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Gold- Silver Crash: ₹7000 टूटा भाव...अचानक बिखर गई चांदी, 10 महीने में ₹2.40 लाख हुई सस्ती

सोने और चांदी के भाव में भारी गिरावट आई है. आज फिर चांदी की कीमत 7000 रुपये गिर चुकी है और चांदी की कीमत 1.80 लाख रुपये प्रति किलो के करीब पहुंच गई है. सोना भी तेजी से गिर रहा है...

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चांदी के भाव में बड़ी गिरावट. (Photo: ITG)
चांदी के भाव में बड़ी गिरावट. (Photo: ITG)

पिछले कुछ दिनों से सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट आई है. आए दिन पांच से 10 हजार रुपये तक चांदी की कीमतों में गिरावट दिख रही है. वह भी ऐसे समय में जब दुनियाभर में जियो-पॉलिटिकल सिचुएशन जारी है. ऐसे में सोने और चांदी जैसी धातुओं की कीमतों में तेजी देखी जाती है, लेकिन यहां ठीक इसके उल्‍टा दिखाई दे रहा है. 

चांदी की कीमतों में हर दिन बड़ी गिरावट देखने को मिल रही है. साथ ही सोना भी इस गिरावट को फॉलो कर रहा है. इस साल रिकॉर्ड 4.20 लाख रुपये प्रति किलो पर कारोबार करने वाली चांदी सिर्फ 10 महीनों में ही 2.40 लाख रुपये गिरकर 1.80 लाख रुपये प्रति किलो पर आ चुकी है. ऐसे में यह सवाल लाजमी है कि आखिर इस चांदी को हुआ क्‍या है?

शुक्रवार को एमसीएक्‍स पर शाम 5.08 बजे दिसंबर फ्यूचर वाली चांदी की कीमत 7,000 रुपये या 3.67 फीसदी टूटकर 1,82,500 रुपये प्रति किलो पर कारोबार कर रही थी. वहीं सोने की कीमत 1.16 फीसदी या 1657 रुपये गिरकर 1,40,900 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर थी.  

इंटरनेशनल मार्केट में भी बिखरी चांदी 
सोने-चांदी का भाव सिर्फ भारत के कमोडिटी मार्केट में ही नहीं, बल्कि इंटरनेशनल मार्केट में भी गिरा है. इंटरनेशनल मार्केट में गोल्‍ड 1.26% टूटकर 4000 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ चुका है. वहीं सिल्‍वर करीब 4 फीसदी गिरकर 50.345 डॉलर प्रति औंस पर है. 

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सोने-चांदी के भाव में इतनी गिरावट क्‍यों? 

  • फेडरल रिजर्व का सख्त रुख: मजबूत जीडीपी आंकड़ों और लगातार बनी हुई महंगाई के कारण उम्मीद है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और सख्ती कर सकता है. ऐसे में अगर ऊंची ब्‍याज दरें रहती है तो सोना-चांदी जैसी धातुओं में और गिरावट आ सकती है. 
  • डॉलर का मजबूत होना: डॉलर इंडेक्स में मजबूती और यूएस बॉन्ड यील्ड्स में बढ़त के चलते कमोडिटी मार्केट, खासकर कीमती धातुओं पर दबाव बढ़ा है.
  • कमजोर औद्योगिक मांग: चांदी सिर्फ निवेश की धातु नहीं है, बल्कि इसका बड़ा हिस्सा औद्योगिक कार्यों (जैसे सोलर पैनल/फोटोवोल्टिक और इलेक्ट्रॉनिक्स) में इस्तेमाल होता है. चीन में मांग सुस्त पड़ने और सोलर मैन्युफैक्चरर्स द्वारा 'थ्रिफ्टिंग' (प्रति सेल चांदी का इस्तेमाल कम करने) के चलते इंडस्ट्रियल डिमांड कमजोर हुई है.
  • ऊंची क्रूड ऑयल कीमतें और महंगाई का दबाव: कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल से ऊपर रहने से वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताएं बढ़ी हैं, जिसके जवाब में सेंट्रल बैंक सख्त मौद्रिक नीतियां अपना रहे हैं. 
  • प्रॉफिट बुकिंग और लिक्विडेशन: जनवरी 2026 में चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचने के बाद निवेशकों और ट्रेडर्स की ओर से भारी मुनाफावसूली हुई, जिससे कीमतों में लगातार करेक्शन देखने को मिला है. 

(नोट- किसी भी तरह के धातु में निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

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