सिरिल रामफोसा (Cyril Ramaphosa) एक दक्षिण अफ्रीकी राजनेता हैं. वह दक्षिण अफ्रीका के पांचवें राष्ट्रपति हैं (South African President). रामफोसा अफ्रीकी राष्ट्रीय कांग्रेस (ANC) के अध्यक्ष भी हैं. वह दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े और सबसे शक्तिशाली ट्रेड यूनियन, नेशनल यूनियन ऑफ माइनवर्कर्स के महासचिव के रूप में लोकप्रिय हैं.
12 और 13 सितंबर 2026 को भारत की राजधानी दिल्ली में आयोजित 18वां ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (BRICS Summit 2026 India) में रामफोसा शामिल हुए.
1991 में, उन्हें ANC अध्यक्ष नेल्सन मंडेला (Nelson Mandela) के तहत ANC महासचिव चुना गया और रंगभेद समाप्त करने वाली वार्ता के दौरान वह ANC के मुख्य स्पीकर बनें. 1994 में देश के पहले पूर्ण लोकतांत्रिक चुनावों के बाद उन्हें संवैधानिक सभा का अध्यक्ष चुना गया. माना जाता है कि वह मंडेला के पसंदीदा उत्तराधिकारी थे. हालांकि, रामफोसा ने 1996 में राजनीति से इस्तीफा दे दिया (Cyril Ramaphosa Left the Politics) और एक व्यवसायी के रूप में प्रसिद्ध हुए. वह मैकडॉनल्ड्स दक्षिण अफ्रीका (McDonald's South Africa) के मालिक बने और एमटीएन के लिए बोर्ड के अध्यक्ष के साथ ही शांडुका समूह के संस्थापक के रूप में जाने जाते हैं.
वह दिसंबर 2012 में एएनसी के 53वें राष्ट्रीय सम्मेलन में राजनीति में लौटे और दक्षिण अफ्रीका के उप राष्ट्रपति बने (Cyril Ramaphosa rejoin the Politics).
रामफोसा का जन्म 17 नवंबर 1952 को सोवतो, जोहान्सबर्ग में हुआ था (Cyril Ramaphosa Born). 1971 में, उन्होंने सिबासा, वेंडा में मफाफुली हाई स्कूल से मैट्रिक किया, जहां उन्हें छात्र ईसाई आंदोलन का प्रमुख चुना गया. बाद में उन्होंने 1972 में लिम्पोपो प्रांत में नॉर्थ यूनिवर्सिटी (टरफ्लूप) में कानून का अध्ययन किया. विश्वविद्यालय में रहते हुए, रामफोसा छात्र राजनीति में शामिल हो गए और दक्षिण अफ्रीकी छात्र संगठन (एसएएसओ) और ब्लैक पीपुल्स कन्वेंशन (बीपीसी) में शामिल हो गए (Cyril Ramaphosa Education).
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा ने भारत की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 की सफल मेजबानी की सराहना की है। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों ने साझा घोषणा पत्र को स्वीकार कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है.
किसी छात्र की जिंदगी में जेल की सलाखें आ जाएं तो शायद उसकी पढ़ाई वहीं खत्म हो जाए. लेकिन सिरिल रामाफोसा की कहानी इसका उलट है. नस्ल भेद के दौर में छात्र राजनीति से जुड़े रामाफोसा को 1974 में 11 महीने तक एकांत कारावास में रखा गया. दो साल बाद फिर गिरफ्तार हुए. इसके बावजूद उन्होंने कानून की पढ़ाई जारी रखी और 1981 में UNISA से कानून की डिग्री हासिल की. यही छात्र आगे चलकर दक्षिण अफ्रीका के सबसे बड़े ट्रेड यूनियन नेताओं में शामिल हुआ, लोकतांत्रिक संविधान के निर्माण की प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाई और आखिरकार देश का राष्ट्रपति बना.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस महीने की शुरुआत में ऐलान किया था कि कोई भी अमेरिकी अधिकारी दक्षिण अफ्रीका में आयोजित G20 शिखर सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा. उन्होंने इसका कारण दक्षिण अफ्रीकी सरकार द्वारा श्वेत किसानोंके साथ होने वाले कथित दुर्व्यवहार को बताया था.
G20 शिखर सम्मेलन में अमेरिका के बहिष्कार पर दक्षिण अफ्रीका के व्यापार मंत्री पार्क्स ताऊ ने गहरा असंतोष व्यक्त किया है. उन्होंने कहा कि व्यापारिक वार्ता जारी रहेगी और अगले महीने अमेरिका G20 की अध्यक्षता संभालेगा. अफ्रीकी राष्ट्रपति रामफोसा ने अमेरिका की अनुपस्थिति में खाली कुर्सी को प्रतीकात्मक अध्यक्षता देने की बात कही थी.
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामफोसा की व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में ट्रंप से तीखी बहस हो गई. ट्रंप ने आरोप लगाया कि साउथ अफ्रीका में में गोरे किसानों का नरसंहार किया जा रहा है. इस दौरान ट्रंप ने कथित नरसंहार के वीडियो सबूत के तौर पर दिखाए. देखें यूएश टॉप-10.
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति रामफोसा 19 मई को वॉशिंगटन पहुंचे थे. उनकी इस यात्रा का मकसद अफ्रीका और अमेरिका के संबंधों में नई जान फूंकना है. लेकिन व्हाइट हाउस में इस मीटिंग के दौरान ट्रंप ने अचानक ही रामफोसा को नस्लवाद के मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया.