scorecardresearch
 

स्मार्ट सेंसर, AI, ऑटोमेटेड गनः ऑपरेशन सिंदूर के बाद कैसे सेना की मदद कर रही है टेक्नोलॉजी

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने सूचना और तकनीक को मिलाकर युद्धनीति बदल दी है. अब स्मार्ट फेंसिंग और AI निगरानी से बॉर्डर मैनेजमेंट बेहद मजबूत हुआ है, जिससे सेना दुश्मन का मुंह तोड़ने के लिए तैयार है.

Advertisement
X
कर्तव्य भवन के नीचे अंडरग्राउंड जॉइंट ऑपरेशन सेंटर का नजारा कुछ ऐसा ही होगा. (Photo: Getty)
कर्तव्य भवन के नीचे अंडरग्राउंड जॉइंट ऑपरेशन सेंटर का नजारा कुछ ऐसा ही होगा. (Photo: Getty)

मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर ने न केवल भारतीय सीमाओं की सुरक्षा को एक नई परिभाषा दी, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया कि अब युद्ध केवल गोलियों और टैंकों से नहीं, बल्कि सूचना और तकनीक (Information and Technology) से जीते जाते हैं. आज, उस ऑपरेशन के ठीक एक साल बाद, युद्ध को लेकर हमारी समझ पूरी तरह बदल चुकी है.  

अब युद्ध का मैदान केवल जमीन या आसमान नहीं है, बल्कि डिजिटल स्पेस और डेटा सबसे बड़े हथियार बन गए हैं. पिछले एक साल में भारतीय सेना ने अपनी युद्धनीति में सूचना तकनीक का ऐसा समावेश किया है, जिसने दुश्मन के लिए सेंध लगाना लगभग नामुमकिन बना दिया है.

यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर के एक साल बाद: क्या हम पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक के लिए तैयार हैं? जानें सेना की नई ताकत

युद्ध की नई परिभाषा: सूचना और तकनीक का महासंगम

आज के दौर में युद्ध का मतलब केवल आमने-सामने की लड़ाई नहीं है. इसे अब हाइब्रिड वॉरफेयर कहा जाता है, जहां हथियार चलाने से पहले सूचनाओं के जरिए दुश्मन को मानसिक और तकनीकी रूप से पंगु बना दिया जाता है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय सेना ने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया है.

Advertisement

Military Modernization

इसका मतलब है कि युद्ध शुरू होने से पहले ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग करके दुश्मन के इरादों को भांप लेना. अब हमारे पास ऐसे रडार और सेंसर्स हैं जो न केवल दुश्मन की लोकेशन बताते हैं, बल्कि यह भी भविष्यवाणी कर सकते हैं कि उनका अगला कदम क्या होगा. सूचना तकनीक का उपयोग अब साइबर अटैक से बचने और दुश्मन के संचार तंत्र को जाम करने में किया जा रहा है.

सेना की तैयारियों में डिजिटल बदलाव

पिछले 12 महीनों में भारतीय थल सेना, भारतीय वायु सेना और भारतीय नौसेना के बीच तालमेल के लिए इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप्स (IBGs) को और भी आधुनिक बनाया गया है. अब हर जवान के पास ऐसे डिजिटल उपकरण हैं जो उसे हेडक्वार्टर से रीयल-टाइम में जोड़ते हैं. तकनीक का सबसे बड़ा असर थिएटर कमांड के रूप में दिख रहा है, जहां तीनों सेनाएं एक ही नेटवर्क पर काम करती हैं. 

यह भी पढ़ें: हंतावायरस का नया चेहरा दिखा, क्रूज शिप पर इंसानों से इंसानों में फैलने की खबर

अगर सीमा पर कोई छोटा सा ड्रोन भी नजर आता है, तो उसकी जानकारी सेकंडों में एयरफोर्स और आर्मी इंटेलिजेंस तक पहुंच जाती है. इसके अलावा, स्वदेशी तपस और आर्चर जैसे सशस्त्र ड्रोन्स की तैनाती ने यह सुनिश्चित किया है कि हमें दुश्मन को मारने के लिए अपने जवानों को खतरे में डालने की जरूरत नहीं है. हम दूर बैठकर सटीक निशाना लगा सकते हैं.

Advertisement

Military Modernization

बॉर्डर मैनेजमेंट: अब स्मार्ट हुई सरहद

ऑपरेशन सिंदूर के बाद बॉर्डर मैनेजमेंट में सबसे बड़ा बदलाव स्मार्ट फेंसिंग और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस के रूप में आया है. अब सीमा पर केवल जवान ही पहरा नहीं देते, बल्कि स्मार्ट फेंस में लगे सेंसर्स और थर्मल इमेजर कैमरे 24 घंटे काम करते हैं. यदि कोई घुसपैठिया अंधेरे या घने कोहरे का फायदा उठाने की कोशिश करता है, तो लेजर दीवारें (Laser Walls) तुरंत अलार्म बजा देती हैं. 

हिमालय के ऊंचे क्षेत्रों में, जहां ऑक्सीजन कम है और ठंड ज्यादा, वहां अब इंसानों की जगह रिमोट-कंट्रोल्ड पोस्ट और ऑटोमेटेड गन्स तैनात की जा रही हैं. इससे न केवल जवानों की जान बच रही है, बल्कि निगरानी की क्षमता भी 100% सटीक हो गई है.

यह भी पढ़ें: ...PAK में बैठे वो गुनहगार जिनको निपटाने के लिए हुआ था ऑपरेशन सिंदूर

एक साल में कितना बदला भारत?

एक साल पहले ऑपरेशन सिंदूर के दौरान हमें जो अनुभव मिले, उन्होंने हमारी कमियों को दूर करने का मौका दिया. आज भारतीय सेना एक टेक्नोलॉजी ड्रिवेन फोर्स बन चुकी है. अब हमारी रणनीति केवल रिएक्ट करने की नहीं, बल्कि प्री-एम्प्टिव (दुश्मन के हमले से पहले ही उसे खत्म करना) की है. सैटेलाइट इमेजरी, रीयल-टाइम डाटा शेयरिंग और एआई-आधारित हथियार प्रणालियों ने भारत को एक ऐसी सैन्य महाशक्ति बना दिया है, जो किसी भी स्थिति में अपनी संप्रभुता की रक्षा करने के लिए तैयार है.

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Advertisement