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कौन हैं IIT बॉम्बे के वो प्रोफेसर, जिन पर साह‍िल सुसाइड केस में लगा 'संगीन' आरोप? कभी खुद भी इसी कैंपस के थे छात्र

आईआईटी बॉम्बे में छात्र के आत्महत्या के बाद से माहौल गरमा गया है. छात्र की मौत और उसके बाद से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन कई सवाल खड़े कर रहा है. साहिल के मौत में जिस प्रोफेसर के खिलाफ आरोप लगे हैं उनका नाम सूर्यनारायण डूला हैं. इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से बीटेक, आईआईटी बॉम्बे से एमटेक और आईआईटी दिल्ली से पीएचडी करने वाले डूला लंबे समय से पढ़ाई, रिसर्च और संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारियों में अपनी भूमिका निभा रहे हैं.

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कौन हैं सूर्यनारायण डूला?
कौन हैं सूर्यनारायण डूला?

आईआईटी बॉम्बे में 20 साल के छात्र साहिल रविंद्र वाकोडे की मौत के बाद से ही जिस प्रोफेसर का नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में रहा वह है सूर्यनारायण डूला, जिन्हें अब निलंबित कर दिया गया है. डूला कोई नए प्रोफेसर नहीं हैं बल्कि उन्हें पढ़ाने का दशकों का अनुभव है. वह इस समय आईआईटी बॉम्बे के एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर हैं और लंबे समय से पढ़ाने के साथ-साथ कई अहम जिम्मेदारियां भी निभा चुके हैं. लेकिन साहिल की मौत से पहले परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन के इस्तेमाल को लेकर मामला सामने आया था.

आईआईटी बॉम्बे के मुताबिक साहिल पर परीक्षा के सवालों को चैटजीपीटी पर डालकर जवाब लेने का आरोप था. इसी परीक्षा में प्रोफेसर डूला इनविजिलेटर थे. इसके बाद से ही साहिल के परिवार ने प्रोफेसर डूला पर जातिगत टिप्पणी, मानसिक प्रताड़ना और धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए. शिकायत के बाद मुंबई पुलिस ने आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया और एससी/एसटी एक्ट की धाराएं भी लगाईं. हालांकि, ये आरोप अभी तक तय नहीं हुए हैं. 

कौन हैं प्रोफेसर सूर्यनारायण डूला? 

सूर्यनारायण डूला आईआईटी बॉम्बे के डिपार्टमेंट ऑफ एनर्जी साइंस एंड इंजीनियरिंग में प्रोफेसर हैं. उनकी फैकल्टी प्रोफाइल के अनुसार, वह संस्थान में साल 2009 से जुड़े हुए हैं. वहीं, उनकी अकादमिक बैकग्राउंड की बात करें, तो उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग और पावर सिस्टम से जुड़े हुए हैं. उन्होंने साल 2000 में नागार्जुन यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक किया. इसके बाद 2002 में आईआईटी बॉम्बे से एनर्जी सिस्टम्स इंजीनियरिंग में एमटेक की डिग्री हासिल की. इसके बाद साल 2007 में आईआईटी दिल्ली से पावर सिस्टम्स में पीएचडी पूरी की. जिस संस्थान से उन्होंने पढ़ाई की, उसी फैकल्टी का हिस्सा बने.

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पहले इन जगहों पर भी कर चुके हैं काम 

आईआईटी बॉम्बे में आने से पहले डूला ने कई अकादमिक संस्थानों के साथ इंडस्ट्री में भी काम किया था. उनकी फैकल्टी प्रोफाइल के मुताबिक, उन्होंने बेंगलुरु की पावर रिसर्च एंड डेवलपमेंट कंसल्टेंट्स में भी काम किया है. इसके साथ ही उन्होंने हैदराबाद की मशीन टू मशीन से भी जुड़े रहे. उनका सफर यहीं पर खत्म नहीं होता है बल्कि उन्होंने आईआईटी दिल्ली एलुरु के सीआरआर कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग और काकीनाडा के जेएनटीयू कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से भी रहा है.

जिम्मेदारियों ने नहीं छोड़ा पीछा 

साल 2009 में आईआईटी बॉम्बे आने के बाद डूला ने खुद को केवल क्लासरूम और रिसर्च तक ही सीमित नहीं रखा बल्कि कई प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी निभाई. वह हॉस्टल-6 के एसोसिएट वार्डन रहे और बाद में इसी हॉस्टल के वार्डन की जिम्मेदारी भी संभाली. प्रोफाइल के मुताबिक, वह 2011 में एसोसिएट वार्डन और 2012 से 2021 तक हॉस्टल-6 के वार्डन रहे. यह लिस्ट यहीं पर खत्म नहीं होती है.

इसके बाद से उन्हें  संस्थान के डीन ऑफ स्टूडेंट अफेयर्स की जिम्मेदारी मिली. वह जेईई एडवांस्ड 2022 के ऑर्गनाइजिंग चेयरमैन रहे. इसके अलावा यूसीईईडी और सीईईडी जैसी परीक्षाओं के आयोजन में भी उनकी जिम्मेदारी रही है. 2020 और 2021 में वह जेईई एडवांस्ड, यूसीईईडी और सीईईडी से जुड़े आयोजन में वाइस चेयरमैन की भूमिका में रहे थे.

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पढ़ाई और रिसर्च में भी रहा लंबा रिकॉर्ड

डूला का रिसर्च काम मुख्य रूप से पावर सिस्टम और बिजली के आधुनिक नेटवर्क से जुड़ा हुआ है. उनकी रिसर्च के प्रमुख क्षेत्रों में स्मार्ट ग्रिड, माइक्रोग्रिड, एक्टिव डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क, पावर इलेक्ट्रॉनिक कन्वर्टर कंट्रोल और डिस्ट्रीब्यूटेड एनर्जी रिसोर्सेज को बिजली के ग्रिड से जोड़ना शामिल हैं. 
 

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