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सेना मंगाएगी मोर्टार दागने वाली गाड़ी, दुश्मन कहीं भी छिपे... हो जाएगा छलनी

भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के लिए ऑटोमेटेड मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल (MSV) खरीदने जा रही है. ये वाहन 81mm और 120mm मोर्टार को ऑटोमैटिक फायर करेंगे, जिससे सटीकता बढ़ेगी.

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ये ऑटोमेटेड मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल. इसके आने से मोर्टार हमला बेहतरीन हो जाएगा. (Photo:X/@TheMilObserverr)
ये ऑटोमेटेड मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल. इसके आने से मोर्टार हमला बेहतरीन हो जाएगा. (Photo:X/@TheMilObserverr)

भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता को और अधिक तेज और घातक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है. सेना अब मोर्टार स्पेशलिस्ट व्हीकल (Mortar Specialist Vehicles - MSVs) खरीदने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है. ये मोर्टार वाहन युद्ध के मैदान में मोर्टार फायरिंग को पूरी तरह ऑटोमेटिक बनाएंगे, जिससे सटीकता, गति और सैनिकों की सुरक्षा में बहुत बड़ा सुधार होगा.

वर्तमान में भारतीय सेना के पास पारंपरिक मोर्टार सिस्टम हैं, जिनमें फायरिंग की सटीकता ज्यादातर क्रू सदस्यों के अनुभव और मैनुअल गणनाओं पर निर्भर करती है. इससे समय लगता है. गलती की संभावना भी रहती है. नए MSV वाहन इस समस्या को पूरी तरह हल करने वाले हैं. 

इनमें ऑनबोर्ड बैलिस्टिक कंप्यूटर लगा होगा, जो लक्ष्य की जानकारी मिलते ही स्वचालित रूप से एलिवेशन, दिशा और फायरिंग डेटा तैयार कर देगा. इससे पहली गोली ही लक्ष्य पर लगने की संभावना बहुत बढ़ जाएगी और गोला-बारूद की बर्बादी भी कम होगी. 

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RFI जारी, भारतीय उद्योग को बुलावा

भारतीय सेना ने डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर 2020 के तहत भारतीय उद्योग को रिक्वेस्ट फ़ॉर इन्फॉर्मेशन (RFI) जारी किया है. इसमें व्हील्ड प्लेटफॉर्म पर आधारित मोर्टार वाहन मांगा गया है, जो 81 मिमी और 120 मिमी दोनों प्रकार के मोर्टार सिस्टम के साथ जुड़ सके. यह पूरी तरह स्वदेशी विकास को बढ़ावा देने वाला कदम है.

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वाहन की मुख्य विशेषताएं

नए मोर्टार स्पेशलिस्ट वाहन को सिर्फ दो सदस्यों का क्रू संचालित करेगा. फॉरवर्ड ऑब्जर्वर या मोर्टार फायर कंट्रोलर से लक्ष्य के लोकेशन मिलते ही वाहन का फायर-कंट्रोल सिस्टम स्वचालित रूप से गणना करके मोर्टार को सही एंगल पर सेट कर देगा. 

सेना ने बहुत सख्त मापदंड तय किए हैं...

  • वाहन को फायरिंग के लिए तैयार होने में सिर्फ 20 सेकंड लगने चाहिए.
  • एक लक्ष्य पर फायरिंग के बाद अगले लक्ष्य पर दोबारा निशाना साधने में सिर्फ 5 सेकंड.
  • वाहन लगभग 54 मोर्टार राउंड्स ले जाने में सक्षम होना चाहिए.

Indian Army Mortar Specialist Vehicles

मोबिलिटी और कठिन परिस्थितियों में क्षमता

मोबिलिटी इस वाहन की सबसे बड़ी ताकत होगी. यह हाईवे पर 80 किलोमीटर प्रति घंटा और सेकेंडरी सड़कों पर 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल सकेगा. वाहन को भारत की उत्तरी सीमाओं की ऊंची पहाड़ियों (17,000 फीट तक), रेगिस्तानी इलाकों और सभी मौसम स्थितियों में काम करने के लिए तैयार किया जाएगा. 

यह -25 डिग्री सेल्सियस से लेकर +50 डिग्री सेल्सियस तक के तापमान में बिना किसी समस्या के काम कर सकेगा. यह क्षमता खासकर लद्दाख, सियाचिन और राजस्थान जैसे इलाकों के लिए बेहद उपयोगी साबित होगी.

आधुनिक युद्ध में ड्रोन और काउंटर-फायर का खतरा बहुत बढ़ गया है. इसलिए MSV में बैलिस्टिक प्रोटेक्शन दिया जाएगा, जो छोटे हथियारों की गोली और आर्टिलरी के छर्रों से सुरक्षा देगा. एंटी-ड्रोन सिस्टम भी होगा. वाहन में आधुनिक डिजिटल डिस्प्ले और आर्मी के मौजूदा तथा भविष्य के कम्युनिकेशन नेटवर्क के साथ होगी.

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ये वाहन शूट एंड स्कूट की रणनीति को प्रभावी बनाएंगे. मोर्टार फायरिंग के तुरंत बाद वाहन तेजी से दूसरी जगह पर पहुंच जाएगा, जिससे दुश्मन के जवाबी हमले से बचना आसान हो जाएगा. इससे सैनिकों की जान बचाने में बहुत मदद मिलेगी.

पाकिस्तान और चीन सीमा पर तैनाती

ये मोर्टार स्पेशलिस्ट वाहन मुख्य रूप से पाकिस्तान और चीन की सीमाओं पर तैनात किए जाएंगे. दोनों मोर्चों पर जहां भारतीय सेना पहले से ही पूरी तरह तैयार है, वहां ये नए वाहन पैदल सेना की फायर सपोर्ट को और मजबूत करेंगे. खासकर उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों और रेगिस्तानी इलाकों में इनकी भूमिका निर्णायक साबित हो सकती है.

भारतीय सेना ने आधुनिक हथियारों की खरीद को तेज किया है. ऑपरेशन सिंदूर के बाद अप्रत्यक्ष फायर सपोर्ट को और सटीक और तेज बनाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है. MSV इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

ये वाहन भविष्य में और उच्च क्षमता वाले हथियार सिस्टम के साथ भी जोड़े जा सकेंगे. इससे सेना की फायरपावर में लगातार सुधार होता रहेगा. MSV भारतीय सेना को युद्ध के मैदान में एक नई बढ़त दिलाएगा.

भारतीय सेना द्वारा मोर्टार स्पेशलिस्ट वाहनों की खरीद की प्रक्रिया शुरू करना आधुनिक युद्ध की बदलती प्रकृति को समझने का प्रमाण है. ऑटोमेशन, उच्च गतिशीलता, बेहतर सुरक्षा और सटीक फायरिंग के जरिए ये वाहन पैदल सेना को दुश्मन पर भारी पड़ने में सक्षम बनाएंगे. 

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