देश में जारी पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और विपक्ष के बीच जुबानी जंग अब और तेज हो गई है. शिक्षा मंत्री द्वारा लगाए गए आरोपों पर अब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है. राहुल गांधी ने साफ कहा है कि शिक्षा मंत्री उन पर चाहे जितने हमले कर लें, लेकिन इससे वह 18.5 लाख बच्चों के भविष्य से जुड़े सवालों के जवाब देने से बच नहीं सकते.
'दागी' कंपनी को कॉन्ट्रैक्ट देने पर फिर उठाए सवाल
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोलते हुए शिक्षा मंत्री के सामने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने CBSE के ऑनलाइन स्पॉट मार्किंग (OSM) कॉन्ट्रैक्ट का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि यह कॉन्ट्रैक्ट 'COEMPT' नाम की कंपनी को क्यों सौंपा गया? राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि यह कंपनी अपने पुराने नाम 'Globarena' के वक्त से ही विवादों में घिरी रही है.
उन्होंने शिक्षा मंत्री से सीधे चार सवाल पूछे हैं:
किसके आदेश पर एक विवादित कंपनी को CBSE का इतना बड़ा कॉन्ट्रैक्ट दिया गया?
कॉन्ट्रैक्ट देने से पहले कंपनी का बैकग्राउंड चेक क्यों नहीं किया गया?
'COEMPT' के मैनेजमेंट और मोदी सरकार के बीच क्या कनेक्शन है?
क्या सरकार ने सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंदकर यह काम किया?
उन्होंने आगे कहा कि या तो आपने बैकग्राउंड चेक किया और फिर भी आगे बढ़े या आपने चेक ही नहीं किया. दोनों ही सूरतों में, आप इस लापरवाही में बराबर के भागीदार हैं.
इस्तीफे की मांग पर अड़े राहुल
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस घेरे में लेते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री को देश के लाखों छात्रों के भविष्य की जरा भी परवाह होती, तो देश के शिक्षा तंत्र को इस मोड़ पर लाने के लिए शिक्षा मंत्री को बहुत पहले ही बर्खास्त कर दिया जाना चाहिए था.
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था, राहुल हताश हैं...
वहीं राहुल गांधी द्वारा सीबीएसई परीक्षाओं में कथित विसंगतियों और धांधली के आरोपों पर देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा था कि राहुल गांधी चुनावी हार की कुंठा के चलते देश की वैज्ञानिक प्रगति का विरोध कर रहे हैं. राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए शिक्षा मंत्री ने उनके मानसिक संतुलन पर ही सवाल दाग दिए.
धर्मेंद्र प्रधान ने बेहद कड़क लहजे में कहा, 'जहां तक राहुल गांधी का सवाल है, ऐसा लगता है कि वे एक अलग ही मानसिक स्थिति में पहुंच चुके हैं. लगातार मिल रही चुनावी हार के कारण वे पूरी तरह हताश और फ्रस्ट्रेटेड नजर आ रहे हैं. उन्होंने पहले इसरो (ISRO) का विरोध किया, फिर वे ईवीएम (EVM) का विरोध करने लगे, और अब वे 'डिजिटल इंडिया' का विरोध कर रहे हैं. वे भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के साथ खड़े ही नहीं होना चाहते.'