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डी कंपनी का 'ऑपरेशन राजन'

करीब तीन महीने पहले अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को खबर मिलती है कि उसका सबसे बड़ा दुश्मन यानी छोटा राजन ऑस्ट्रेलिया में है. डी-कंपनी को ये खबर कहीं और से नहीं बल्कि खुद छोटा राजन के एक गुर्गे से मिलती है.

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Symbolic Image
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करीब तीन महीने पहले अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम को खबर मिलती है कि उसका सबसे बड़ा दुश्मन यानी छोटा राजन ऑस्ट्रेलिया में है. डी-कंपनी को ये खबर कहीं और से नहीं बल्कि खुद छोटा राजन के एक गुर्गे से मिलती है. इसी के बाद दाऊद का खास सिपहसालार छोटा शकील अपने शूटरों के साथ ऑस्ट्रेलिया पहुंच जाता है. अब छोटा-राजन की जिंदगी और मौत के बीच बस कुछ ही घंटे बाकी थे कि तभी राजन को खुद पर होने वाले हमले की भनक लग जाती है.

इंटेलिजेंस ब्यूरो की रिपोर्ट के मुताबिक छोटा शकील 1993 के मुंबई धमाकों के बाद से ही दाऊद इब्राहिम के साथ कराची में रह रहा है. यही डी कंपनी का सबसे खास सिपहसालार हैं. और इसी ने ले रखी है दाऊद इब्राहीम की जिंदगी की सबसे बड़ी सुपारी. सुपारी दाऊद के सबसे बड़े दुश्मन छोटा राजन को ठिकाने लगाने की.

अंडरवर्ल्ड के दो जिगरी दोस्त जो अब जानी दुश्मन हैं की दुश्मनी की सबसे नई कहानी सामने आई है. कहानी छोटा राजन को ऑस्ट्रेलिया में उसके खुफिया ठिकाने पर ठिकाने लगाने की. मगर ऐसा होता उससे बस चंद घंटे पहले डी कंपनी की सारी पोल खुल गई और छोटा राजन को बच निकलने का एक और मौका मिल गया.

15 साल पहले यानी सन 2000 के बाद डी कंपनी दूसरी बार छोटा राजन के बिल्कुल करीब पहुंच गई थी. बस कुछ घंटे की बात थी. ऑस्ट्रेलिया में डी कंपनी के शूटर भी पहुंच चुके थे. खुद छोटा शकील पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहा था. लेकिन ऐन मौके पर राजन को डी कंपनी के इस हमले की जानकारी मिल गई. और वो निकल भागने में कामयाब रहा.

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इसी साल अप्रैल महीने के दूसरे हफ्ते की बात है. भारतीय खुफिया एजेंसियां लगातार दाऊद इब्राहि‍म और उसके खास गुर्गों के फोन इंटरसेप्ट कर रही थी. तभी अचानक एक रोज खुफिया एजेंसी ने फोन पर छोटा शकील की आवाज सुनी. वो किसी अनजान शख्स से बात कर रहा था. दोनों में जो बातचीत हो रही थी ये थी.

शकील: शकील बोल रहा हूँ...
अनजान शख्स: सलाम वालैकुम भाई!
शकील: वालैकुम सलाम. और सब खैरियत?
अनजान शख्स: जी भाई!
शकील: अरे ये नाना किधर छुपा हुआ है आजकल?
अनजान शख्स: भाई, मेरे को मालूम नहीं भाई.
शकील: वो हम को गलत बता के खुद को बड़ा देश भक्त बताता है. लास्ट टाइम भी वो थोड़े से के लिए बच गया लेकिन इस बार वो पक्का नहीं बचेगा. तू सिर्फ इतना बता दे कि वो कहां छुपा हुआ है? तू सिर्फ एक बार मदद कर. तुझे क्या चाहिए तू बोल!
अनजान शख्स: नहीं भाई मुझे कुछ नहीं चाहिए और मुझे नहीं मालूम कि नाना किधर है!
शकील: देख, तेरा फायदा इस साइड आने में ही है, वो (नाना) तो ऐसे ही यहां से वहां भागते रहेगा. तू हमको मदद करेगा तो तेरा ख्याल मैं रखूंगा.

इस बातचीत को सुनने के बाद साफ हो गया था कि डी कंपनी छोटा राजन के कैंप में सेंध लगा चुकी है. राजन का कोई गुर्गा राजन से ही गद्दारी करने को तौयार हो चुका है. पर इस बातचीत में भारतीय इंटेलिजेंस एजेंसी राजन के ठिकाने का पता नहीं जान सकीं. मगर छोटा शकील इसमे कामयाब हो गया. उसे छोटा राजन के ठिकाने का पता चल चुका था.

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छोटा राजन ऑस्ट्रेलिया के न्यू कैसल शहर में रह रहा था. चूंकि खबर पक्की थी लिहाजा इस बार डी कंपनी कोई भी गलती करना नहीं चाहती थी. बैंकाक की नाकामी उनके जेहन में अब भी ताजा थी. इसीलिए इस बार छोटा राजन को ठिकाने लगाने की जिम्मेदारी खुद छोटा शकील ने उठाई. खुफिया एजेंसी के मुताबिक फोन इंटरसेप्ट से पता चला कि शकील अप्रैल के तीसरे हफ्ते से लेकर अगले एक महीने तक अपने ओरिजनल पासपोर्ट पर पहले अमेरिका और फिर ऑस्ट्रेलिया गया. अमेरिका में वो अपने एक बेहद करीबी रिश्तेदार के घर पर रुका था.

अमेरिका से ऑस्ट्रेलिया आने के बाद वो सड़क के रास्ते बस से न्यू कैसल शहर पहुंचा. छोटा राजन के इसी शहर में होने की खबर थी. शकील न्यू कैसल में एक होटल में रुक कर वहीं से राजन की रैकी करने के अलावा हमले की साजिश बुन रहा था. इसके लिए बाकायदा उसके कुछ शूटर भी ऑस्ट्रेलिया पहुंच चुके थे. मगर हमले से कुछ घंटे पहले ही किसी तरह ये खबर छोटा राजन तक पहुंच गई. उसने फौरन न्यू कैसल में अपना ठिकाना बदल लिया और अंडरग्राउंड हो गया. एजेंसियों की मानें तो अंडरग्राउंड होने के बाद राजन ऑस्ट्रेलिया छोड़ चुका है.

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