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SC ने निर्भया के दोषी विनय की याचिका खारिज की, कहा- मानसिक हालत ठीक

दोषी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दया याचिका खारिज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उसने मानसिक हालत ठीक नहीं होने की दलील दी थी.

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सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

  • शीर्ष कोर्ट ने कहा- राष्ट्रपति ने दोषियों के सभी दस्तावेज देखे
  • पटियाला हाउस कोर्ट में डेथ वारंट पर 17 को होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने निर्भया के दोषी विनय की याचिका को खारिज कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक निर्भया के दोषी विनय की मानसिक हालत बिल्कुल ठीक है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा कि ताजा मेडिकल रिपोर्ट कहती है कि दोषी विनय की न सिर्फ शारीरिक हालत ठीक है, बल्कि मानसिक हालत भी ठीक है.

दोषी विनय शर्मा ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा दया याचिका खारिज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की थी. उसने मानसिक हालत ठीक नहीं होने की दलील दी थी. उसने यह भी आरोप लगाया था कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के सामने सभी दस्तावेज नहीं रखे गए थे. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने दोषी विनय की इन दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. शीर्ष कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति के सामने सभी दस्तावेज रखे गए थे.

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जस्टिस आर भानुमति, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस ए. एस. बोपन्ना की बेंच ने दोषी विनय की दलील को खारिज करते हुए कहा कि हमने सारी फाइलें देखकर विचार किया है. लिहाजा दोषी विनय की इस दलील को खारिज किया जाता है कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उसके सारे दस्तावेज नहीं देखे. साथ ही यह दलील भी खारिज की जा रही है कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने फाइल पर साइन नहीं किए थे.

इससे पहले दोषियों के वकील ए. पी. सिंह ने दलील दी थी कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव के दौरान डिजिटल साइन कैसे हो सकते हैं?

वहीं, गुरुवार को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया के दोषियों को फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी करने की मांग वाली याचिका पर 17 फरवरी तक के लिए सुनवाई स्थगित कर दी थी. कोर्ट ने कहा था कि निर्भया के दोषी आखिरी सांस तक कानूनी उपायों का इस्तेमाल करने के हकदार हैं और उनके मौलिक अधिकारों की अनदेखी नहीं की सकती.

इसके साथ ही अदालत ने गुरुवार को निर्भया कांड के दोषी पवन गुप्ता की तरफ से पैरवी करने के लिए वकील रवि काजी को नियुक्त किया था. अब चारों दोषियों में से सिर्फ पवन गुप्ता के पास ही क्यूरेटिव पिटीशन और दया याचिका दाखिल करने का विकल्प है. एडिशनल सेशन जज धर्मेद्र राणा ने कहा था, 'निर्भया के दोषी पवन के वकील को थोड़ा समय मिलना चाहिए, ताकि वो मुवक्किल का प्रभावी प्रतिनिधित्व कर सकें.

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