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कहीं दुकान में बंधक तो कहीं गैंगरेप के बाद हत्या... 4 वारदातों से दिल्ली में बेटियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

दिल्ली में महज दो हफ्तों से भी कम वक्त में नाबालिगों से जुड़ी रेप और गैंगरेप की चार गंभीर घटनाएं सामने आईं हैं. देशबंधु गुप्ता रोड, सदर बाजार, कालकाजी और स्वरूप नगर की घटनाओं ने लोगों को चिंता में डाल दिया है. पढ़ें पूरी कहानी.

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ऐसे मामलों ने महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है (फोटो-ITG)
ऐसे मामलों ने महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है (फोटो-ITG)

राजधानी दिल्ली में लगातार नाबालिगों के खिलाफ होने वाली यौन हिंसा की घटनाओं ने महिला और बाल सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सोमवार और उससे पहले सामने आए चार मामलों में 6 साल की बच्ची से लेकर किशोर उम्र की लड़कियां तक इस तरह के जुर्म का शिकार हुईं. एक के बाद एक इन वारदातों ने फिर से महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है. 

किशनगंज में 6 साल की बच्ची के मामले में स्थानीय लोगों ने आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया, जबकि सदर बाजार में 11 साल की बच्ची के साथ दर्जी पर यौन अपराध का आरोप है. कालकाजी के पास 17 साल की किशोरी से कथित गैंगरेप में एक आरोपी मुठभेड़ के बाद पकड़ा गया, जबकि स्वरूप नगर में 16 साल की किशोरी की गैंगरेप के बाद हत्या का मामला सामने आया.

वारदात नंबर - 1

पहली घटना मध्य दिल्ली के देशबंधु गुप्ता रोड थाना क्षेत्र के किशनगंज इलाके की है. सोमवार यानी 21 सितंबर की शाम करीब 6:30 बजे कुछ स्थानीय लोग एक 6 साल की बच्ची और उसके परिजनों के साथ शिदीपुरा पुलिस चौकी पहुंचे. उनके साथ 34 वर्षीय अंकित नाम का एक व्यक्ति भी था, जिसे लोगों ने कथित तौर पर बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न करते हुए पकड़ा था. इसके बाद आरोपी को पुलिस के हवाले कर दिया गया.

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पुलिस के मुताबिक, आरोपी अंकित किशनगंज इलाके का रहने वाला है. घटना की सूचना मिलने के बाद बच्ची को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल भेजा गया. पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण भी किया और मामले से जुड़े लोगों से जानकारी जुटाई. नाबालिग से जुड़े इस मामले में POCSO एक्ट और भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई शुरू की गई है. पुलिस आरोपी से पूछताछ कर घटना से जुड़े बाकी तथ्यों की जांच कर रही है. 

घटना की जानकारी सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में काफी आक्रोश दिखाई दिया. बड़ी संख्या में लोग पुलिस चौकी के बाहर जमा हो गए और आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की. पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की और कहा कि मामले की जांच कानून के मुताबिक की जा रही है. इस घटना ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि राजधानी में छोटी बच्चियों की सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर निगरानी और पुलिस की मौजूदगी कितनी प्रभावी है.

वारदात नंबर - 2

दूसरी घटना सोमवार 21 सितंबर की देर शाम दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के कालकाजी मंदिर के पास मौजूद आस्था कुंज पार्क की है. पुलिस के मुताबिक, 17 साल की एक किशोरी अपने 17 वर्षीय दोस्त के साथ करीब 7 बजे कालकाजी मंदिर गई थी. इसके बाद दोनों करीब 7:30 बजे आस्था कुंज पार्क पहुंचे. आरोप है कि वहां तीन युवक आए और खुद को पुलिसकर्मी बताकर दोनों को डराने-धमकाने लगे.

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पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने किशोरी और उसके दोस्त को अलग किया. एक आरोपी ने किशोरी के दोस्त को कथित तौर पर पकड़ लिया, जबकि तीनों ने किशोरी के साथ यौन हिंसा की. घटना के बाद आरोपियों ने दोनों को पुलिस कार्रवाई का डर दिखाया और वहां से चले गए. रात करीब 8:45 बजे PCR कॉल मिलने के बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची और किशोरी को मेडिकल जांच के लिए भेजा गया. मामले में POCSO एक्ट और BNS की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.

