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पानी में तैरेगा, पहाड़ पर चढ़ेगा, DRDO ने सेना के लिए बनाया नया विक्रम एडवांस्ड आर्मर्ड व्हीकल

DRDO ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में विक्रम VT21 एडवांस्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (ट्रैक्ड और व्हील्ड) लॉन्च किया. VRDE ने टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत फोर्ज के साथ मिलकर मात्र 3 साल में तैयार किया है. 30 mm क्रूलेस टरेट, ATGM लॉन्च, STANAG लेवल 4-5 सुरक्षा, हाई पावर इंजन, हाइड्रो जेट से पानी पार करने की क्षमता है. भारतीय सेना के ICV-APC रोल के लिए गेम चेंजर साबित होगा.

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ये है डीआरडीओ द्वारा बनाया गया आर्मर्ड व्हीकल विक्रम. (Photo:X/DRDO)
ये है डीआरडीओ द्वारा बनाया गया आर्मर्ड व्हीकल विक्रम. (Photo:X/DRDO)

DRDO ने महाराष्ट्र के अहिल्यानगर में अपना नया विक्रम VT21 एडवांस्ड आर्मर्ड प्लेटफॉर्म (AAP) रोल आउट कर दिया है. यह ट्रैक्ड यानी चेन वाली और व्हील्ड यानी पहियों वाली दोनों तरह की गाड़ियां हैं. वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (VRDE) ने इन्हें बनाया है. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड के साथ मिलकर काम हुआ. सिर्फ 3 साल में पूरा प्रोजेक्ट तैयार हो गया. जो रिकॉर्ड समय है. DRDO चेयरमैन डॉ. समीर वी. कामत मुख्य अतिथि थे. यह प्लेटफॉर्म भारतीय सेना की नई जरूरतों को पूरा करने के लिए बनाया गया है.

विक्रम VT21 AAP क्या है और क्यों बनाया गया?

विक्रम VT21 AAP को भारतीय सेना के इन्फैंट्री कॉम्बैट व्हीकल (ICV) और आर्मर्ड पर्सनल कैरियर (APC) दोनों कामों के लिए डिजाइन किया गया है. मतलब यह पैदल सैनिकों को युद्ध के मैदान में ले जा सकता है. उन्हें सुरक्षा दे सकता है. साथ ही दुश्मन से लड़ सकता है. 

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दोनों वर्जन में देश में ही बनी 30 मिलीमीटर की क्रूलेस टरेट लगाई गई है. क्रूलेस का मतलब है कि टरेट को अंदर से कोई सैनिक नहीं चलाता, बल्कि बाहर से रिमोट कंट्रोल से चलाया जाता है. इससे सैनिकों को सुरक्षित रखा जा सकता है. इस प्लेटफॉर्म को अब कई तरह के रोल में इस्तेमाल किया जा सकता है.

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इसकी खास तकनीकी विशेषताएं क्या हैं?

इस गाड़ी में बहुत ताकतवर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन लगाया गया है. इससे पावर टू वेट रेशियो बहुत अच्छा है यानी कम वजन में ज्यादा ताकत. नतीजा यह कि यह तेज रफ्तार से चल सकती है. पहाड़ी चढ़ सकती है. खाइयों को पार कर सकती है. रुकावटों को आसानी से पार कर सकती है. 

सुरक्षा के लिए STANAG लेवल 4 और 5 की मोड्यूलर सुरक्षा दी गई है. इसका मतलब है कि चारों तरफ गोली, ब्लास्ट और माइन्स से बचाव है. गाड़ी पानी में भी चल सकती है क्योंकि इसमें हाइड्रो जेट लगाए गए हैं. इससे नदियां और पानी की रुकावटें आसानी से पार हो जाती हैं. 30 मिलीमीटर की टरेट में 7.62 मिलीमीटर PKT गन के साथ एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM) भी दागी जा सकती है. यानी दुश्मन के टैंक को भी नष्ट कर सकती है.

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इस प्लेटफॉर्म में अभी 65 प्रतिशत पार्ट्स देश में बने हैं. जल्द ही इसे 90 प्रतिशत तक पहुंचाने का प्लान है. टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और भारत फोर्ज ने MSME यानी छोटे उद्योगों के साथ मिलकर इसे बनाया है. इससे देश का डिफेंस इकोसिस्टम मजबूत हो रहा है. VRDE, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट, डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी समेत कई DRDO लैब्स ने साथ मिलकर काम किया. 

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भारतीय सेना के लिए कितना महत्वपूर्ण है यह प्लेटफॉर्म?

यह नई गाड़ी भारतीय सेना की बदलती जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई है. अब सेना को तेज, सुरक्षित और ज्यादा ताकतवर वाहनों की जरूरत है. विक्रम VT21 दोनों ट्रैक्ड और व्हील्ड वर्जन में आने से अलग-अलग इलाकों में इस्तेमाल हो सकेगा. पहाड़ों में ट्रैक्ड अच्छा है तो मैदान में व्हील्ड. 

पानी पार करने की क्षमता से ऑपरेशनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ गई है. ATGM लॉन्च करने की क्षमता से यह दुश्मन के भारी हथियारों का मुकाबला आसानी से कर सकेगी. तीन साल में पूरा होना दिखाता है कि DRDO अब बहुत तेजी से काम कर रहा है. DRDO अब इन प्लेटफॉर्म्स को और बेहतर बनाने और सेना को सौंपने की तैयारी में है. 

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