
यूपी के माध्यमिक विद्यालयों में TGT-PGT भर्ती पुरानी नियमावली से कराए जाने की मांग को लेकर प्रतियोगी छात्र 18 दिनों से अनशन पर बैठे थे. आज 19वें दिन इनका अनशन समाप्त हुआ है. प्रयागराज DM ने जूस पिलाकर इन लोगों का अनशन तुड़वाया.
प्रयागराज डीएम मनीष कुमार वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने अनशन पर बैठे चार छात्रों को जूस पिलाकर उनके अनशन को समाप्त कराया है. डीएम और पुलिस कमिश्नर की ओर से छात्रों को आश्वासन दिया गया है कि सीएम योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उन्हें एक मौका दिया जाएगा.
अनशन खत्म हुआ लेकिन शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा
छात्रों का कहना है कि भले ही उन्होंने अनशन समाप्त कर दिया है लेकिन उनका शांतिपूर्ण आंदोलन जारी रहेगा. छात्रों का कहना है कि वे तब तक शांतिपूर्ण आंदोलन करेंगे जब तक उन्हें TGT-PGT भर्ती पुरानी नियमावली से कराए जाने का लिखित आश्वासन नहीं मिल जाता है. हालांकि अनशन खत्म होने के बाद छात्रों ने मिठाइयां बांटी. उन्होंने इसे अपनी बड़ी जीत बताया.
5 सितंबर से अनशन पर बैठे थे छात्र
गौरतलब है कि TGT-PGT भर्ती पुरानी नियमावली से कराए जाने की मांग को लेकर 5 सितंबर यानी टीचर्स डे के दिन से छात्रों ने अनशन शुरू किया था. पांच छात्र आमरण अनशन पर भी बैठे थे. जिसमें से एक छात्र की तबीयत बिगड़ने पर 10 सितंबर को उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन चार छात्र 19 दिन तक अनशन पर बैठे रहे.
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तीन दिन पहले प्रदर्शनकारी छात्र धरना स्थल से हटकर शिक्षा निदेशालय कार्यालय परिसर में धरने पर बैठे. पिछले तीन दिनों में लगातार पुलिस और प्रतियोगी छात्रों के बीच कई बार संघर्ष भी हुआ.

मंगलवार को नियुक्ति पत्र वितरण के कार्यक्रम में सीएम योगी आदित्यनाथ द्वारा शिक्षा मंत्री गुलाब देवी को एनसीटीई को पत्र लिखे जाने के बारे में कहे जाने के बाद इस बात की संभावना जताई जा रही थी कि अनशन जल्द खत्म हो सकता है. और ऐसे में सरकार से निर्देश मिलने के बाद प्रयागराज डीएम मनीष कुमार वर्मा और पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया ने जूस पिलाकर अनशन खत्म कराया. उन्होंने छात्रों को एक अवसर दिए जाने का भी आश्वासन दिया है.
क्यों आंदोलन कर रहे छात्र
प्रतियोगी छात्रों का कहना है कि शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 2025 में अचानक TGT-PGT भर्ती की नियमावली में बदलाव कर दिया. इस बदलाव के कारण करीब 7 लाख प्रतियोगी छात्र बगैर परीक्षा दिए ही प्रक्रिया से बाहर हो गए. यही वजह है कि प्रतियोगी छात्र लगातार आंदोलन कर सरकार पर दबाव बना रहे थे.