डिलीवरी पार्टनर हो या फिर बाइक टैक्सी राइडर एक दिन में थोड़ी भी कमाई करना हर किसी के लिए मुश्किल होता है. क्योंकि पूरे दिन की मेहनत के बाद ये ज़रूरी नहीं है कि कमाई का पूरा हिस्सा आपकी जेब में आए, तमाम प्लेटफॉर्म अपना कमीशन भी काटती हैं. डिलीवरी पार्टनर की कुल कमाई और शुद्ध बचत के बीच कई तरह के खर्च और कटौतियां होती हैं. इसी वजह से कमाई का पूरा हिस्सा सीधे हाथ में नहीं आता है.
अगर उदाहरण के तौर पर देखें तो सामान्यतः ₹1,000 की कमाई पर खर्चों और फीस के बाद डिलीवरी पार्टनर के पास लगभग ₹500 से ₹650 बचते हैं. इसका मतलब ये है कि शुद्ध बचत तय करने में पेट्रोल, रखरखाव, प्लेटफॉर्म शुल्क और दूसरे छोटे खर्च अहम भूमिका निभाते हैं.
पेट्रोल और मेंटेनेंस में होता है ज्यादा खर्च
खर्च के ब्योरे में सबसे बड़ा हिस्सा ईंधन या पेट्रोल खर्च का है. ₹1000 की कमाई पर यह खर्च ₹250-₹350 के बीच अनुमानित होता है. बाइक डिलीवरी पार्टनर्स के लिए यह सबसे बड़ा खर्च होता है और यह ऑर्डर की दूरी के आधार पर बदलता है.
एक दूसरा ज़रूरी खर्च वाहन के मेंटेनेंस और टूट-फूट पर ₹50- ₹100 का खर्च माना गया है. इसमें टायर घिसना, इंजन ऑयल बदलवाना और सामान्य सर्विसिंग का दैनिक खर्च शामिल है. इसके अलावा प्लेटफॉर्म शुल्क या कमीशन के रूप में ₹0 - ₹100 तक की कटौती हो सकती है. कुछ प्लेटफॉर्म्स में डायरेक्ट कमीशन कटता है या ऑनबोर्डिंग और यूनिफॉर्म शुल्क की किस्तें काटी जाती हैं.
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मोबाइल डेटा और दूसरे छोटे खर्च भी जुड़ते हैं. ₹1,000 की कमाई पर यह खर्च ₹20 - ₹30 (रोज़ाना के हिसाब से) के बीच बताया गया है. इसमें इंटरनेट डेटा और कॉलिंग का खर्च शामिल है.
ऐसे में शुद्ध बचत की बात करें तो पेट्रोल बाइक चलाने वाले पार्टनर के लिए ₹1,000 की कमाई पर सभी खर्चे घटाने के बाद बचत लगभग ₹500 - ₹600 (50% - 60%) रहती है. वहीं अगर पार्टनर ईवी या साइकिल का उपयोग करता है, तो ईंधन का खर्च काफी कम हो जाता है और शुद्ध बचत ₹750-₹850 (75%-85%) तक पहुंच सकती है.
टिप और प्रोत्साहन राशि मिलने पर पार्टनर की शुद्ध आय बढ़ सकती है. लेकिन ये भी याद रखना होगा कि हर दिन ऐसा होगा, ये ज़रूरी नहीं है. कई बार शहरों, ऑर्डर, दूरी, खर्च और बाकी कई तरह का असर भी आपकी कमाई पर पड़ सकता है.