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सामने आया ISIS के कसाई 'जेहादी जॉन' का चेहरा

एक के बाद एक बेगुनाहों का सिर कलम कर दुनिया को दहलानेवाला ISIS आतंकवादी 'जेहादी जॉन' का काले नकाब के पीछे छुपे चेहरे से पर्दा हटा है. पहली बार 'जेहादी जॉन' की असली पहचान सामने आई है.

jihadi john jihadi john

एक के बाद एक बेगुनाहों का सिर कलम कर दुनिया को दहलानेवाला ISIS का आतंकवादी 'जेहादी जॉन' अब भी पूरी दुनिया के लिए एक छलावा है. उसकी तलाश में जमीन-आसमान एक कर देने के बावजूद अमेरिका समेत तमाम यूरोपीय देशों की फौजें अब भी उसकी परछाई तक नहीं पहुंच सकी हैं. लेकिन पहली बार उस काले नकाब के पीछे छुपे चेहरे से पर्दा हटा है. पहली बार 'जेहादी जॉन' की असली पहचान सामने आई है.

अब तक 'जेहादी जॉन' के इस एक अदद नाम के अलावा दुनिया उसके बारे में बहुत कम ही जानती है. क्योंकि वो जब भी कैमरे के सामने आता है, काले नकाब में नजर आता. लेकिन बेगुनाह बंधकों का सिर कलम करनेवाले ISIS के इस जल्लाद के चेहरे से अब नकाब हट चुका है. पहली बार 'जेहादी जॉन' का असली चेहरा दुनिया के सामने है.

ब्रिटेन में गुजरा है इस आतंकी का बचपन


इन दोनों तस्वीरों में एक समानता है. अपने दोस्तों के साथ जमीन पर बैठा ये लड़का कोई और नहीं, बल्कि 'जेहादी जॉन' है. ये खुलासा ब्रिटिश खुफिया एजेंसियों ने किया है, जो 'जेहादी जॉन' की पहली करतूत यानी अमेरिकी पत्रकार स्टीवन सॉटलॉफ का सिर कलम किए जाने के बाद से ही उसकी तलाश कर रही थी.खुफिया एजेंसियों की मानें तो ये 'जेहादी जॉन' दरअसल कोई और नहीं बल्कि मोहम्मद एमवाजी है. एमवाजी वेस्ट लंदन के सेंट मेरी मैगदालने चर्च स्कूल का स्टूडेंट रह चुका है. वह जब छह साल का था तब उसका परिवार कुवैत से ब्रिटेन में जा बसा था. उसके पिता एक मिनीकैब ड्राइवर थे और ब्रिटेन में भी यही काम करते थे. एमवाजी ने वहां स्कूल में दाखिला लिया और दूसरे बच्चों की तरह अपनी पढ़ाई शुरू की. उन दिनों वो अपने क्लास में इकलौता मुस्लिम स्टूडेंट था. लेकिन उसके साथ पढ़ चुके दूसरे लोगों की मानें तो वो दूसरे छात्रों से किसी भी मायने में अलग नहीं था. एमवाजी पढ़ने में तो बहुत तेज़ नहीं था, लेकिन उन दिनों उसे फुटबॉल का बड़ा शौक था और बड़ा होकर वो एक स्ट्राइकर बन चाहता था.

...और एक आम इंसान बन गया मोस्ट वॉटेड आतंकी

1999 में जैसे ही वो हाई स्कूल में पहुंचा, धर्म को लेकर उसका नजरिया बदलने लगा. उसके बाद उसने यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिनिस्टर से कंप्यूटर प्रोग्रामिंग की पढ़ाई शुरू की. इसी दौरान वो कुछ मौलानाओं में संपर्क में आया और लगातार कट्टर होता गया. बताया जाता है कि 2009 में वो अपने दोस्तों के साथ वाइल्ड लाइफ सफारी के लिए तंजानिया के लिए निकला था, लेकिन उसे जबरन नीदरलैंड भेज दिया गया. तभी ब्रिटिश एजेंसियों ने सोमालियाई आतंकवादी गुट अल-शबाब से उसकी नजदीकियों के चलते उससे कड़ी पूछताछ की. इसके बाद जब वो ब्रिटेन लौटा तो, उस पर पुलिस की सख्ती बढ़ चुकी थी. घर में अक्सर पुलिसवाले पूछताछ के लिए आने लगे थे. और तो और इन्हीं वजहों से उसकी शादी भी टूट गई.

