अक्सर ही अच्छी नौकरी और ज्यादा सैलरी आर्थिक चिंताओं का हल माना जाता है लेकिन ये हर बार सही हो, जरूरी नहीं. दरअसल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर एक 26 साल के युवा में बताया कि उसका सालाना 82 लाख का पैकेज है लेकिन महंगे शहर में रहने और बढ़ते खर्चों के कारण उसे बजट बनाकर चलना पड़ता है. उसने कहा कि नौकरी शुरू करने के बाद वह अपने खर्चों को लेकर पहले से ज्यादा अनुशासित हो गया है. इस पोस्ट को देखने के बाद कई यूजर्स अपनी कम सैलरी को लेकर सवाल कर रहे हैं कि 82 लाख का सालाना पैकेज होने के बााद भी अगर कोई गुजारा नहीं कर पा रहा है, तो हमारी सैलरी में क्या ही होगा.
पोस्ट में इन बातों का जिक्र
युवा ने पोस्ट में लिखा कि मुझे पता है कि मेरी आर्थिक स्थिति अच्छी है.लेकिन जब कॉन्सर्ट, बाहर खाना या नए कपड़े जैसी छोटी-छोटी खुशियों पर खर्च करने की बात आती है, तो मुझे लगता है कि मेरा बजट बहुत सीमित.
जब-जब छोटी-छोटी खुशियां बड़े खर्च की तरह लगने लगे
कर्मचारी ने बताया कि जहां एक ओर रोजमर्रा के खर्चे कंट्रोल में हैं, वहीं कॉन्सर्ट टिकट, थिएटर शो, एक डिनर या कपड़ों का एक अच्छा टुकड़ा जैसी कभी-कभार की खरीदारी को उचित ठहराना आश्चर्यजनक रूप से मुश्किल लगता है. पोस्ट के अनुसार, ये मेरे पूरे मासिक बजट को एक श्रेणी में (या कई महीनों के बजट में, स्थिति के आधार पर)ले लेते हैं और इनके लिए बचत करना बिल्कुल असंभव लगता है.

करीब 95,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 82 लाख रुपये) सालाना कमाने के बावजूद, यह कर्मचारी अपनी मासिक आय का हिसाब-किताब रखकर खर्च करता है. वह किराया, छात्र लोन की किस्त, किराना, ट्रैवल,कपड़े, स्वास्थ्य खर्च, सब्सक्रिप्शन, दान और बचत के लिए अलग-अलग बजट तय करता है.
अच्छी बचत के बाद भी असमंजस में हूं
पोस्ट में यूजर ने आगे लिखा कि वैसे तो स्थिति अच्छी दिखती है. उनके पास रिटायरमेंट खाते में करीब 40,000 अमेरिकी डॉलर, हेल्थ सेविंग्स अकाउंट में 6,000 अमेरिकी डॉलर और चार महीने के खर्च के बराबर इमरजेंसी फंड भी है. इसके बावजूद, उन्हें रोजमर्रा के खर्चों का बजट संभालना मुश्किल लगता है. उन्होंने कहा कि कपड़ों और मनोरंजन जैसी चीजों के लिए उनका खर्च अक्सर तय बजट से 90% से 110% तक अधिक हो जाता है. इसलिए 300 अमेरिकी डॉलर के अच्छे फॉर्मल जूते खरीदना भी उन्हें ऐसा महसूस कराता है, जैसे बजट में 300 डॉलर की कमी हो गई हो.

बोनस भी मिलता है...
कर्मचारी ने बताया कि उसे सालाना करीब 10,000 अमेरिकी डॉलर का बोनस मिलने की उम्मीद है. वह इस पैसे को खर्च करने के बजाय अपने रिटायरमेंट फंड में निवेश करना चाहता है, हालांकि उसने माना कि इसे खर्च करने का मन भी करेगा.
उसने कहा कि मैं बड़ी बचत करने में तो ठीक हूं, लेकिन रोजमर्रा के छोटे-छोटे खर्चों को संभालने में मुश्किल होती है. उसकी पोस्ट से कई लोग जुड़ाव महसूस कर रहे हैं. उनका कहना है कि अच्छी सैलरी होने के बावजूद बढ़ते खर्च, कर्ज, भविष्य की बचत और छोटी-छोटी खुशियों पर खर्च करने के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होता.