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पेरेंट्स, पुलिस और चश्मदीद… गाजियाबाद में एक साथ तीन बहनों की खुदकुशी का पूरा सच!

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की एक साथ मौत ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. कोरियन ऑनलाइन गेम की लत को इस सामूहिक आत्महत्या का जिम्मेदार माना गया. लेकिन सुसाइड नोट में लिखी गईं बातों ने कहानी का रुख मोड़ दिया है. पढ़ें इस खौफनाक कांड की पूरी कहानी.

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पुलिस इस मामले की जांच हर एंगल से कर रही है (फोटो-ITG)
पुलिस इस मामले की जांच हर एंगल से कर रही है (फोटो-ITG)

Ghaziabad Three Sisters Suicide: गाजियाबाद की भारत सिटी सोसायटी में बुधवार देर रात एक ऊंची इमारत से तीन नाबालिग बहनों ने एक साथ मौत की छलांग लगा दी. रात करीब 2:30 बजे जब पूरा इलाका गहरी नींद में था, तभी अचानक तेज आवाजों ने सन्नाटे को चीखों में बदल दिया. किसी को अंदाजा भी नहीं था कि तीन मासूम लड़कियां की जिंदगी एक झटके में खत्म हो जाएंगी. यह घटना गाजियाबाद के थाना टीला मोड़ क्षेत्र की है, जिसने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया. अब सवाल है कि आखिर लड़कियों ने ऐसा क्यों किया?

कौन थीं वो तीन बहनें?
मृतक बहनों की पहचान निशिका (16 साल), प्राची (14 साल) और पाखी (12 साल) के रूप में हुई है. तीनों सगी बहनें थीं और अपने पिता चेतन कुमार के साथ भारत सिटी के B-1 टावर, फ्लैट नंबर 907 में रहती थीं. तीनों नाबालिग थीं और पढ़ाई के साथ-साथ मोबाइल और ऑनलाइन गेमिंग की दुनिया में काफी समय से डूबी हुई थीं. परिवार में इनके अलावा अन्य भाई-बहन भी हैं, लेकिन इन तीनों का आपसी लगाव सबसे ज्यादा बताया जाता है.

कैसे हुआ हादसा?
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें देर रात एक साथ नौवीं मंजिल की बालकनी तक पहुंचीं. वहां उन्होंने रेलिंग पार करने के लिए दो-स्टेप वाली सीढ़ी का इस्तेमाल किया. इसके बाद एक-एक कर तीनों ने नीचे छलांग लगा दी. बताया जा रहा है कि इस दौरान घर के अन्य सदस्य गहरी नींद में थे और किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगी. कुछ ही सेकेंड में तीनों बच्चियां नीचे ग्राउंड फ्लोर पर जा गिरीं और उनकी मौत हो गई.

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चीखों से गूंज उठा इलाका
जब बच्चियों के गिरने की तेज आवाज आई, तो आसपास के लोग अपने घरों से बाहर निकल आए. सामने का मंजर डराने वाला था. जमीन पर तीनों बहनें खून से लथपथ हालत में पड़ी थीं. हर तरफ खून बिखरा था. इससे पहले कि लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले ही लड़कियों के परिजनों को भी सूचना मिल गई. पूरे सोसायटी परिसर में अफरा-तफरी का माहौल था. परिवार में चीख-पुकार मच गई थी. वहां मौजूद लोगों ने तुरंत पुलिस और एंबुलेंस को सूचना दी.

पुलिस की एंट्री 
सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और तीनों बच्चियों को एंबुलेंस से लोनी के 50 शैय्या अस्पताल ले जाया गया. वहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया. इसके बाद पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी गई.

ACP ने क्या बताया?
इलाके के एसीपी अतुल कुमार सिंह के अनुसार, रात करीब 2:15 बजे पीआरवी के जरिए सूचना मिली थी. सूचना में बताया गया कि भारत सिटी के टावर B-1 के फ्लैट 907 की नौवीं मंजिल से तीन बच्चियां कूद गई हैं. मौके पर पहुंचने पर पुष्टि हुई कि तीनों की मौत गिरने से हुई है. पुलिस ने इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या का मामला माना है और सभी पहलुओं से जांच की जा रही है.