जांच के दौरान पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की. मंगलवार सुबह पुलिस की एक टीम ने एक आरोपी को पकड़ने की कोशिश की तो कथित तौर पर मुठभेड़ हुई. पुलिस के मुताबिक, आरोपी की पहचान आसिफ के तौर पर हुई और उसके पैर में गोली लगी, जिसके बाद उसे पकड़ लिया गया. मामले में शामिल बताए जा रहे दो अन्य आरोपियों को तलाश करने के लिए पुलिस CCTV फुटेज समेत दूसरे सुरागों की जांच कर रही थी.

इस मामले में सबसे गंभीर पहलू यह है कि आरोपियों ने खुद को पुलिसकर्मी बताकर किशोरी और उसके दोस्त को डराया. आस्था कुंज पार्क कालकाजी मंदिर और ISKCON मंदिर के नजदीक है. घटना के बाद पुलिस ने आसपास के CCTV फुटेज खंगालने और बाकी आरोपियों की पहचान करने की कार्रवाई शुरू की है. इसके बाद पुलिस ने फरार दोनों आरोपियों को पकड़ लिया है. उनकी पहचान हेमंत और उसके भाई के तौर पर हुई है.

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दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर विजय कुमार के मुताबिक, आरोपियों ने कथित तौर पर पुलिसकर्मी बनकर कार्रवाई करने की कोशिश की थी. पुलिस के अनुसार, हेमंत का दावा है कि उसने लॉ की पढ़ाई की है, जबकि उसका छोटा भाई कथित तौर पर BSc का छात्र है. छोटे भाई की पहचान पुलिस ने सार्वजनिक नहीं की है क्योंकि मामले में उसकी भूमिका और अन्य तथ्यों की जांच अभी जारी है.

जांच में यह भी सामने आया है कि घटना और PCR कॉल के बीच करीब 45 मिनट का अंतर था. पुलिस के मुताबिक, वारदात शाम करीब 7:30 बजे से 8 बजे के बीच होने की बात सामने आई है, जबकि PCR कॉल रात 8:45 बजे मिली. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि तीनों आरोपी एक-दूसरे को कैसे जानते थे. तीनों की भूमिका, घटना से पहले और बाद की गतिविधियों तथा उनके आपसी संबंधों की भी जांच की जा रही है.

वारदात नंबर - 3

तीसरी घटना दिल्ली के सदर बाजार इलाके की है. पुलिस के मुताबिक, 16 सितंबर की रात करीब 11 बजे 11 साल की एक बच्ची घर से स्टेशनरी का सामान खरीदने निकली थी. आरोप है कि इलाके में ही दर्जी की दुकान चलाने वाले 56 वर्षीय मकसूद ने बच्ची को दुकान के अंदर बुलाया. इसके बाद उसने बच्ची को कथित तौर पर रोक लिया और उसके हाथ-पैर बांधकर उसके साथ यौन अपराध किया.

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मामले में सामने आई पुलिस जानकारी के मुताबिक बच्ची के हाथ-पैर बांधे गए थे और उसे चुप कराने के लिए उसके मुंह में कपड़ा रखने का भी आरोप है. बच्ची जब काफी देर तक घर नहीं लौटी तो परिवार ने उसकी तलाश शुरू की. बाद में बच्ची ने अपनी मां को घटना की जानकारी दी. इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई और 16 सितंबर की रात PCR कॉल मिलने पर सदर बाजार थाना और महिला पुलिस थाने की टीम मौके पर पहुंची.

पुलिस ने आरोपी मकसूद को गिरफ्तार कर लिया और उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया. इस मामले में उत्तर जिला महिला थाना में रेप, गलत तरीके से बंधक बनाने और POCSO एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. पुलिस बच्ची के बयान, मेडिकल जांच और दूसरे सबूतों के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है. घटना ने भीड़भाड़ वाले बाजार और रिहायशी इलाकों में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं.

वारदात नंबर - 4

चौथी घटना बाहरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके की है, जहां एक किशोरी की कथित गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई. उपलब्ध पुलिस-आधारित रिपोर्टों में पीड़िता की उम्र 16 साल बताई गई है, जबकि कुछ जगह अलग उम्र का उल्लेख आया है. पुलिस के अनुसार, 10 सितंबर को वह अपने एक 17 वर्षीय परिचित से मिलने गई थी. आरोप है कि इसके बाद उस युवक ने अपने तीन अन्य साथियों को बुलाया और चारों ने मिलकर किशोरी के साथ यौन हिंसा की.

