ताइवान की सुरक्षा एजेंसियों ने अगस्त के मध्य में एक महत्वपूर्ण घटना दर्ज की है. पूर्वी तट के पास, हुलिएन काउंटी से 30 समुद्री मील से अधिक दूर, एक चीनी मछली पकड़ने वाली नाव मिन्फुडिंगयू 07902 को चीन के कोस्ट गार्ड कटर 2502 और रिसर्च जहाज जियांग यांग होंग 03 के साथ देखा गया.
यह पहली बार है जब ताइवान के प्रशांत तट पर ऐसी मिलिशिया नाव की पुष्टि हुई है. ताइवानी अधिकारियों के अनुसार ये जहाज समन्वित उत्पीड़न अभ्यास में शामिल थे. यह क्षेत्र आपूर्ति मार्गों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. जून से चीन ने पूर्वी तट पर गश्त बढ़ा दी है. यह घटना उसी क्रम में देखी जा रही है.
ताइवान की निजी निगरानी कंपनी एपेक्स एविएशन के विमान ने रडार और अन्य उपकरणों से इन तीनों जहाजों का समूह पकड़ा. दो वरिष्ठ ताइवानी अधिकारियों ने पुष्टि की कि मिन्फुडिंगयू 07902 पीपुल्स लिबरेशन आर्मी की समुद्री मिलिशिया का हिस्सा है. मिलिशिया नावें दिखने में नागरिक मछली पकड़ने वाले जहाज जैसी होती हैं, लेकिन वे सैन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जाती हैं.
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विश्लेषकों का कहना है कि बीजिंग इस बेड़े से समुद्री दावे मजबूत करता है. दबाव बनाता है. एक अधिकारी ने साफ कहा कि मिलिशिया नावों का मकसद वास्तविक उत्पीड़न करना है. ये जहाज आम तौर पर इस क्षेत्र में नहीं देखे जाते थे, इसलिए निगरानी बढ़ा दी गई.
EXCLUSIVE: China militia boat spotted for first time off Taiwan's east coast, patrol finds https://t.co/QNqwBoDbwf https://t.co/QNqwBoDbwf
— Reuters (@Reuters) October 8, 2026
रणनीतिक महत्व और बढ़ता तनाव
ताइवान का पूर्वी तट प्रशांत महासागर की ओर खुलता है. युद्ध की स्थिति में सहयोगी देशों से आपूर्ति यहीं से आने की उम्मीद होती है. चीन इस क्षेत्र में नियमित गश्त बढ़ाकर नाकाबंदी जैसे अभ्यास का अभ्यास कर रहा है. कोस्ट गार्ड, रिसर्च जहाज और मिलिशिया को एक साथ इस्तेमाल करके बीजिंग कानून प्रवर्तन और वैज्ञानिक शोध का आवरण डालता है. इससे बिना खुले संघर्ष के दबाव बनाया जा सकता है.
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यह ग्रे जोन रणनीति का हिस्सा है, जिसमें सैन्य और नागरिक तत्वों का मिश्रण होता है. दक्षिण चीन सागर में मिलिशिया पहले से सक्रिय रही है, लेकिन पूर्वी तट पर इसका विस्तार नया संकेत है. यह घटना ताइवान के लिए चेतावनी है. चीन लगातार अपनी उपस्थिति बढ़ा रहा है और नागरिक रूप वाली ताकतों का इस्तेमाल कर अंतरराष्ट्रीय आलोचना से बचने की कोशिश कर रहा है.
ताइवान ने पूरे समाज की लचीलापन पहल के तहत निजी कंपनियों को भी निगरानी में शामिल किया है. एपेक्स एविएशन जैसी कंपनियां इसी दिशा में काम कर रही हैं. लंबे समय में यह तनाव बढ़ा सकता है और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है. ताइवान को अपनी निगरानी क्षमता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मजबूत करने की जरूरत है, जबकि चीन अपनी दावेदारी जारी रखेगा. यह घटना दिखाती है कि ताइवान की खाड़ी के आसपास का संघर्ष अब सिर्फ सैन्य जहाजों तक सीमित नहीं रहा.