 

इसके बाद उसने फिर से कुवैत लौटने की कोशिश की, लेकिन उसे एयरपोर्ट पर ही रोक लिया गया. और कथित तौर पर उसके साथ बदसलूकी की गई. बाद में उसने अपना नाम बदल कर मोहम्मद अल अयान रख लिया और फिर से कुवैत जाने की कोशिश की, मगर फिर से पकड़ लिया गया. हालांकि इसके कुछ दिनों बाद वो ब्रिटेन से रहस्यमयी तरीके से गायब हो गया. बाद में कुछ ब्रिटिश ट्रेनीज के साथ उसकी मुलाकात सीरिया में हुई. तब तक वो पूरी तरह बदल चुका था. उसे अबु मुहारिब अल यमेनी का नया जेहादी नाम मिल चुका था. और वो ब्रिटेन समेत तमाम पश्चिमी मुल्कों का दुश्मन बन गया था. यहां तक कि वो खुद को ब्रिटिश कहलाने से भी बचता रहा और पूछने पर बस इतना मानता था कि उसने कुछ दिन ब्रिटेन में गुजारे हैं.

आवाज ने खोला राज
जब ISIS ने पहली बार किसी विदेशी बंधक का सिर कलम करने की तस्वीर जारी की थी, तो उसमें 'जेहादी जॉन' अमेरिकी सरकार को बुरी तरह धमकाता हुआ नजर आया था. लेकिन ISIS की कब्जे वाली जमीन से बिल्कुल ब्रिटिश लहजे में बोली गई उसकी अंग्रेजी ने सबके कान खड़े कर दिए थे क्योंकि सीरिया या इराक के किसी आतंकवादी के लिए ऐसी अंग्रेजी बोलना मुमकिन नहीं था. तभी से दुनिया ने ना सिर्फ जेहादी जॉन के ब्रिटिश होने का अंदाजा लगा लिया, बल्कि उसे 'जेहादी जॉन' का भी नाम दिया. {mospagebreak}

इंसानों के बाद अब बेजान मूर्तियों पर ISIS का निशाना
अपने दबदबे वाले इलाकों में कत्ले-आम मचाने के बाद अब ISIS ने हजारों साल पुरानी इराकी सभ्यता पर ही चोट करना शुरू कर दिया है. अब वो चुन-चुन कर मूर्तियों, मजारों, किताबों और दस्तावेजों को मटियामेट करने लगा है. ISIS का मानना है कि ये चीजें इस्लाम और शरीया कानून के खिलाफ है.

ISIS ने उत्तरी इराक के मोसूल शहर में मौजूद ऐसे ही एक ऐतिहासिक अजायबघर में धावा बोला और देखते ही देखते एंटिक यानी पुरातन मूल्य की बेशकीमती मूर्तियों को जमींदोज कर दिया. आतंकवादी ऐसा करने के लिए भारी-भरकम हथौड़ों के साथ-साथ ड्रिल मशीनें भी लेकर पहुंचे थे. इसके बाद बारी आई उन मजारों की, जिनकी दुनिया भर में बहुत बड़ी मजहबी अहमियत है. लेकिन ISIS का कहर इसके बाद भी शांत नहीं हुआ. उन्होंने एक पब्लिक लाइब्रेरी में रखी तकरीबन 10 हजार किताबों और 700 दुर्लभ पांडुलिपियों को भी आग के हवाले कर दिया.

इराक में 220 ईसाइयों पर मौत की तलवार
ISIS के कब्जे वाले इराक में 220 ईसाइयों पर मौत की तलवार लटकी है. ISIS ने 33 गांवों पर धावा बोल कर इन ईसाइयों को अपने कब्जे में ले लिया है. अब खतरा ये है कि अमेरिका और यूरोपीय मुल्कों से अपनी खुन्नस निकालने के लिए वो कभी भी इनका कत्ले-आम कर सकता है.

माना जा रहा है कि ब्रिटेन और अमेरिका को 'सबक' सिखाने के लिए ISIS बंधक बनाए गए इन ईसाइयों के साथ ज्यादती कर सकता है. यही वजह है कि अमेरिका ने ISIS पर अब नए सिरे से हवाई हमलों की शुरुआत कर दी है.

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