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Lizard Fear Causes: छिपकली को देखते ही क्यों छूट जाते हैं पसीने? ये है इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण

घर की दीवारों पर रेंगने वाली छिपकली को देखते ही अच्छे-अच्छों के पसीने छूट जाते हैं. साइंस के मुताबिक, छिपकली से लगने वाला यह डर कोई आम बात नहीं है बल्कि इसके पीछे 'हर्पेटोफोबिया' नाम का डिसऑर्डर और इंसानी दिमाग का पुराना इवोल्यूशन काम करता है.

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छिपकली से कई लोगों को डर लगता है. (Photo: ITG)
छिपकली से कई लोगों को डर लगता है. (Photo: ITG)

Why people are afraid of lizards: लिविंग रूम हो या किचन, बाथरूम हो या हॉल, दीवार पर रेंगती छिपकली को देखकर कई लोगों की हालत खराब हो जाती है. कुछ लोग तो डर के मारे कमरा ही छोड़ देते हैं. वैसे तो घरों में दिखने वाली छिपकली इंसानों को कोई सीधा नुकसान नहीं पहुंचाती लेकिन फिर भी इसे देखते ही एक अजीब सा डर और घिन मन में पैदा होने लगती है. हमने जब पता किया कि आखिर अधिकतर लोगों को छिपकली देखते ही डर क्यों लगता है तो पता चला कि छिपकली से लगने वाले इस डर के पीछे कोई एक वजह नहीं है बल्कि इंसानी दिमाग का इवोल्यूशन, पुराना एक्सपीरियंस और उनका बिहेवियर इसके लिए जिम्मेदार होते हैं. मेडिकल साइंस में इस डर को हर्पेटोफोबिया (Herpetophobia) कहा जाता है. हर्पेटोफोबिया क्या है और ये डर को कैसे ट्रिगर करता है, इस बारे में जानेंगे.

क्या है हर्पेटोफोबिया?

सीपीडी ऑनलाइन कॉलेज की जानकारी के मुताबिक, हर्पेटोफोबिया एक तरह का स्पेसिफिक फोबिया है जिसमें इंसान को रेप्टाइल्स यानी रेंगने वाले जीवों जैसे छिपकली या सांप से जरूरत से ज्यादा डर लगता है. कहा जाता है कि इस फोबिया से पीड़ित लोग छिपकली को सामने देखकर ही नहीं बल्कि उसके बारे में सोचने या उसकी फोटो देखने पर भी थोड़े पैनिक हो जाते हैं. कई बार तो उनका दिल तेजी से धड़कने लगता है और पसीना आने लगते हैं. ये भी हर्पेटोफोबिया का संकेत है.  

इवोल्यूशनरी थ्योरी और पुराना डर

वेरीवेलहेल्थ का कहना है, इंसानों के इस डर के पीछे एक बड़ी वजह हमारा इवोल्यूशन भी है. दरअसल, आदिमानवों के जमाने से ही इंसानी दिमाग ने खुद को खतरनाक और जहरीले जीवों से बचाना सीखा है. सांप और छिपकली की बनावट काफी हद तक मिलती-जुलती होती है इसलिए हमारा सबकॉन्शियस माइंड छिपकली को देखते ही उसे एक खतरे के रूप में देखने लगता है, भले ही वह जहरीली न हो.

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वहीं इसके अलावा बचपन का कोई बुरा एक्सपीरिएंस जैसे अचानक शरीर पर छिपकली का गिर जाना, इस डर को लाइफटाइम के लिए बढ़ा देता है जो लंबी उम्र तक भी आपको इस डर में घेरे रखता है.

अचानक होने वाला मूवमेंट और घिन

छिपकली के चलने का तरीका बहुत अजीब और अनप्रेडिक्टेबल होता है. वह कब, किस तरफ तेजी से भाग जाएगी, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल होता है. रिपोर्ट बताती हैं कि छिपकली की खुरदरी स्किन, उसकी पूंछ का अचानक टूट जाना और उसकी तेज मूवमेंट इंसानी दिमाग के थ्रेट वार्निंग सिस्टम को एक्टिव कर देती है.

कई लोग इसके डर को घिन भी मान लेते हैं. छिपकली की वजह से साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया फैलने का रिस्क भी रहता है, जिससे पेट से जुड़ी बीमारियां हो सकती हैं, यह डर भी लोगों को उससे दूर रखता है.

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