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पुलिस जांच के मुताबिक, वारदात के दौरान किशोरी ने आरोपियों को पुलिस को बताने की बात कही थी. इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई और शव को बाहरी दिल्ली के स्वरूप नगर इलाके में एक खुले खेत के पास झाड़ियों में छिपा दिया गया. पुलिस ने CCTV फुटेज और घटनास्थल के आसपास दिखे एक संदिग्ध टेंपो की मदद से जांच आगे बढ़ाई. कई CCTV कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद पुलिस आरोपियों तक पहुंची.

पुलिस ने इस मामले में 19 वर्षीय शिवम गणेश और तीन नाबालिग आरोपियों को पकड़ा है. पुलिस के मुताबिक, तीनों नाबालिगों की उम्र 16 और 17 साल के आसपास है. जांच के दौरान आरोपियों के पास से कथित तौर पर वारदात में इस्तेमाल किए गए दो चाकू और कपड़े बरामद किए गए हैं. पुलिस ने रेप, हत्या, सबूत मिटाने और POCSO एक्ट की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है और मामले की जांच जारी है.

पीड़िता का शव 12-13 सितंबर के दौरान खुले इलाके में मिला था और पुलिस ने इसके बाद जांच तेज की. कुछ मीडिया रिपोर्टों में चाकू से आठ वार किए जाने की बात कही गई है, लेकिन उपलब्ध पुलिस-आधारित रिपोर्टों में वार की संख्या एक जैसी नहीं है. जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों में से एक पीड़िता का परिचित था और वह उसी से मिलने गई थी.

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दिल्ली में महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल

कुछ ही दिनों के अंतराल में सामने आए इन मामलों में पीड़िताएं अलग-अलग उम्र की नाबालिग हैं और घटनाएं दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में हुईं. एक बच्ची के मामले में आरोपी को स्थानीय लोगों ने पकड़कर पुलिस को सौंपा, दूसरी बच्ची को कथित तौर पर दुकान के अंदर बंधक बनाया गया. तीसरे मामले में आरोपियों ने पुलिस बनकर किशोरी को डराया, जबकि चौथे मामले में परिचित से मिलने गई किशोरी की कथित गैंगरेप के बाद हत्या कर दी गई. ये घटनाएं बच्चों और किशोरियों के लिए सुरक्षित सार्वजनिक और आसपास के स्थानों को लेकर गंभीर चिंता सामने रखती हैं.

दिल्ली में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध को लेकर उपलब्ध आंकड़े भी इस चिंता की पृष्ठभूमि बताते हैं. NCRB की 2023 रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ 13,366 अपराध दर्ज हुए थे, जबकि 1,088 रेप केस दर्ज हुए, जो उस साल 19 महानगरों में सबसे ज्यादा थे. बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों में भी दिल्ली महानगरों में सबसे ऊपर रही और POCSO के तहत 1,755 मामले दर्ज हुए. हालांकि अपराध के आंकड़ों की तुलना करते समय आबादी, FIR दर्ज होने की प्रक्रिया और राज्यों की रिपोर्टिंग व्यवस्था जैसे पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है.

दिल्ली पुलिस के 2025 के आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में 1,901 रेप केस दर्ज हुए थे, जबकि 2024 में यह संख्या 2,076 और 2023 में 2,141 थी. पुलिस ने 2025 में दर्ज रेप मामलों में 97 प्रतिशत से ज्यादा मामलों को सुलझाने का दावा किया था. यह आंकड़ा जांच और गिरफ्तारी की कार्रवाई को दिखाता है, लेकिन मौजूदा घटनाएं यह सवाल भी सामने रखती हैं कि अपराध होने से पहले रोकथाम, संवेदनशील इलाकों की निगरानी, महिलाओं और बच्चों के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थान और तेज पुलिस एक्शन को और मजबूत कैसे किया जाए.

इन चार मामलों में पुलिस ने आरोपियों की गिरफ्तारी या हिरासत की कार्रवाई की है, लेकिन कई मामलों की जांच अभी जारी है और अदालत में आरोप साबित होना बाकी है. इसलिए इन घटनाओं से जुड़े आरोपों को जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि राजधानी में घर से बाहर निकलने वाली बच्चियों और किशोरियों की सुरक्षा के लिए पुलिस, स्थानीय प्रशासन और समाज के स्तर पर निगरानी और रोकथाम की व्यवस्था कितनी मजबूत है. हाल की घटनाओं ने इस सवाल को एक बार फिर बेहद गंभीर बना दिया है.

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