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पहले CBSE कराता था NEET और JEE, फिर क्यों बनी NTA? करोड़ों छात्रों की परीक्षा की जिम्मेदारी एक एजेंसी के पास कैसे पहुंची?

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA एक बार फिर सुर्खियों में बनी हुई है जिसके पीछे सबसे बड़ी वजह है NEET पेपर लीक. लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खेलने के बाद एजेंसी अपने आप को डिफेंड करने में लगी हुई है. लेकिन एक समय था जब देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित परीक्षाएं जैसे NEET और JEE Main को कराने की जिम्मेदारी CBSE थी.  लेकिन क्या वजह थी कि इसे बनाया गया और अब कौन-कौन सी परीक्षा है जिसका आयोजन एनटीए करवाती है? 

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 NTA formation and purpose
NTA formation and purpose

NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के कारण लाखों छात्रों को झटका लगा है. देशभर में 3 मई को आयोजित हुई परीक्षा को पेपर लीक होने के बाद रद्द कर दिया गया था. इसके बाद से छात्र और अभिभावक नेशनल टेस्टिंग एजेंसी से सवाल कर रहे हैं जिसके बाद से एजेंसी विवादों में आ गई है. छात्र कह रहे हैं कि एजेंसी को लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खेलने का कोई अधिकार नहीं है. बता दें कि NEET, JEE समेत कई अन्य परीक्षाओं का आयोजन एनटीए करवाता है लेकिन पेपर लीक के बाद इसपर सवाल उठ रहे हैं कि इसे क्यों बनाया गया या इसका गठन कब हुआ था? 

NTA भारत में हायर लेवल के एजुकेशन के लिए संस्थानों में एडमिशन के लिए प्रवेश परीक्षा का आयोजन करता है. लेकिन पिछले कुछ सालों से इस संस्थान पर कई सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में चलिए जानते हैं कि एनटीए के पहले कौन इन परीक्षाओं का आयोजन करवाता है. 

कब से एनटीए की हुई शुरुआत? 

बता दें कि केंद्र सरकार ने साल 2027-2018 के बजट में एक स्वतंत्र परीक्षा एजेंसी बनाने की घोषणा की थी. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने नवंबर 2017 में NTA के गठन को मंजूरी दी. इसे भारतीय सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत एक सोसायटी के रूप में रजिस्टर किया गया. इसके बाद से 2018 के अंत से अपनी पहली परीक्षा आयोजित करना शुरू किया. 

क्यों पड़ी एक एजेंसी की जरूरत? 

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गौर करने वाली बात है कि भारत में इंजीनियरिंग और मेडिकल की परीक्षाओं का आयोजन CBSE बोर्ड की ओर से किया जाता है. लेकिन इस जिम्मेदारी को बाद में NTA को दे दिया गया. इसके पीछे कई बड़े कारण थे- 

CBSE पर बोझ- CBSE की प्राथमिकता स्कूली शिक्षा और बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन करना है. ऐसे में प्रवेश परीक्षा की जिम्मेदारी की वजह से बोर्ड के मूल कामों पर असर दिखाई दे रहा था. 

लीक और धांधली के शुरुआती संकेत- वहीं, साल 2015 में जब सीबीएसई AIPMT (जो बाद में NEET बना) आयोजित करा रहा था, तब बड़े पैमाने पर पेपर लीक और नकल की शिकायतें आईं. सुप्रीम कोर्ट को परीक्षा रद्द करके दोबारा कराने का आदेश देना पड़ा. इसके बाद साल 2018 में सीबीएसई के 10वीं और 12वीं के पेपर भी लीक हो गए. 

कैसे काम करता है NTA? 

एनटीए एक तकनीकी आधारित संस्था के रूप में काम करती है. NTA की स्थापना सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत एक एजेंसी के तौर पर हुई. इसमें एक चेयरपर्सन के साथ ही कुछ सदस्य होते हैं. इसमें काम करने का तरीका थोड़ा अलग होता है. 

ऐसे होती है टीम- NTA को सही तरह से चलाने के लिए एक खास टीम होती है. इसके सबसे बड़े अधिकारी (अध्यक्ष) देश के जाने-माने शिक्षाविद होते हैं जिनका चुनाव शिक्षा मंत्रालय की ओर से किया जाता है. इस टीम में IIT, IIM और बड़े विश्वविद्यालयों के बड़े एक्सपर्ट्स भी शामिल होते हैं.

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हाई-टेक परीक्षा केंद्र- NTA ज्यादातर परीक्षाएं कंप्यूटर बेस्ड होती हैं. ग्रामीण या पिछड़े इलाकों के छात्रों को कंप्यूटर पर परीक्षा देने में दिक्कत न हो, इसके लिए NTA देश भर में टेस्ट प्रैक्टिस सेंटर(TPCs) बनाता है. 

वैज्ञानिक तरीके से पेपर तैयार करना- NTA के पेपर रैंडम नहीं बनते. इसमें एक्सपर्ट्स देखते हैं कि सवाल न तो बहुत टफ हों और न बहुत आसान. इसके लिए आइटम रिस्पॉन्स थ्योरी जैसी तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. 

कौन-कौन सी परीक्षाएं करवाता है? 

बता दें कि हाल के समय में सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित परीक्षाएं आयोजित करता है जिनमें- 

NEET (UG)- 
JEE (Main)
CUET (UG/PG)
UGC NET
GPAT, CMAT, IGNOU प्रवेश परीक्षाएं . 

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