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Aajtak Impact: 24 घंटे के भीतर पलटा MP सरकार का फैसला, अब प्राइवेट नहीं होंगे सरकारी मेडिकल कॉलेज

मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी मेडिकल कॉलेजों को निजी हाथों में देने के अपने फैसले को वापस ले लिया है. यह निर्णय छात्रों, डॉक्टरों और आम जनता के विरोध के बाद लिया गया. सरकार ने स्पष्ट किया कि अब कोई भी सरकारी मेडिकल कॉलेज प्राइवेट कंपनियों को नहीं सौंपा जाएगा. 'आजतक' की खबर और रिपोर्टिंग ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

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Estimated to cost Rs 244.87 crore, the new facility is expected to be ready by 2028, according to a statement from the Chief Minister's Office. (Representative photo)
Estimated to cost Rs 244.87 crore, the new facility is expected to be ready by 2028, according to a statement from the Chief Minister's Office. (Representative photo)

मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी (PPP - पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मॉडल के तहत निजी हाथों में सौंपने के अपने फैसले को पूरी तरह टाल दिया है. सरकार ने देर रात आधिकारिक बयान जारी कर साफ कर दिया है कि अब किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज का संचालन प्राइवेट कंपनियों को नहीं दिया जाएगा.

'खबरदार' में उठी थी छात्रों और डॉक्टरों की आवाज़
दरअसल, बीते 21 सितंबर को 'आजतक' के लोकप्रिय प्राइम टाइम शो 'खबरदार' में इस पूरे मामले का प्रमुखता से खुलासा किया गया था.

रिपोर्ट में दिखाया गया था कि कैसे एमपी सरकार अपने 9 सरकारी मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मोड पर देने की तैयारी कर रही थी. 'आजतक' ने अपनी ग्राउंड रिपोर्ट के ज़रिए मेडिकल कॉलेजों के डीन, डॉक्टरों, प्रोफेसरों और एमबीबीएस के छात्रों के भारी विरोध को देश के सामने रखा था.

छात्रों और डॉक्टरों की सबसे बड़ी चिंता यह थी कि अगर सरकारी मेडिकल कॉलेज प्राइवेट हाथों में चले गए:

महंगा होगा इलाज: गरीब और आम मरीजों को मिलने वाली मुफ्त या सस्ती स्वास्थ्य सुविधाएं बंद हो जाएंगी.

बढ़ेगी फीस: मेडिकल की पढ़ाई की फीस आसमान छूने लगेगी, जिससे प्रतिभावान और गरीब छात्र डॉक्टर बनने के सपने से वंचित रह जाएंगे.

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देर रात सरकार का बयान: 'प्राइवेट नहीं होंगे कॉलेज'
'आजतक' की खबर का असर यह हुआ कि पूरे प्रदेश में इस नीति के खिलाफ माहौल बन गया. चौतरफा घिरी सरकार को आखिरकार झुकना पड़ा.

24 सितंबर की देर रात राज्य शासन ने एक आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा:

"ऐसे चिकित्सा महाविद्यालय, जिनका निर्माण राज्य शासन द्वारा किया गया है अथवा जो राज्य शासन के मद से निर्माणाधीन हैं, उनका संचालन एवं संधारण राज्य शासन द्वारा ही किया जाएगा. इन चिकित्सा महाविद्यालयों को पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) पद्धति पर संचालन के लिये नहीं दिया जाएगा."

छात्रों और मरीजों की बड़ी जीत
सरकार के इस नए फैसले के बाद मध्य प्रदेश के मेडिकल छात्रों, डॉक्टरों और आम जनता ने राहत की सांस ली है. 'आजतक' की इस मुहिम ने न केवल सरकारी मेडिकल कॉलेजों के अस्तित्व को बचाया है, बल्कि गरीब मरीजों के सस्ते इलाज और छात्रों की किफायती पढ़ाई के अधिकार को भी सुरक्षित किया है.
 

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