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सुसाइड नोट ने बढ़ाई बेचैनी
पुलिस को मौका-ए-वारदात से एक पन्ने का सुसाइड नोट भी मिला है. उस नोट पर एक डायरी का जिक्र है और उसमें लिखा था- 'Mummy Papa Sorry'. इस छोटे से वाक्य ने पूरे मामले को और भी दर्दनाक बना दिया. पुलिस के मुताबिक, बच्चियों के कमरे से मिली डायरी में कुछ इशारे और भावनात्मक बातें लिखी गई हैं. नोट और डायरी को जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है.

पिता ने किसे ठहराया जिम्मेदार?
मृतक बच्चियों के पिता चेतन कुमार ने इस दर्दनाक घटना के पीछे एक ऑनलाइन कोरियन टास्क-बेस्ड ‘लवर गेम’ को जिम्मेदार ठहराया है. पिता का कहना है कि तीनों बेटियां काफी समय से इस गेम को खेल रही थीं. बताया जा रहा है कि गेम का आखिरी टास्क बेहद खतरनाक था और उसी टास्क को पूरा करने के लिए बच्चियों ने मौत का रास्ता चुना.

गेम में कौन था लीडर?
पुलिस जांच में सामने आया है कि तीनों बहनों में 14 वर्षीय प्राची इस गेम की लीडर थी. वही तीनों को कमांड देती थी और गेम से जुड़े टास्क समझाती थी. तीनों बहनें हर काम एक साथ करती थीं- खाना, सोना, स्कूल जाना और गेम खेलना. यही वजह है कि उन्होंने यह खौफनाक कदम भी एक साथ उठाया.

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मोबाइल और डिजिटल एंगल
डीसीपी निमिष पाटिल और एसीपी अतुल कुमार सिंह ने बताया कि तीनों बच्चियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए गए हैं. पुलिस अब उनकी डिजिटल गतिविधियों, चैट, गेमिंग ऐप्स और संपर्कों की बारीकी से जांच कर रही है. पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या कोई ऑनलाइन कंट्रोलर या लिंक था, जो बच्चियों को मानसिक रूप से प्रभावित कर रहा था.

कोरोना काल से शुरू हुई गेम की लत
परिजनों के अनुसार, कोरोना काल के दौरान बच्चियों को मोबाइल गेमिंग की लत लगी थी. स्कूल बंद होने और ऑनलाइन पढ़ाई के चलते मोबाइल उनका सबसे बड़ा सहारा बन गया. धीरे-धीरे गेमिंग का समय बढ़ता गया और पढ़ाई व सामाजिक गतिविधियां पीछे छूटती चली गईं. पुलिस का कहना है कि पिछले कुछ समय से बच्चियों का स्कूल जाना भी अनियमित था.

मोबाइल यूज़ करने से रोका, बढ़ा तनाव
पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि हाल के दिनों में परिवार ने बच्चियों के मोबाइल इस्तेमाल पर रोक लगाने की कोशिश की थी. इसी बात को लेकर घर में तनाव का माहौल था. माना जा रहा है कि मोबाइल और गेम से दूरी बनाए जाने पर बच्चियां मानसिक रूप से परेशान थीं और इसी तनाव ने उन्हें यह कदम उठाने पर मजबूर किया.

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चश्मदीदों की जुबानी
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि इतनी मासूम बच्चियां ऐसा कदम उठा सकती हैं. चश्मदीदों के मुताबिक, जब वे मौके पर पहुंचे तो पूरा नजारा दिल दहला देने वाला था. तीनों बच्चियां जमीन पर बेसुध पड़ी थीं और कोई भी कुछ करने की हालत में नहीं था. इस घटना ने पूरे सोसायटी को सदमे में डाल दिया है.

शादी की चाहत!
पुलिस की छानबीन के दौरान खुलासा हुआ है कि लड़कियां किसी कोरियन लड़के से शादी करना चाहती थी. तीनों लड़कियों को कोरियन कल्चर बेहद पसंद था. यही बात उनके परिवार को भी परेशान कर रही थी. यही वो वजह थी, जिसकी वजह से परिवारवालों ने उनके मोबाइल फोन ले लिए थे. 

अब क्या करेगी पुलिस?
फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच में जुटी है. मोबाइल डेटा, गेमिंग ऐप्स, डायरी, परिजनों के बयान और डिजिटल लिंक सब कुछ खंगाला जा रहा है. पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि यह आत्महत्या किन परिस्थितियों और मानसिक दबावों का नतीजा थी. यह मामला न सिर्फ कानून, बल्कि समाज और पेरेंटिंग सिस्टम के लिए भी एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है.

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