NEET UG 2026 की परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक बड़ा अपडेट सामने आया है. इस साल होने वाली नीट-यूजी की री-टेस्ट परीक्षा पुराने पेन-पेपर मोड में ही आयोजित होगी. सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है,जिसमें परीक्षा को तुरंत कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन कराने की मांग की गई थी. इसे लेकर जस्टिस पी एस नरसिम्हा की अगुआई वाली सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने साफ कहा है कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के सामने आ रही व्यावहारिक दिक्कतों और चुनौतियों को देखते हुए इस साल ये परीक्षा सीबीटी मोड में कराने का आदेश देने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता. ये मांग ही व्यावहारिक नहीं है. इस आदेश के बाद ये स्पष्ट हो गया कि दोबारा होने वाली परीक्षा का आयोजन पेन-पेपर (OMR) मोड में ही आयोजित की जाएगी.
क्या है कोर्ट का कहना?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लास्ट टाइम में परीक्षा पैटर्न या मोड को बदलना छात्रों और पूरी व्यवस्था के लिए कतई व्यावहारिक नहीं है. यानी 21 जून को आयोजित होने वाली नीट-यूजी की दोबारा होने वाली परीक्षा पुराने पेन-एंड-पेपर मोड में ही होगी. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष हलफनामा देकर सूचित किया है कि वे पूरी तैयारी के साथ अगले साल (2027)से नीट परीक्षा को सीबीटी (CBT) मोड में आयोजित करने के लिए तैयार है. कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई भी 27 जुलाई के लिए टाल दी. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने दलील रखी कि अभी तो हम सिर्फ नीट यूजी परीक्षा ही सीबीटी मोड में कराने की गुहार लगा रहे हैं. पीठ ने कहा कि ऐसी मांग दूसरी नियमित पीठ पहले ही खारिज कर चुकी है.
अगले साल बदल सकता है पैटर्न
बता दें कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने कोर्ट में हलफनामा देकर साफ किया है कि वह अलगे साल नीट परीक्षा का आयोजन कंप्यूटर बेस्ड में करेगा.
इन लोगों ने दायर की याचिका
इस साल परीक्षा को पूरी तरह से सुरक्षित बनाने के लिए आरजेडी सांसद सुधाकर सिंह, सामाजिक कार्यकर्ता अनुभव गर्ग,आईएमए के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ.ध्रुव चौहान और राजनीतिक नेता हरिशरण देवगन ने सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की थी जिसके बाद से ये फैसला आया है. याचिकाकर्ताओं का कहना था कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तुरंत सीबीटी फ्रेमवर्क लागू किया जाए.