कहा कि केंद्र भाजपा की मौजूदगी और पंजाब में 5 साल से आम आदमी पार्टी के शासन के बावजूद राज्य विकास के पैमाने पर लगातार पिछड़ता चला गया है, ढिल्लों ने भ्रष्टाचार के मुद्दे पर AAP को घेरते हुए कहा कि करप्शन खत्म करने के वादे पर आई सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, CBI की रेड्स हो रही हैं और खुद इनके अपने मंत्री जेल गए हैं, उन्होंने कहा कि आज राज्य में बेरोजगारी चरम पर है, नशा और गैंगस्टर्स का बोलबाला है और अपनी जायज मांगों को लेकर प्रदर्शन करने वालों पर लाठीचार्ज किया जा रहा है. केवल एक-दूसरे पर इल्जाम लगाने से पंजाब की समस्याओं का समाधान नहीं निकलेगा, बल्कि केंद्र और राज्य दोनों को अपनी जवाबदेही तय करनी होगी.

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