अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गोल्डन डोम मिसाइल डिफेंस सिस्टम अब पहले से कहीं ज्यादा महंगा साबित हो रहा है. कांग्रेस बजट ऑफिस (CBO) के नए एनालिसिस के अनुसार, इस पूरे प्रोजेक्ट की 20 साल की कुल लागत 1.2 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 100 लाख करोड़ रुपये) हो सकती है. ट्रंप ने पिछले साल इसे सिर्फ लगभग 16.76 लाख करोड़ रुपये में तैयार करने का दावा किया था.
ट्रंप ने अपने पहले सप्ताह में ही एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी कर इस प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी. उन्होंने कहा था कि यह सिस्टम उनके कार्यकाल (जनवरी 2029) के अंत तक पूरी तरह ऑपरेशनल हो जाएगा. ट्रंप का कहना है कि 40 सालों में दुश्मन देशों (चीन और रूस) के नए हथियार इतने खतरनाक हो गए हैं कि अमेरिका को स्पेस में हथियार लगाकर मजबूत मिसाइल डिफेंस सिस्टम बनाना जरूरी है.
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CBO रिपोर्ट क्या कहती है?
CBO ने माना है कि डिफेंस डिपार्टमेंट ने अभी तक स्पष्ट नहीं किया है कि कितने और किस प्रकार के सिस्टम लगाए जाएंगे. इसलिए सटीक अनुमान लगाना मुश्किल है. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह सिर्फ एक अनुमान है.

CBO के अनुसार, सिर्फ स्पेस-बेस्ड कंपोनेंट्स की लागत ही लगभग 45 लाख करोड़ रुपये तक हो सकती है. कांग्रेस ने पहले ही इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 2 लाख करोड़ रुपये मंजूर कर दिए हैं. यह राशि रिपब्लिकन पार्टी के बड़े टैक्स और खर्च वाले बिल के तहत पास हुई थी.
गोल्डन डोम क्या है?
यह सिस्टम इजरायल के आयरन डोम से इंस्पायर्ड है. इसमें ग्राउंड-बेस्ड और स्पेस-बेस्ड दोनों क्षमताएं होंगी, जो मिसाइल के हर स्टेज यानी लॉन्च, मिड-कोर्स और री-एंट्री में उसे कर सकेंगी. डेमोक्रेटिक सीनेटर जेफ मर्कले ने कहा कि यह प्रोजेक्ट डिफेंस कंपनियों को दी जाने वाली भारी रिश्वत है, जिसका बोझ आम नागरिकों पर पड़ेगा.
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स्पेस में हथियार लगाना, सैटेलाइट्स का नेटवर्क बनाना, एडवांस्ड सेंसर्स, इंटरसेप्टर मिसाइलें और पूरा कमांड सिस्टम - इन सबकी लागत बहुत ज्यादा है. टेक्नोलॉजी अभी विकसित नहीं हुई है. खर्च और बढ़ सकता है.
ट्रंप का गोल्डन डोम अमेरिका को दुश्मन देशों के मिसाइल हमलों से बचाने का बड़ा दावा है, लेकिन इसकी लागत शुरुआती अनुमान से कई गुना ज्यादा निकल रही है. 20 साल में 100 लाख करोड़ रुपये खर्च करने वाला यह प्रोजेक्ट अमेरिकी इतिहास का सबसे महंगा मिसाइल डिफेंस कार्यक्रम बन सकता है.