scorecardresearch
 

गिरफ्तार हुए, जेल गए, फिर भी नहीं छोड़ी पढ़ाई... जान‍िए BRICS समिट के मेहमान बने साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति की कहानी

किसी छात्र की जिंदगी में जेल की सलाखें आ जाएं तो शायद उसकी पढ़ाई वहीं खत्म हो जाए. लेकिन स‍िर‍िल रामाफोसा की कहानी इसका उलट है. नस्ल भेद के दौर में छात्र राजनीति से जुड़े रामाफोसा को 1974 में 11 महीने तक एकांत कारावास में रखा गया. दो साल बाद फिर गिरफ्तार हुए. इसके बावजूद उन्होंने कानून की पढ़ाई जारी रखी और 1981 में UNISA से कानून की डिग्री हासिल की. यही छात्र आगे चलकर दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन नेताओं में शामिल हुआ, लोकतांत्रिक संविधान के निर्माण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई और आखिरकार देश का राष्ट्रपति बना.

Advertisement
X
साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति स‍िर‍िल रामाफोसा (PTI)
साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति स‍िर‍िल रामाफोसा (PTI)

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS समिट 2026 में शिरकत करने पहुंचे दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा की पहचान आज एक सफल राजनेता, वकील और अरबपति उद्योगपति के रूप में होती है. लेकिन उनके इस मुकाम के पीछे बचपन की घोर गरीबी, नस्लीय भेदभाव और पढ़ाई के दौरान जेल की यातनाएं सहने का एक बेहद कठिन और जुझारू सफर छिपा है.

जब दक्षिण अफ्रीका में काले अश्वेत लोगों के लिए यूनिवर्सिटी का दरवाजा खोलना भी अपराध माना जाता था, तब रामाफोसा ने न सिर्फ कानून (LL.B.) की डिग्री हासिल की, बल्कि जेल की कोठरी में बैठकर अपनी परीक्षाएं दीं.

सोवेटो की तंग गलियों से शुरू हुआ संघर्ष

सिरिल रामाफोसा का जन्म 17 नवंबर 1952 को जोहान्सबर्ग के प्रसिद्ध टाउनशिप सोवेटो में हुआ था. उनके पिता एक मामूली पुलिस कांस्टेबल थे. उनकी शुरुआती पढ़ाई सोवेटो के 'त्शिलिदज़ी प्राइमरी स्कूल' (Tshilidzi Primary School) में हुई. इसके बाद 1971 में उन्होंने लिम्पोपो के 'सिकासा हाई स्कूल' से अपना मैट्‌रिक (12वीं) पूरा किया. हाई स्कूल के दिनों में ही उनमें नेतृत्व क्षमता दिखने लगी थी. वे क्रिश्चियन स्टूडेंट मूवमेंट के प्रेसिडेंट चुने गए और वहीं से उन्होंने नस्लभेद (Apartheid System) के खिलाफ आवाज उठाना शुरू किया.

Advertisement

जेल में बंद रहे, लेकिन पढ़ाई नहीं छोड़ी

1972 में रामाफोसा ने कानून की पढ़ाई के लिए यूनिवर्सिटी ऑफ द नॉर्थ में दाखिला लिया. यह यूनिवर्सिटी उस समय अश्वेत छात्रों के राजनीतिक प्रतिरोध का मुख्य केंद्र थी.

1. छात्र आंदोलन और पहली गिरफ्तारी (1974):
1974 में मोजाम्बिक की आजादी का जश्न मनाने के लिए आयोजित एक रैली के दौरान रामाफोसा को गिरफ्तार कर लिया गया. उन्हें 'आतंकवाद विरोधी अधिनियम' के तहत 11 महीने तक एकान्त कारावास में रखा गया.

2. सोवेटो अपराइजिंग और दूसरी गिरफ्तारी (1976):
1976 में प्रसिद्ध 'सोवेटो छात्र विद्रोह' के बाद उन्हें फिर से गिरफ्तार किया गया और 6 महीने के लिए प्रिटोरिया की प्रीटोरिया सेंट्रल जेल में बंद कर दिया गया.

3. जेल से पत्राचार के जरिए लॉ डिग्री:
लगातार गिरफ्तारियों और उत्पीड़न के कारण वे नियमित कॉलेज जाकर पढ़ाई नहीं कर सके. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ अफ्रीका (UNISA) से 'डिस्टेंस एजुकेशन' (पत्राचार) के जरिए पढ़ाई जारी रखी. 1981 में उन्होंने आखिरकार अपनी लॉ की डिग्री (B.Proc - Bachelor of Procurement/Law) सफलतापूर्वक हासिल की.

वकालत से मजदूर संघ और नेल्सन मंडेला के सिपाही तक

लॉ की डिग्री हासिल करने के बाद रामाफोसा ने कानून का इस्तेमाल गरीबों और मजदूरों के हक के लिए किया. 1982 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के खदान मजदूरों का सबसे बड़ा यूनियन नेशनल यूनियन ऑफ माइनवर्कर्स (NUM) बनाया और उसके जनरल सेक्रेटरी बने. उन्होंने 3 लाख से अधिक खदान श्रमिकों की हड़ताल का नेतृत्व करके रंगभेद सरकार की नींव हिला दी थी.

Advertisement

जब 1990 में नेल्सन मंडेला जेल से रिहा हुए, तो रामाफोसा को उनकी स्वागत समिति का चेयरमैन बनाया गया. मंडेला उन्हें अपनी नई पीढ़ी का सबसे प्रतिभाशाली नेता मानते थे. 1994 में जब दक्षिण अफ्रीका में लोकतंत्र आया, तो रामाफोसा को 'संविधान सभा' का अध्यक्ष बनाया गया. उन्होंने ही दक्षिण अफ्रीका के आधुनिक और लोकतांत्रिक संविधान का मसौदा तैयार किया.

शिक्षा और बिजनेस का अनोखा संगम

1990 के दशक के उत्तरार्ध में राजनीति से कुछ समय का ब्रेक लेकर उन्होंने बिजनेस की दुनिया में कदम रखा और 'शांदुका ग्रुप'  की स्थापना की, जिससे वे दक्षिण अफ्रीका के सबसे सफल और अमीर बिनेसमैन बने. 2018 में जेकब जुमा के इस्तीफे के बाद वे दक्षिण अफ्रीका के 5वें राष्ट्रपति बने. सिरिल रामाफोसा की पढ़ाई-लिखाई की यह कहानी यह साबित करती है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो जेल की सलाखें और विपरीत परिस्थितियां भी किसी छात्र को मंजिल तक पहुंचने से नहीं रोक सकतीं.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement