पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के रुझानों ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह उलट दिया है. 15 साल के बाद ममता बनर्जी को जनता ने सत्ता से बाहर कर दिया है. और बीजेपी बंपर बहुमत के साथ पहली बार राज्य में सरकार बनाने जा रही है.
बंगाल के इस चुनाव में बाबरी मस्जिद एक बड़ा और धुव्रीकरण कराने वाला मुद्दा बना. दरअसल कभी ममता के नेता रहे हुमायूं कबीर ने चुनाव से पहले बंगाल में अयोध्या वाली बाबरी मस्जिद स्टाइल में एक नई मस्जिद बंगाल में बनाने का ऐलान कर दिया था.
इससे राज्य की राजनीति में हंगामा हो गया. इस मुद्दे पर ममता ने अपनी ही पार्टी के नेता हुमायूं कबीर को टीएमसी से बाहर कर दिया था. लेकिन चुनाव को देखते हुए हुमायूं कबीर इस मुद्दे पर अड़ गए थे. उन्होंने इसे मुसलमानों की पहचान के साथ जोड़ दिया. बाबरी मस्जिद बनाने पर अड़े हुमायूं कबीर ने कहा कि 4 करोड़ मुसलमानों के रहते कोई ईंट नहीं हिला सकता.
बाबरी मस्जिद का क्या होगा
हुमायूं कबीर ने अपनी पार्टी बनाई और खुद दो सीटों से चुनाव लड़े और जीत हासिल की. बीजेपी भी पहली बार बंगाल में सत्ता में आई है. तो अब सवाल है कि बंगाल में बनने जा रही बाबरी मस्जिद का क्या होगा?
बीजेपी ने बंगाल में बाबरी मस्जिद बनाने की किसी भी कोशिश का तीखा विरोध किया है. यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अब कयामत तक बाबरी मस्जिद नहीं बनेगी और आक्रांताओं का नामोनिशान मिट चुका है. इस पर पश्चिम बंगाल के तृणमूल नेता हुमायूं कबीर ने पलटवार करते हुए कहा कि ये यूपी नहीं, बंगाल है. योगी को बोलने दीजिए, मस्जिद बनेगी.
जबतक एक भी कार्यकर्ता है...
गृह मंत्री अमित शाह सहित BJP नेताओं ने इसे सांप्रदायिक उकसावा बताया और कहा कि BJP सत्ता में आने पर इसे नहीं होने देगी. हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन भी किए. गृह मंत्री अमित शाह ने एक रैली में कहा कि जबतक बीजेपी का एक भी कार्यकर्ता है बाबरी मस्जिद नहीं बनने दी जाएगी.
एक और चुनावी रैली में अमित शाह ने कहा था कि, 'ममता दीदी और हुमायूं कबीर मेरी बात ध्यान से सुन लें, यह भारत है और कोई भी माई का लाल यहां बाबरी मस्जिद नहीं बना सकता. इससे पहले शाह ने मालदा के मानिकचक इलाके में आयोजित चुनावी रैली में कहा कि हुमायूं कबीर को मेरी बात कान खोलकर सुननी चाहिए कि भाजपा बाबरी जैसी मस्जिद का निर्माण नहीं होने देगी.
हुमायूं कबीर मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा/रेजीनगर क्षेत्र के चेतियानी गांव में बाबरी मस्जिद बनवा रहे हैं. इसकी शुरुआत 6 दिसंबर 2025 को की गई.
हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद का काम पूरा करने का वादा किया है. लेकिन अब बंगाल की सत्ता में बीजेपी है. जो इस मस्जिद निर्माण के घोर विरोध में है. इसलिए हुमायूं कबीर के सामने इस मस्जिद को बनाने में कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियां सामने आ सकती हैं. बीजेपी की नई सरकार बनने के बाद अपनी नीतियों के अनुरूप पार्टी इस पर सख्ती कर सकती है.
यह प्रोजेक्ट फिलहाल बंगाल की राजनीति में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का प्रतीक बन गया है.