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AI की मदद से हायरिंग में ₹1 करोड़ बचाने का दावा, हफ्ते में 11 उम्मीदवारों से मिले फाउंडर

कभी सीनियर पदों पर भर्ती के लिए कंपनियों को रिक्रूटमेंट एजेंसियों को मोटी फीस देनी होती थी. लेकिन एआई ने इस काम को भी आसान कर दिया है. अब AI टूल्स की मदद से उम्मीदवारों की तलाश, उनसे जुड़ी जानकारी जुटाने और मीटिंग तय करने जैसे काम किए जा रहे हैं. सोशल मीडिया पर सामने आए एक पोस्ट के बाग से हायरिंग को लेकर चर्चा तेज हो गई है. 

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एआई ने कैसे बचा दिए 1 करोड़ रुपये?
एआई ने कैसे बचा दिए 1 करोड़ रुपये?

नौकरी के लिए उम्मीदवारों को ढूंढना और सही व्यक्ति तक पहुंचना कंपनियों के लिए आसान काम नहीं होता. खासकर जब हायरिंग वाइस प्रेसिडेंट या कंपनी के शीर्ष लीडर यानी C-suite पदों के लिए हो, तो प्रक्रिया में काफी समय और पैसा लग सकता है. लेकिन अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ने इस प्रक्रिया के कुछ हिस्सों को बदल रहा है और मदद भी कर रहा है. इसका एक उदाहरण सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जहां एक फाउंडर ने AI टूल्स की मदद से हायरिंग में करीब ₹1 करोड़ की फीस बचाने का दावा किया है. 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में आदित्य कुलकर्णी ने एक ऐसे फाउंडर का अनुभव साझा किया, जो सीनियर पदों पर हायरिंग कर रहे थे. दावा है कि उन्होंने AI टूल्स की मदद से संभावित उम्मीदवारों की पहचान की, उनके संपर्क करने के लिए जानकारी जुटाई और उनसे मिलने का समय तय किया. इस प्रक्रिया के तहत एक हफ्ते में 11 उम्मीदवारों से मुलाकात भी की गई. 

एआई की मदद से उम्मीदवारों की तलाश 

कुलकर्णी की पोस्ट के मुताबिक, फाउंडर ने इस काम के लिए Claude, Apollo और Instinct जैसे टूल्स का इस्तेमाल किया. सबसे पहले Claude की मदद से संबंधित फंड्स की पिछले पांच साल की सार्वजनिक फाइलिंग पर रिसर्च किया गया. इसका मकसद संभावित उम्मीदवारों और उनकी पेशेवर पृष्ठभूमि की पहचान करना था.

इसके बाद Apollo की मदद से उम्मीदवारों के संपर्क विवरण जुटाए गए. फिर Instinct का इस्तेमाल करके उनसे संपर्क करने और मीटिंग शेड्यूल करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. इस तरह, उम्मीदवारों की तलाश से लेकर उनसे मुलाकात तय करने तक के कई चरणों में AI टूल्स की मदद ली गई. पोस्ट के अनुसार, फाउंडर एक सप्ताह में 11 उम्मीदवारों से मिल चुके थे. 

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भर्ती में ₹1 करोड़ बचाने का दावा कैसे आया? 

कुलकर्णी के मुताबिक, फाउंडर तीन पदों पर नियुक्तियां कर रहे थे. इसमें वाइस प्रेसिडेंट और C-suite लेवल के पदों को शामिल किया गया था. पोस्ट में बताया गया कि ऐसे पदों के लिए पारंपरिक रिक्रूटमेंट एजेंसियां सैलरी का करीब 30 प्रतिशत तक फीस ले सकती हैं. दावे के मुताबिक, इन पदों से जुड़ी सैलरी का कुल आधार ₹1 करोड़ से अधिक था.

इसी वजह से भर्ती पर लगने वाली फीस काफी बड़ी हो सकती थी. फाउंडर ने AI टूल्स की मदद से इस खर्च को बचाने का दावा किया. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ₹1 करोड़ की बचत का आंकड़ा सोशल मीडिया पोस्ट में किया गया दावा है. इसी तरह, AI से चुने गए उम्मीदवारों की गुणवत्ता और पारंपरिक रिक्रूटमेंट एजेंसियों के जरिए मिले उम्मीदवारों से उनकी तुलना के बारे में भी ठोस जानकारी सामने नहीं आई है. 

क्या AI बदल रहा हायरिंग का तरीका? 

इस घटना ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या AI कंपनियों के भर्ती खर्च को कम कर सकता है. उम्मीदवारों की शुरुआती तलाश, सार्वजनिक रिकॉर्ड की जांच, उसने जुड़े विवरण जुटाना और मीटिंग तय करना जैसे कामों में AI टूल्स मदद कर सकते हैं. लेकिन उम्मीदवार की वास्तविक क्षमता, अनुभव, नेतृत्व कौशल और किसी पद के लिए उसकी उपयुक्तता का आकलन करना अब भी अहम है. सिर्फ संपर्क विवरण मिल जाना या मीटिंग तय हो जाना हायरिंग की गारंटी नहीं है.      
 

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