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ईरान के 5 किलो के वो बम जिनसे परेशान है इजरायल, हर हमले में 11 से 13 km तक मच रही तबाही

ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइलों में 5 किलो के क्लस्टर बॉमलेट्स लगाए हैं, जो ऊंचाई से छूटकर 11-13 किमी तक फैलकर बेतरतीब हमला करते हैं. ये इजरायल की एयर डिफेंस को बायपास करते हैं, क्योंकि मिसाइल रोकने के बाद भी बॉमलेट्स गिरते रहते हैं. इससे आम लोगों में डर फैल रहा है. यह युद्ध में नई रणनीति है, जो डिफेंस को कमजोर करने की कोशिश है.

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क्लस्टर बमों को लेकर जाती मिसाइल. (Photo: ITG)
क्लस्टर बमों को लेकर जाती मिसाइल. (Photo: ITG)

ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में अब एक नया हथियार सामने आया है, जिससे इजरायल की एयर डिफेंस सिस्टम को बड़ी मुश्किल हो रही है. ईरान अपने बैलिस्टिक मिसाइलों में छोटे-छोटे क्लस्टर बम (सबमुनिशन) लगा रहा है. ये बम हर एक सिर्फ 5 किलो के हैं, लेकिन ऊंचाई से छोड़े जाने पर 11 से 13 किलोमीटर तक फैलकर बेतरतीब हमला करते हैं. ये छोटे बम घरों, सड़कों, पार्कों और दुकानों पर गिरते हैं, जिससे आम नागरिकों में डर फैल रहा है.

क्लस्टर बम क्या हैं और कैसे काम करते हैं?

क्लस्टर बम एक बड़े मिसाइल में लगते हैं. जिसके सिरे में कई छोटे बम (बॉमलेट्स) भरे होते हैं. मिसाइल ऊंचाई पर पहुंचकर ये छोटे बम छोड़ देती है. ये बम हवा में फैल जाते हैं. जमीन पर बेतरतीब गिरते हैं. ईरान की ज्यादातर बैलिस्टिक मिसाइलों में 24 बॉमलेट्स लगे होते हैं, लेकिन खोर्रमशहर मिसाइल में 80 तक बॉमलेट्स लगाए जा सकते हैं. हर बॉमलेट में 5 किलो (11 पाउंड) तक विस्फोटक होता है. 

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ये बम ग्रेनेड जैसा छोटा विस्फोट करते हैं, लेकिन बड़े इलाके में फैलकर बहुत नुकसान पहुंचाते हैं. CNN ने दो अलग-अलग हमलों का विश्लेषण किया, जिसमें एक हमले में 7 मील (11 किमी) और दूसरे में 8 मील (13 किमी) तक बॉमलेट्स फैले थे.

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इजरायल की एयर डिफेंस को क्यों चुनौती?

इजरायल की एयर डिफेंस (जैसे एरो और डेविड स्लिंग) बड़े बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में बहुत सफल रही है. लेकिन क्लस्टर बम वाली मिसाइलों से समस्या यह है कि मिसाइल को रोकने के बाद भी बॉमलेट्स छूट जाते हैं. अगर मिसाइल को बीच में ही मार दिया जाए, तो भी बॉमलेट्स पहले ही छूट चुके होते हैं. 

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आयरन डोम सिस्टम छोटे बॉमलेट्स को रोक सकता है, लेकिन ये बहुत छोटे और तेजी से गिरते हैं, इसलिए हमेशा सफल नहीं होता. विशेषज्ञ ताल इनबार कहते हैं कि ईरान ने जानबूझकर ऊंचाई पर बॉमलेट्स छोड़ने की तकनीक अपनाई है, ताकि ग्राउंड इंटरसेप्शन मुश्किल हो जाए. इससे इजरायल को हर मिसाइल के लिए दर्जनों इंटरसेप्टर खर्च करने पड़ सकते हैं, जो महंगे हैं.

Iran cluster munitions

कितने हमले हुए और कितना नुकसान?

इस युद्ध में ईरान ने अब तक आधी से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों में क्लस्टर बम लगाए हैं. 9 मार्च के एक हमले में टेल अवीव के बाहरी इलाके में बॉमलेट गिरा, जिसमें दो मजदूर मारे गए. वे उस समय शेल्टर में नहीं थे. दूसरे हमले में टेल अवीव के उत्तरी हिस्से और आसपास के इलाकों में कार वॉश, घर और पार्क पर गिरे. कई लोग घायल हुए. इजरायली सेना ने लोगों को चेतावनी दी है कि सायरन बजने के बाद भी कुछ मिनट तक शेल्टर में रहें और अनएक्सप्लोडेड बॉमलेट्स के पास न जाएं.

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कानूनी और नैतिक सवाल

क्लस्टर बम बेतरतीब हथियार हैं, इसलिए इन्हें आबादी वाले इलाकों में इस्तेमाल करना अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के खिलाफ है. एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जून 2025 के 12 दिनों के युद्ध में ईरान के क्लस्टर बम इस्तेमाल को मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन बताया था.

इजरायल पर भी 2006 में लेबनान में क्लस्टर बम इस्तेमाल का आरोप लगा था, लेकिन इजरायल कहता है कि वह कानून के अनुसार इस्तेमाल करता है. 

Iran cluster munitions

ईरान की नई रणनीति क्या है?

पहले ईरान दर्जनों मिसाइलें एक साथ दागकर इजरायल की डिफेंस को ओवरलोड करने की कोशिश करता था. लेकिन अब अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान की मिसाइल लॉन्च क्षमता कम हो गई है. इसलिए अब वह कम मिसाइलों से ज्यादा नुकसान पहुंचाने की कोशिश कर रहा है. 

क्लस्टर बम वाली मिसाइलें डिफेंस को बायपास करती हैं, लोगों को शेल्टर में भेजती हैं, अर्थव्यवस्था पर बोझ डालती हैं और इजरायल के इंटरसेप्टर स्टॉक को खत्म करने की कोशिश करती हैं. विशेषज्ञ एन.आर. जेंजेन-जोन्स कहते हैं कि ये हथियार मुख्य रूप से आम लोगों में डर फैलाने और मनोबल तोड़ने के लिए बनाए गए हैं, न कि सैन्य लक्ष्यों के लिए.

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ईरान के 5 किलो के क्लस्टर बॉमलेट्स अब इजरायल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गए हैं. ये छोटे बम बड़े इलाके में फैलकर तबाही मचाते हैं. इजरायल की एयर डिफेंस को भी मुश्किल में डाल देते हैं. यह युद्ध अब सिर्फ मिसाइलों का नहीं रहा, बल्कि मनोवैज्ञानिक और आर्थिक युद्ध भी बन गया है. 

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