आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को इसलिए लाया गया था ताकि सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स का काम आसान हो सके. उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ सके. आज तो यह है कि कोड लिखने और टेस्ट करने से लेकर प्रोडक्ट डॉक्युमेंट्स बनाने और टिकट रिजॉल्व करने तक, AI अब सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के हर हिस्से में हाथ बंटा रहा है. टेक कंपनियों का तर्क है कि जब AI जैसा भारी-भरकम काम संभाल लेगा, तो इंजीनियर्स के पास उस काम के लिए ज्यादा समय होगा जिसमें इंसानी दिमाग और सोच की जरूरत होती है.
लेकिन अब कुछ इंजीनियर्स को डर सता रहा है कि असलियत में इसका बिल्कुल उल्टा हो रहा है. उनका कहना है कि जब AI ही सारा काम कर रहा है, तो डेवलपर्स के पास कोड को गहराई से समझने, समस्याओं को सुलझाने या यह जानने का भी समय नहीं बचा है कि वे असल में बना क्या रहे हैं. बिजनेस जगत के दिग्गज और जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए इसे बेहद 'दुखद' बताया है.
'AI तूने क्या किया, इंजीनियरिंग का हाल इतना भयानक...'
इस बहस की शुरुआत 'X' (ट्विटर) पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर की पोस्ट से हुई, जिसने अब पूरी टेक दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. 'voxium' नाम के यूजर (इंजीनियर) ने लिखा कि करीब दो हफ्ते पहले ही उन्होंने एक बड़ी कंपनी में काम करना शुरू किया है और वे यह देखकर हैरान रह गए कि इंजीनियरिंग का कितना सारा काम एंथ्रोपिक का AI टूल 'क्लॉड कोड' संभाल रहा है.
इंजीनियर ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'इंजीनियरिंग का हाल इस वक्त बेहद भयानक है. एक बड़ी कंपनी में मुझे नया रोल शुरू किए आधा महीना हो गया है. यहां किसी को कुछ नहीं पता. स्पेक्स, कोड, टेस्ट्स, PRD, टिकट्स, उनका समाधान, रिपोर्ट्स... सब कुछ 'क्लॉड कोड' बना रहा है. मेरी टीम में किसी को भी यह स्थिति पसंद नहीं है.'
सबसे ज्यादा चिंताजनक बात जो इस इंजीनियर ने उठाई, वह यह है कि डेवलपर्स अब AI द्वारा जनरेट किए गए कोड को समझने में समय ही नहीं बिता रहे हैं. उनका कहना है कि इंजीनियर्स अब समस्याओं को सुलझाने, बग्स (खामियों) की जांच करने और सिस्टम कैसे काम कर रहा है यह समझने के बजाय, सिर्फ क्लॉड को निर्देश दे रहे हैं, उसके आउटपुट की समीक्षा कर रहे हैं और उसे आगे भेज रहे हैं.
श्रीधर वेम्बू की चेतावनी: 'हम बिना समझे तेजी से गाड़ी चला रहे हैं'
जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने इस पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए मौजूदा स्थिति को निराशाजनक बताया. उन्होंने कहा कि वे खुद अपने इंजीनियर्स को AI का इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं, लेकिन अपनी समझ AI को सौंपने से मना करते हैं.
श्रीधर वेम्बू ने लिखा, यह वाकई दुखद है. मैं अपने इंजीनियर्स से हमेशा कहता हूं कि AI का इस्तेमाल करें, लेकिन कभी भी अपनी समझ और विवेक AI के हवाले न करें. उन्होंने टेक इंडस्ट्री की तुलना एक लग्जरी कार से करते हुए चेतावनी दी कि एक इंडस्ट्री के तौर पर, हम एक ऐसी नई और फैंसी कार में बहुत तेजी से भाग रहे हैं जिसे चलाना हम मुश्किल से ही जानते हैं. यह स्थिति सीधे तौर पर किसी बड़े हादसे को न्योता दे रही है.
एलन मस्क ने भी दिया रिएक्शन
इस पूरी चर्चा ने टेक अरबपति एलन मस्क का ध्यान भी खींचा. एलन मस्क ने उस इंजीनियर की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए सिर्फ एक शब्द लिखा, 'Yikes' (हे भगवान/यह तो डरावना है), और AI-जनरेटेड सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट पर चल रही इस बहस में अपनी सहमति जताई.
सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स की भूमिका को लेकर यह बहस ऐसे समय में सामने आई है जब 'क्लॉड कोड' जैसे कोडिंग टूल्स को जटिल सॉफ्टवेयर कार्यों को संभालने में बेहद सक्षम बनाया जा रहा है. डेवलपर्स के लिए इसका मतलब है तेजी से कोडिंग होना और दोहराव वाले कामों में कम समय लगना. लेकिन जैसे-जैसे AI पूरे डेवलपमेंट प्रोसेस पर कब्जा जमा रहा है, अब यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया है कि इंसानी कोडर्स के लिए असल में करने को क्या काम बचा है?