
पूर्वी चंपारण के मोतिहारी में प्रशासनिक सादगी और संवेदनशीलता की एक बेहद खूबसूरत तस्वीर सामने आई है. अरेराज प्रखंड के एक सरकारी स्कूल में जब जिले के सबसे बड़े प्रशासनिक अधिकारी यानी जिलाधिकारी (DM) पहुंचे, तो माहौल किसी औपचारिक निरीक्षण जैसा नहीं रहा. निरीक्षण करते-करते डीएम साहब खुद 'मास्टर जी' की भूमिका में आ गए और ब्लैकबोर्ड पर चौक उठाकर बच्चों को गणित की कठिन गुत्थियां सुलझाने लगे.
जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव के इस अनूठे अंदाज ने न सिर्फ बच्चों का दिल जीत लिया, बल्कि पूरे इलाके में उनकी इस सादगी की चर्चा हो रही है.
निरीक्षण करने पहुंचे थे, बन गए शिक्षक
दरअसल, पूर्वी चंपारण के जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव अरेराज प्रखंड के मलाही स्थित मॉडल स्कूल 'सरस्वती विद्या निकेतन' का औचक निरीक्षण करने पहुंचे थे. दोपहर करीब 1:15 बजे शुरू हुए इस निरीक्षण के दौरान उन्होंने स्कूल में पढ़ाई के स्तर का जायजा लिया और बिहार सरकार के 'शिक्षा साथी ऐप' के इस्तेमाल की समीक्षा की.
लेकिन निरीक्षण पूरा होते ही उन्होंने औपचारिकताओं को दरकिनार किया और सीधे 9वीं कक्षा के बच्चों के बीच जा पहुंचे.

एक घंटे तक ली क्लास, सुलझाईं गणित और भाषाओं की गुत्थियां
कक्षा में प्रवेश करते ही माहौल एकदम बदल गया. डीएम ने लगभग एक घंटे तक 9वीं के छात्रों को गणित, हिंदी और अंग्रेजी जैसे विषयों का पाठ पढ़ाया. उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर गणित के कई गूढ़ और कठिन सवालों को बेहद आसान तरीके से बच्चों को समझाया. जब डीएम ने बच्चों से सवाल पूछे, तो छात्रों ने भी सटीक जवाब देकर उनका मन मोह लिया.
गणित के अलावा उन्होंने बच्चों को भाषा और व्याकरण से जुड़ी बारीकियां भी समझाईं. जिलाधिकारी को एक शिक्षक के रूप में अपने बीच पाकर बच्चों की उत्सुकता और खुशी देखने लायक थी.
'सर, अगली बार कब आएंगे?'
क्लास खत्म होने के बाद बच्चों ने बेहद मासूमियत और विनम्रता से जिलाधिकारी से पूछा, "सर, आप अगली बार हमें पढ़ाने कब आएंगे? हम आपकी प्रतीक्षा करेंगे." बच्चों के इस प्यार भरे आग्रह को डीएम सौरभ सुमन यादव ने सहर्ष स्वीकार किया. उन्होंने मुस्कुराते हुए वादा किया कि जब भी वे इस इलाके के दौरे पर आएंगे, बच्चों के साथ वक्त बिताने और उन्हें पढ़ाने स्कूल जरूर लौटेंगे.
'एक अभिभावक की तरह रखें ध्यान'
स्कूल में पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था देखकर जिलाधिकारी ने संतोष जताया. इसके साथ ही उन्होंने वहां मौजूद सभी शिक्षकों को निर्देश दिया कि वे केवल औपचारिक पढ़ाई तक सीमित न रहें, बल्कि एक अभिभावक की तरह बच्चों के सर्वांगीण विकास और उनकी जरूरतों का ध्यान रखें.
मोतिहारी के इस सरकारी स्कूल से आई यह सुखद तस्वीर साबित करती है कि अगर प्रशासनिक नीयत साफ हो, तो सरकारी शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर और बच्चों का भविष्य दोनों बदले जा सकते हैं.