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कितने पढ़े-लिखे हैं विनोद तावड़े? BJP ने दी बड़ी जिम्मेदारी 

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को यूपी का प्रभारी नियुक्त कर दिया गया है. यह फैसला अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव को देखकर पार्टी ने लिया है. विनोद तावड़े का रिकॉर्ड काफी बेहतर रहा है. पार्टी ने उन्हें जिन राज्यों का प्रभारी बनाया है, वहां पार्टी ने अधिकांश तौर पर जीत हासिल की है.

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कितने पढ़े-लिखे हैं विनोद तावड़े. (Photo-X)
कितने पढ़े-लिखे हैं विनोद तावड़े. (Photo-X)

भारतीय जनता पार्टी ने 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर संगठन में अहम बदलाव किया है. बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया है. उनके साथ जगदीश ईश्वरभाई पटेल को सह-प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है. यूपी देश का सबसे बड़ा राजनीतिक राज्य है और यहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में तावड़े को यूपी की जिम्मेदारी मिलना बीजेपी के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि उनका रिपोर्ट कार्ड बेहतर रहा है. इससे पहले वह बिहार में पार्टी के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में बीजेपी के मजबूत प्रदर्शन के बाद संगठन के भीतर उनकी रणनीतिक और संगठनात्मक क्षमता की चर्चा बढ़ी. 

कौन हैं विनोद तावड़े?

बता दें कि विनोद तावड़े महाराष्ट्र से आने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं. वह लंबे समय से पार्टी से जुड़े हुए हैं और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं.  2019 में महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद उनकी राजनीतिक भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चाएं हुई थीं लेकिन बाद में उन्हें राष्ट्रीय संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं. साल 2024 में उन्हें बीजेपी के देशव्यापी सदस्यता अभियान की जिम्मेदारी भी दी गई थी. इसके बाद बिहार में संगठन की जिम्मेदारी और फिर 2026 में राज्यसभा पहुंचने के साथ उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ा. लेकिन यूपी जैसे बड़े राज्य में उन्हें चुनावी जिम्मेदारी दी गई है. 

विनोद तावड़े की शिक्षा क्या है?

विनोद तावड़े के 2026 के राज्यसभा चुनावी हलफनामे में उनकी शैक्षणिक योग्यता की कैटेगरी 'Others' दर्ज है. हलफनामे के मुताबिक उन्होंने 1978 में SSC और 1980 में HSC की परीक्षा मुंबई से पास की. इसके बाद उन्होंने पुणे के ज्ञानेश्वर विद्यापीठ एजुकेशनल ट्रस्ट से 1984 में इंजीनियरिंग कोर्स पूरा किया. 

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B.E. Electronics को लेकर क्यों हुआ विवाद?

विनोद तावड़े की इंजीनियरिंग शिक्षा को लेकर वर्ष 2015 में विवाद सामने आया था. उस समय उनके पुराने चुनावी हलफनामे में उनकी शैक्षणिक योग्यता B.E. (Electronics), संत दयानेश्वर विद्यापीठ, पुणे, 1984 दर्ज थी. ऐसे में विवाद की वजह दयानेश्वर विद्यापीठ को इंजीनियरिंग की डिग्री देने के लिए सरकारी मान्यता प्राप्त संस्थान नहीं माना गया था. उस समय तावड़े ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा था कि उन्होंने वहां 1980 में एक ब्रिज कोर्स में दाखिला लिया था, जिसमें पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण और इंटर्नशिप भी शामिल थी. उन्होंने 1984 में यह कोर्स पूरा किया था. 

तावड़े ने खुद क्या कहा था?

विवाद के दौरान तावड़े ने कहा था कि उन्हें दाखिले के समय ही बताया गया था कि यह कोर्स सरकारी तौर पर मान्यता प्राप्त नहीं है. उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने अपनी शैक्षणिक योग्यता को कभी छिपाया नहीं और चुनावी हलफनामे में भी इसका उल्लेख किया था. दयानेश्वर विद्यापीठ के बारे में 2015 में द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी बताया गया था कि संस्थान इंजीनियरिंग की सरकारी मान्यता प्राप्त डिग्री देने के लिए अधिकृत नहीं था. संस्थान के प्रतिनिधि ने कहा था कि वह डिग्री के बजाय प्रमाणपत्र जारी कर सकता था. 

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2026 के हलफनामे में क्या लिखा है?

सबसे अहम बात यह रही कि साल 2026 के राज्यसभा चुनावी हलफनामे में तावड़े की योग्यता B.E के रूप में नहीं, बल्कि 'Engineering Course' के रूप में दर्ज की गई थी. इसमें 1978 का SSC, 1980 का HSC और 1984 का इंजीनियरिंग कोर्स दर्ज किया गया है. 

अब यूपी की बारी है...

उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी तावड़े के लिए एक बड़ी परीक्षा हो सकती है. बीजेपी लगातार तीसरी बार राज्य में सरकार बनाने की कोशिश करेगी और 2027 का विधानसभा चुनाव पार्टी के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगा. ऐसे में तावड़े की जिम्मेदारी संगठन को मजबूत करने, चुनावी रणनीति को जमीन तक पहुंचाने और प्रदेश इकाई के साथ बेहतर तालमेल बनाने की होगी. 

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