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भारतीय नौसेना ने पेश किया स्वदेशी ASW जहाज अग्रय का प्रतीक चिह्न

भारतीय नौसेना ने स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट अग्रय का क्रेस्ट पेश किया है. क्रेस्ट अर्जुन और गांडीव से प्रेरित है. यह दुश्मन पनडुब्बियों को खोजने और मारने का काम करेगा.

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ये है भारतीय नौसेना का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अग्रय. (Photo: Indian Navy)
ये है भारतीय नौसेना का पनडुब्बी रोधी युद्धपोत अग्रय. (Photo: Indian Navy)

भारतीय नौसेना ने स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट (ASW-SWC) सीरीज के पांचवें जहाज अग्रय का आधिकारिक क्रेस्ट पेश किया है. गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा निर्मित यह जहाज भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा और पनडुब्बी रोधी क्षमता को और मजबूत करने वाला है.

अग्रय का क्रेस्ट: अर्जुन और गांडीव से प्रेरणा

अग्रय का क्रेस्ट महाभारत के महान योद्धा अर्जुन और उनकी प्रसिद्ध धनुष गांडीव से प्रेरित है. क्रेस्ट में अर्जुन की सटीक निशानेबाजी, सतर्कता और छिपे हुए दुश्मनों पर निर्णायक हमले का प्रतीक दिखाया गया है. जहाज का आदर्श वाक्य है - Ever Foremost, Victorious in Battle यानी सदा अग्रणी, युद्ध में विजयी.

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यह क्रेस्ट न केवल सौंदर्य की दृष्टि से आकर्षक है बल्कि जहाज की भूमिका को भी पूरी तरह दर्शाता है. पनडुब्बियों जैसे छिपे हुए खतरों का पता लगाना, उन पर सटीक हमला करना और युद्ध में हमेशा आगे रहना- यही अग्रय की जिम्मेदारी होगी.

अग्रय भारतीय नौसेना के स्वदेशी एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट प्रोग्राम का पांचवां जहाज है. यह छोटे लेकिन अत्यंत शक्तिशाली युद्धपोतों की श्रेणी में आता है, जो उथले पानी और तटीय इलाकों में प्रभावी ढंग से काम कर सकता है. 

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ये जहाज दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने, उन्हें ट्रैक करने और जरूरत पड़ने पर नष्ट करने में विशेष रूप से सक्षम हैं. आधुनिक सेंसर, सोनार सिस्टम, टॉरपीडो और अन्य हथियारों से लैस अग्रय तटीय सुरक्षा में नौसेना की बड़ी ताकत बनेगा. स्वदेशी निर्माण से न केवल लागत में बचत हुई है बल्कि विदेशी निर्भरता भी कम हुई है.  

महत्वपूर्ण भूमिका और क्षमताएं

आज के युद्ध में पनडुब्बियां बहुत बड़ा खतरा बन गई हैं. दुश्मन आसानी से तटीय क्षेत्रों में घुस सकता है. ऐसे में ASW शैलो वॉटर क्राफ्ट जैसे छोटे, तेज और चपल जहाज बहुत उपयोगी साबित होते हैं. अग्रय उथले पानी में भी आसानी से घूम सकता है, जहां बड़े युद्धपोत नहीं जा पाते. 

यह जहाज दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाने के लिए एडवांस सोनार और सेंसर से लैस होगा. साथ ही इसमें टॉरपीडो लॉन्च करने की क्षमता भी होगी. नौसेना इसे पूर्वी और पश्चिमी दोनों तटों पर तैनात करने की योजना बना रही है. खासकर अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में बढ़ते खतरे को देखते हुए इन जहाजों की अहमियत बहुत ज्यादा है.

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नौसेना की रणनीति में बदलाव

भारतीय नौसेना लगातार अपनी क्षमताओं को बढ़ा रही है. बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर, डेस्ट्रॉयर और सबमरीन के साथ-साथ छोटे लेकिन स्मार्ट जहाजों पर भी जोर दिया जा रहा है. ASW-SWC प्रोग्राम इसी रणनीति का हिस्सा है. ये जहाज न केवल पनडुब्बी रोधी युद्ध में मदद करेंगे बल्कि समुद्री निगरानी, खोज और बचाव कार्यों तथा तटीय सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे.

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अग्रय का जल्द ही भारतीय नौसेना में आधिकारिक शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि होगी. इसके बाद इस सीरीज के और जहाज भी सेवा में आ जाएंगे. रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ये स्वदेशी ASW क्राफ्ट भारतीय नौसेना को क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति दिलाएंगे. चीन और पाकिस्तान की बढ़ती समुद्री गतिविधियों के बीच ये जहाज नौसेना की पहली पंक्ति की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे. 

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