पश्चिम बंगाल के स्कूलों में अब राज्य के इतिहास और प्रमुख हस्तियों से जुड़े पाठ्यक्रम में बदलाव किया जाएगा. राज्य सरकार ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान को स्कूली किताबों में शामिल करने का फैसला किया है. वहीं, आठवीं कक्षा की किताब से सिंगूर भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़ा अध्याय को हटा दिया जाएगा. इसे लेकर राज्य के शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने जानकारी दी है.
हर कक्षा की किताब में होगा श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जिक्र
इस मामले पर जानकारी देते हुए शिक्षा मंत्री दीपक बर्मन ने बताया कि पाठ्यक्रम में बदलाव के लिए गठित समिति ने नई सिफारिशें दी हैं. इसके तहत श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन और योगदान का संक्षिप्त परिचय हर पाठ्यपुस्तक में शामिल किया जाएगा. सरकार का कहना है कि नए पाठ्यक्रम में पश्चिम बंगाल के इतिहास और राज्य की प्रमुख हस्तियों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा.
सिंगूर आंदोलन और कन्याश्री योजना का अध्याय हटेगा
पाठ्यक्रम में बदलाव के तहत आठवीं कक्षा की किताब से सिंगूर भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़ा अध्याय हटाया जाएगा. इसके अलावा छठी कक्षा की पाठ्यपुस्तक से कन्याश्री योजना पर आधारित अध्याय हटाने की भी सिफारिश की गई है. कन्याश्री योजना पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार की प्रमुख योजनाओं में शामिल रही है. इसके तहत लड़कियों की शिक्षा जारी रखने और कम उम्र में शादी रोकने के उद्देश्य से आर्थिक सहायता दी जाती है.
पांचवीं से आठवीं तक पढ़ाई जाएगी ICT
नई व्यवस्था के तहत 5वीं से 8वीं कक्षा तक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) को एक व्यवस्थित विषय के रूप में छात्रों को पढ़ाया जाएगा. इसके लिए अलग पाठ्यक्रम तैयार किया जाएगा. इसके अलावा सातवीं और आठवीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तीसरी भाषा की पाठ्यपुस्तकें भी शुरू की जाएंगी. शिक्षा मंत्री के मुताबिक, सभी पाठ्यपुस्तकों की शुरुआत में 'वंदे मातरम्' के पूरे पाठ को भी छापा जाएगा. किताबों में इस्तेमाल होने वाले कागज की गुणवत्ता में भी सुधार किया गया है.
कक्षा 9 तक नो-डिटेंशन पॉलिसी पर फैसला जल्द
कक्षा नौ तक लागू नो-डिटेंशन पॉलिसी को खत्म करने के प्रस्ताव पर भी सरकार विचार कर रही है. शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस मुद्दे पर चर्चा जारी है और जल्द फैसला लिया जा सकता है. पश्चिम बंगाल सरकार 2027 की माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं की तारीखों में बदलाव पर भी खास विचार कर रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि जनगणना की प्रक्रिया है, जिसमें स्कूल शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जा सकती है. पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (WBBSE) ने दसवीं की माध्यमिक परीक्षा 2 से 16 मार्च 2027 के बीच कराने का प्रस्ताव दिया है. पहले ये परीक्षाएं 15 से 25 फरवरी के बीच होनी थीं.
वहीं, पश्चिम बंगाल उच्च माध्यमिक शिक्षा परिषद (WBCHSE) चौथे सेमेस्टर की उच्च माध्यमिक परीक्षा 16 मार्च के बाद कराने का प्रस्ताव दे सकती है. पहले इसके 22 जनवरी से 23 फरवरी के बीच आयोजित होने की संभावना जताई गई थी. शिक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार को दोनों बोर्डों के प्रस्ताव मिल गए हैं. संशोधित परीक्षा तारीखों की घोषणा अगले सप्ताह तक की जा सकती है.