भारत ने एयरो-इंजन बनाने के मामले में एक और बड़ा कदम उठाया है. हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL के कोरापुट डिवीजन ने अपना 2000वां एयरो-इंजन डिफेंस फोर्सेज को सौंप दिया है. 6 अक्टूबर 2026 को ओडिशा के कोरापुट में हुए कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे. इस मौके पर उन्होंने देश में एयरो-इंजन बनाने की क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई बड़े ऐलान किए.
HAL अब AL-31FP इंजन की सालाना प्रोडक्शन क्षमता 30 से बढ़ाकर 50 इंजन करेगा. इसके लिए 335 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे. इसके साथ ही शक्ति इंजन की दूसरी प्रोडक्शन लाइन भी बनाई जाएगी. इस पर 218 करोड़ रुपये खर्च होंगे. नई लाइन से हर साल 100 तक शक्ति इंजन बनाए जा सकेंगे. इसे 2028-29 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है.
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HAL का कोरापुट डिवीजन 1964 में शुरू हुआ था. करीब 60 साल से यह डिवीजन देश के सैन्य विमानों और हेलिकॉप्टरों के लिए इंजन बनाने और उनकी मरम्मत का काम कर रहा है. यहां बने इंजन MiG-21, MiG-27, MiG-29 और Su-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल किए गए हैं. HAL कोरापुट अब तक 9,000 से ज्यादा इंजनों का ओवरहॉल भी कर चुका है.
Su-30MKI के लिए बढ़ेंगे AL-31FP इंजन

2024 में सरकार ने Su-30MKI विमानों के लिए HAL को 240 AL-31FP इंजन बनाने का ऑर्डर दिया था. सप्लाई और कच्चे माल से जुड़ी परेशानियों के बावजूद HAL ने पहला इंजन तय समय से पहले तैयार कर दिया था. सरकार के मुताबिक दूसरे साल के अंत तक 60 इंजन बनाने का लक्ष्य था. लेकिन HAL ने 63 इंजन तैयार करके डिलीवर कर दिए. अब इसकी सालाना प्रोडक्शन क्षमता 30 से बढ़ाकर 50 इंजन की जाएगी. इसके लिए 335 करोड़ रुपये का निवेश होगा. इससे Su-30MKI विमानों के लिए जरूरी इंजन समय पर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी.
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शक्ति इंजन की दूसरी प्रोडक्शन लाइन

HAL में शक्ति इंजन बनाने के लिए दूसरी प्रोडक्शन लाइन लगाई जाएगी. इस पर 218 करोड़ रुपये खर्च होंगे. नई लाइन से हर साल 100 तक शक्ति इंजन बनाए जा सकेंगे. इसे 2028-29 तक पूरी तरह तैयार करने की योजना है. शक्ति इंजन भारत में बने हेलिकॉप्टरों में इस्तेमाल होता है. इनमें ध्रुव एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर यानी ALH और प्रचंड लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर यानी LCH शामिल हैं. ज्यादा इंजन देश में बनने से इन हेलिकॉप्टरों के लिए इंजन की जरूरत पूरी करने में मदद मिलेगी.
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AMCA के लिए हाई-थ्रस्ट इंजन की तैयारी
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत को सिर्फ विमान और हेलिकॉप्टर बनाने पर निर्भर नहीं रहना चाहिए. उनके इंजन भी देश में ही बनाने की क्षमता बढ़ानी होगी. खासकर एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट यानी AMCA के लिए स्वदेशी इंजन जरूरी है.

सरकार करीब 5,000 करोड़ रुपये के निवेश से स्वदेशी हाई-थ्रस्ट इंजन कार्यक्रम पर काम कर रही है. इसमें इंजन बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल और दूसरे हिस्से देश में ही तैयार करने पर जोर है. इसके लिए MIDHANI के साथ भी काम किया जा रहा है. देश में हाई-थ्रस्ट इंजन की टेस्टिंग के लिए सुविधा बनाने की भी योजना है.
राजनाथ सिंह ने कहा कि एयरो-इंजन विमान का बहुत जरूरी हिस्सा है. इसलिए सिर्फ इंजन बनाना ही काफी नहीं है. उसकी टेस्टिंग, मरम्मत और लंबे समय तक इस्तेमाल के लिए जरूरी सुविधाएं भी देश में होनी चाहिए. उन्होंने HAL कोरापुट को सिर्फ इंजन बनाने वाली जगह न रखकर एयरोस्पेस प्रोपल्शन के बड़े सेंटर के तौर पर विकसित करने की बात कही.
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इसके लिए MSME, स्टार्टअप, निजी कंपनियों, यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थानों को भी इस काम से जोड़ने पर जोर दिया गया है. HAL कोरापुट का 2000वां इंजन करीब छह दशक के काम का बड़ा पड़ाव है. अब सरकार और HAL का फोकस ज्यादा इंजन बनाने के साथ देश में ही एडवांस्ड और हाई-थ्रस्ट इंजन की क्षमता बढ़ाने पर है.