अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में पूरे 8 साल के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार छात्र संघ चुनाव (AMUSU Elections 2026-27) की सरगर्मियां लौट आई हैं. लेकिन जिस मंच से छात्रों के हक, हॉस्टल की सुविधाओं, रिसर्च और पढ़ाई-लिखाई के मुद्दों पर बहस होनी चाहिए थी, वहां की सियासत अब कैंपस की चहारदीवारी से बाहर निकलकर अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय विवादों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आ रही है.
अध्यक्ष पद के उम्मीदवारों के भाषणों में इस वक्त पढ़ाई से ज्यादा जिक्र शरजील इमाम, उमर खालिद, आजम खान की रिहाई और गाजा-फिलीस्तीन का हो रहा है.
शरजील इमाम और उमर खालिद के पक्ष में उठे सुर
चुनावी माहौल में सबसे ज्यादा चर्चा अध्यक्ष पद के उम्मीदवार नोमान अशरफ के भाषणों की हो रही है. उन्होंने अपने भाषण में जेल में बंद राजनीतिक बंदियों का मुद्दा उठाया.
अपने बयान का बचाव करते हुए नोमान अशरफ ने कहा, 'बात करते हो कि मैंने पॉलिटिकल प्रिजनर्स की बात कर दी, मैंने शरजील इमाम की बात कर दी... शरजील इमाम या उमर खालिद कोई भी हो, मैंने तकरीर में कहा था कि कानून को हाथ में लेने की इजाजत किसी को नहीं है. अदालत का फैसला अभी नहीं आया है, ट्रायल शुरू नहीं हुए हैं, तो तुम कैसे किसी को आतंकवादी या टेररिस्ट का तमगा दे सकते हो?'
गाजा, ईरान, सूडान और 'उम्मत' का जिक्र
कैंपस के चुनावी मंच से सिर्फ देश के मुद्दे ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुस्लिम देशों के हालात पर भी खुलकर बयानबाजी हो रही है. नोमान अशरफ ने अपने भाषण में गाजा, फिलीस्तीन, ईरान और सूडान के लोगों का जिक्र करते हुए कहा, 'ये फिलीस्तीन के लोगों, ये ईरान, सूडान के लोगों... तुम्हारे लिए मेरा दिल धड़कता है. घबराने की जरूरत नहीं है, उम्मत-ए-मुस्लिमा तुम्हारे साथ खड़ी है. हर तारीख के बाद सुबह होनी है, अबाबीलों का लश्कर आएगा, तुम्हारी फतह होगी और अल्लाह तुम्हें बचाएगा.'
आजम खान और जौहर यूनिवर्सिटी का मुद्दा भी गरमाया
कैंपस की बहस में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और AMU के पूर्व छात्र (Old Boy) आजम खान की रिहाई की मांग भी जोर-शोर से उठाई जा रही है.
अध्यक्ष पद के एक अन्य उम्मीदवार मोहम्मद इंतखाब ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए कहा, 'मेरे भाई ने जौहर यूनिवर्सिटी का जिक्र किया तो मैं भी उस डिमांड के साथ हूं. मैं कहना चाहूंगा कि हमारे ओल्ड बॉय आजम खान को सिर्फ इसलिए जेल में रखा है क्योंकि उन्होंने हिंदुस्तान के लोगों के लिए एक बड़ा इदारा कायम किया. हम इसकी कड़े शब्दों में निंदा करते हैं और उनकी रिहाई की मांग करते हैं. दोबारा अगर जौहर यूनिवर्सिटी की तरफ आंख उठाकर देखा तो अलीगढ़ के बहादुर सिपाही आपके सामने चट्टान की तरह खड़े होंगे.'