महेंद्रगढ़ जिले के गांव देवनगर (चामधेड़ा) निवासी 63 वर्षीय सुशीला देवी आज हजारों लोगों के लिए प्रेरणा बन गई हैं. बचपन में परिवार की सामाजिक सोच के कारण उनकी पढ़ाई पांचवीं कक्षा के बाद रुक गई थी. लेकिन पढ़ने का जुनून कभी खत्म नहीं हुआ. शादी के बाद भी वह नियमित रूप से अखबार पढ़ती रहीं और नॉलेज का सोर्स खोजती रहीं. एक दिन बेटे विष्णु ने मां की पढ़ाई के प्रति रुचि को गंभीरता से लिया और राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान यानी एनआईओएस से दसवीं का फॉर्म भरवा दिया. शुरुआत में 10वीं स्तर का मैथ, साइंस और अंग्रेजी का पाठ्यक्रम कठिन लगा लेकिन बेटे, बेटियों और पति की मदद से उन्होंने हार नहीं मानी. रोजाना तीन से चार घंटे पढ़ाई कर परीक्षा की तैयारी की.
परिणाम ने खींचा ध्यान
अप्रैल 2026 में आयोजित परीक्षा का परिणाम आया तो सुशीला देवी ने 79.6 प्रतिशत अंक हासिल कर प्रथम श्रेणी में सफलता प्राप्त की. उन्होंने अंग्रेजी में 89, साइंस एवं प्रौद्योगिकी में 88, मैथ्स में 78, पेंटिंग में 76 और हिंदी में 67 अंक हासिल किए. उनकी इस सफलता से पूरे परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है.
सफलता पर बोलीं सुशीला देवी
उन्होंने कहा कि मैं सभी महिलाओं और युवाओं से कहना चाहती हूं कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती. अगर मन में सीखने की इच्छा हो और परिवार का साथ मिले तो कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है.
सबके लिए बनीं प्रेरणा
रेवाड़ी जिले के भडंगी गांव की रहने वाली सुशीला देवी की यह सफलता सिर्फ एक परीक्षा पास करने की कहानी नहीं, बल्कि उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा है जो किसी भी वजह से अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाए. उनका कहना है कि अब उनका सफर यहीं नहीं रुकेगा और वह आगे भी पढ़ाई जारी रखेंगी. 63 वर्ष की उम्र में दसवीं की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास कर सुशीला देवी ने साबित कर दिया है कि अगर हौसले बुलंद हों तो उम्र कभी भी सपनों के बीच दीवार नहीं बन सकती. उनकी यह उपलब्धि समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि शिक्षा का सफर कभी भी शुरू किया जा सकता है.