मुंबई में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक बड़े मामले में करोड़ों रुपये की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं. यह कार्रवाई होटल रंगशारदा और उससे जुड़े कथित वित्तीय घोटाले को लेकर की गई है. ईडी का आरोप है कि मराठी रंगमंच और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए रियायती दर पर दी गई जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल किया गया और उससे करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई. जांच में अब तक करीब 512 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय (Proceeds of Crime) का पता चला है. मामले की जांच अभी भी जारी है.
ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत अस्थायी कुर्की (Provisional Attachment Order) जारी करते हुए करीब 332.24 करोड़ रुपये मूल्य की दो अचल संपत्तियों को अटैच किया है. इनमें मुंबई के बांद्रा स्थित मशहूर होटल रंगशारदा और प्रभादेवी स्थित एक जमीन का टुकड़ा शामिल है. जांच एजेंसी के मुताबिक ये दोनों संपत्तियां एम/एस रंग शारदा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के कब्जे और नियंत्रण में हैं. ईडी का कहना है कि इन संपत्तियों का संबंध मनी लॉन्ड्रिंग क्राइम से है.
ईडी ने इस मामले में जांच मुंबई के बांद्रा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की. यह एफआईआर रंग शारदा प्रतिष्ठान ट्रस्ट के ट्रस्टियों की शिकायत पर दर्ज की गई थी. शिकायत में प्रभुदास वीरचंद लोटिया और एम/एस रंग शारदा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड पर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात के गंभीर आरोप लगाए गए थे. आरोप है कि महाराष्ट्र हाउसिंग एंड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (MHADA) ने जिस जमीन को विशेष उद्देश्य के लिए रियायती दर पर आवंटित किया था, उसका इस्तेमाल नियमों के विपरीत किया गया.
ईडी की जांच में सामने आया कि एमएचएडीए ने यह जमीन रंग शारदा प्रतिष्ठान ट्रस्ट को केवल मराठी थिएटर, साहित्य और सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रचार-प्रसार के लिए आवंटित की थी. लेकिन जांच एजेंसी का आरोप है कि प्रभुदास वीरचंद लोटिया ने एम/एस रंग शारदा होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से इस जमीन पर गलत तरीके से नियंत्रण स्थापित कर लिया. इसके बाद आवंटन की शर्तों और नियामकीय मंजूरियों का उल्लंघन करते हुए इस जमीन का पूरी तरह व्यावसायिक दोहन किया गया. ईडी का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया अवैध तरीके से की गई.
जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने ट्रस्ट को वह ड्रामा थिएटर और कलाकारों के लिए आवास नहीं सौंपे, जिनका निर्माण और हस्तांतरण करना आवंटन की शर्तों के तहत जरूरी था. इसके बजाय उसी परिसर में होटल, लॉजिंग हाउस, रेस्तरां, शराब बार, बैंक्वेट हॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित किए गए. ईडी का आरोप है कि इसके लिए जरूरी वैधानिक मंजूरियां भी नहीं ली गईं. एजेंसी के मुताबिक यह पूरा व्यावसायिक संचालन ट्रस्ट के उद्देश्य और सरकारी शर्तों के खिलाफ था.
ईडी की जांच के अनुसार, प्रभुदास वीरचंद लोटिया ने रंग शारदा प्रतिष्ठान ट्रस्ट को आवंटित जमीन पर बने व्यावसायिक परिसरों की कथित तौर पर अनधिकृत बिक्री भी कराई. जांच एजेंसी का दावा है कि इन बिक्री से प्राप्त रकम का इस्तेमाल मुंबई के प्रभादेवी इलाके में दूसरी संपत्ति खरीदने के लिए किया गया. इसी वजह से प्रभादेवी स्थित जमीन को भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में अटैच किया गया है. एजेंसी अब इन लेनदेन की पूरी वित्तीय श्रृंखला की जांच कर रही है.
ईडी के मुताबिक अब तक की जांच में इस पूरे मामले में लगभग 512 करोड़ रुपये की अपराध से अर्जित आय की पहचान की गई है. इसमें होटल संचालन, लॉजिंग हाउस, रेस्तरां, शराब बार, बैंक्वेट सुविधाओं से हुई कमाई, किराया और अन्य व्यावसायिक आय शामिल है. एजेंसी का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में इस केस में और भी अहम खुलासे हो सकते है.