रूस की स्टेट डूमा के डिप्टी और डिफेंस कमेटी के फर्स्ट डिप्टी चेयरमैन एलेक्सी झुरावलेव ने अमेरिका द्वारा रूसी झंडे वाले तेल टैंकर की जब्ती को समुद्री डकैती कहा है. साथ ही रूसी क्षेत्र पर हमला करार देते हुए कड़ा सैन्य जवाब देने की मांग की है. उन्होंने कहा कि हमें टॉरपीडो से हमला करके दो अमेरिकी कोस्ट गार्ड जहाज डुबो देने चाहिए – यह अमेरिका की 'नाक पर चोट' करेगा.
झुरावलेव ने अमेरिका को रोकने के लिए सीमित हमले का सुझाव दिया. साथ ही रूसी सैन्य सिद्धांत का हवाला देते हुए परमाणु जवाब की संभावना भी जताई. यह बयान वेनेजुएला संकट के बीच अमेरिका-रूस तनाव को और बढ़ा रहा है.
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तेल टैंकर जब्ती: क्या हुआ और क्यों बढ़ा तनाव?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार वेनेजुएला पर कड़ा रुख अपनाए हुए है. दिसंबर 2025 में वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी फोर्सेस ने गिरफ्तार किया था. इसके बाद अमेरिका ने वेनेजुएला के तेल निर्यात पर पूरी ब्लॉकेड लगा दी.
टैंकर मैरिनेरा वेनेजुएला से तेल लेने जा रहा था, लेकिन अमेरिकी कोस्ट गार्ड ने इसे रोकने की कोशिश की. जहाज भागा और रूसी झंडा लगा लिया. रूसी पनडुब्बी और जहाजों ने इसे एस्कॉर्ट किया, लेकिन 7 जनवरी को अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस ने हेलिकॉप्टर से जहाज पर चढ़कर कब्जा कर लिया. एक दूसरा टैंकर सोफिया भी जब्त किया गया.
रूस का विरोध: रूस ने इसे अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन बताया. क्रेमलिन ने जहाज पर मौजूद रूसी नागरिकों की सुरक्षित वापसी की मांग की. रूसी मीडिया ने इसे पाइरेसी कहा है.
अमेरिका का पक्ष: व्हाइट हाउस ने कहा कि यह जहाज शैडो फ्लीट का हिस्सा था, जो प्रतिबंधित तेल (वेनेजुएला, रूस, ईरान) ढोता है. अमेरिका इसे फेक रूसी झंडा बता रहा है.
यह घटना यूक्रेन युद्ध और वेनेजुएला संकट के बीच आई है. रूस वेनेजुएला का पुराना सहयोगी है. जबकि अमेरिका ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में लैटिन अमेरिका पर नियंत्रण बढ़ा रहा है. फिलहाल सीधे सैन्य टकराव की संभावना कम है, क्योंकि दोनों देश यूक्रेन शांति वार्ता में लगे हैं. लेकिन तनाव बढ़ सकता है – जैसे रूस अमेरिकी जहाजों को परेशान करे या साइबर अटैक करे.
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अमेरिका-रूस सीधे टकराव की आशंका?
झुरावलेव के बयान से तनाव बढ़ा है, लेकिन क्रेमलिन ने अभी इसे आधिकारिक नहीं बनाया. विशेषज्ञ कहते हैं कि फिलहाल बड़ा युद्ध नहीं होगा, क्योंकि ट्रंप और पुतिन के संबंध अच्छे हैं. यूक्रेन पर बातचीत चल रही है. रूस साइबर अटैक या अन्य प्रॉक्सी तरीकों से जवाब दे सकता है. अमेरिका ने कहा कि जहाज फेक झंडा लेकर चल रहा था. क्रू पर मुकदमा चल सकता है.
अगर टकराव हुआ तो रूस के 5 खतरनाक हथियार
रूस के पास कई उन्नत हथियार हैं जो हाइपरसोनिक स्पीड और परमाणु क्षमता की वजह से अमेरिकी डिफेंस सिस्टम को चकमा दे सकते हैं. ये अनस्टॉपेबल कहे जाते हैं, हालांकि कोई हथियार 100% अजेय नहीं होता. यहां है रूस के टॉप 5 हथियार ...

आरएस-28 सरमत (Sarmat या Satan II): दुनिया की सबसे शक्तिशाली ICBM मिसाइल. रेंज 18,000 किमी, कई परमाणु वारहेड ले जा सकती है. अमेरिकी मिसाइल डिफेंस को भेदने की क्षमता. अमेरिका के किसी शहर को मिनटों में नष्ट कर सकती है.

अवानगार्ड (Avangard): हाइपरसोनिक ग्लाइड व्हीकल. स्पीड 25 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा. पैंतरेबाजी करके डिफेंस सिस्टम को चकमा देता है. परमाणु हमला करने में सक्षम.

3M22 जिरकॉन (Zircon): हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल. स्पीड 11 हजार किलोमीटर प्रतिघंटा से ज्यादा. जहाजों या जमीन पर हमला. अमेरिकी नौसेना के कैरियर या बेस को निशाना बना सकती है. रोकना बहुत मुश्किल.
पोसाइडन (Poseidon): परमाणु ऊर्जा वाला अंडरवाटर ड्रोन/टॉरपीडो. अनलिमिटेड रेंज, अमेरिकी तटों पर रेडियोएक्टिव सुनामी पैदा कर सकता है. चुपके से काम करता है.

बुरेवेस्तनिक (Burevestnik): परमाणु इंजन वाली क्रूज मिसाइल. अनलिमिटेड रेंज, कम ऊंचाई पर उड़कर रडार से बचती है. परमाणु वारहेड से तबाही मचा सकती है.
ये हथियार रूस की सुपर वेपन्स हैं, जो अमेरिका से डिटरेंस के लिए बनाए गए हैं. लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अमेरिका की मिसाइल डिफेंस और नेवी भी बहुत उन्नत है, इसलिए पूर्ण युद्ध में दोनों पक्षों को भारी नुकसान होगा.
झुरावलेव जैसे नेताओं के बयान भले उग्र हों, लेकिन रूस आधिकारिक तौर पर संयम बरत रहा है. दुनिया को उम्मीद है कि तनाव बातचीत से कम हो, वरना परमाणु शक्तियों का टकराव वैश्विक संकट ला सकता है.