पढ़ाई पूरी करके जब आप नौकरी की तलाश में मार्केट में उतरते हैं, तब आपको पता चलता है कि जॉब मार्केट की हालात क्या है. लेकिन इस बीच अगर आपकी नौकरी चली जाए तो आप परेशान हो जाते हैं. फिर शुरू से उतनी ही मेहनत करनी होती है लेकिन एक कर्मचारी के साथ कुछ ऐसा हुआ है कि लोग उसकी कहानी जानकर हैरान हो जा रहे हैं. दरअसल, कर्मचारी ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर किया है.
इसमें उसने बताया कि नई कंपनी में जॉइन करने के कुछ ही हफ्तों के बाद ही उसे परफॉर्मेंस इम्प्रूवमेंट प्लान (PIP) पर डाल दिया गया है. हालांकि, पोस्ट में उसने पहले भी बताया था कि पहली नौकरी जाने के बाद उसके साथ दूसरी नौकरी में उसके साथ ऐसा ही हुआ है. उसका कहना है कि नई नौकरी शुरू करने के पहले महीने में ही उसे PIP पर डाल दिया गया और अब उसे समझ नहीं आ रहा कि कंपनी में उसकी स्थिति क्या है.
नई नौकरी के सात हफ्ते बाद फिर शुरू की जॉब सर्च
रेडिट पर किए पोस्ट में सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने बताया कि अगस्त में उसकी पहली नौकरी चली गई थी. इसके बाद उसे दूसरी कंपनी में काम मिल गया और उसे लगा कि अब बेरोजगारी का तनाव खत्म होगा. लेकिन नई नौकरी में करीब सात हफ्ते बिताने के बाद ही वह फिर से दूसरी नौकरी की तलाश कर रहा है. डेवलपर के मुताबिक, जॉइनिंग के पहले महीने में उसे PIP पर डाल दिया गया. यह प्रक्रिया एक हफ्ते तक चलने वाली थी, लेकिन दूसरे हफ्ते में भी जारी रही. इसके बाद से उसे समझ नहीं आ रहा है कि उसके साथ ये हो क्या रहा है?

कर्मचारी ने कहा- अपनी स्थिति नहीं समझ पा रहा
डेवलपर ने अपनी पोस्ट में लिखा कि उसे नहीं पता कि कंपनी में उसकी स्थिति क्या है. उसने बताया कि वह रिक्रूटर्स से संपर्क कर रहा है, अपने प्रोफेशनल नेटवर्क से भी मदद की गुहार लगा रहा है और अलग-अलग कंपनियों में आवेदन भी कर रहा है. हालांकि, अभी तक उसे कोई खास सफलता नहीं मिली है. उसने यह भी कहा कि पिछली नौकरी जाने के बाद वह अभी हाल ही में दोबारा काम पर लौटा था. ऐसे में इतने कम समय में फिर नौकरी तलाशना उसके लिए मानसिक रूप से थकाने वाला अनुभव बन गया है. नौकरी जाने के बाद उसे इस बात की भी चिंता हो रही है कि अगले महीने उसकी सैलरी आएगी या नहीं.

सोशल मीडिया पर उठे सवाल
डेवलपर की पोस्ट पर कुछ Reddit यूजर्स ने सवाल उठाया कि नई नौकरी शुरू करने के महज एक महीने के भीतर किसी कर्मचारी को PIP पर डालना कितना उचित है. कुछ लोगों ने कहा कि नए कर्मचारी को काम और कंपनी की प्रक्रिया समझने के लिए पर्याप्त समय और मार्गदर्शन मिलना चाहिए. हालांकि, यह पूरा मामला कर्मचारी की सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है. कंपनी का नाम और उसका पक्ष रिपोर्ट में सामने नहीं आया है. इसलिए इस अनुभव के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि सभी कंपनियों में PIP का इस्तेमाल नौकरी से निकालने के लिए ही किया जाता है.