शहर में किराये के मकान में रह रहे लाखों परिवारों के लिए अपना घर खरीदना आज भी बड़ी चुनौती है. अगर जमीन नहीं है या घर खरीदने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं, तो सवाल यही रहता है कि आखिर अपना घर कैसे बनेगा? ऐसे परिवारों के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 (PMAY-U 2.0) में कई रास्ते रखे गए हैं. खास बात यह है कि योजना सिर्फ घर बनाने या खरीदने वालों तक सीमित नहीं है, बल्कि किराये पर रहने वाले परिवारों के लिए भी अलग प्रावधान किया गया है.
सरकार ने PMAY 2.0 के तहत करीब 1 करोड़ शहरी परिवारों को पक्का घर उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा है. इस पूरी योजना के लिए ₹10 लाख करोड़ का प्रावधान किया गया है, जिसमें केंद्र सरकार की ओर से करीब ₹2.30 लाख करोड़ की सीधी आर्थिक मदद दी जाएगी. योजना का फोकस शहरी गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर है. पात्र परिवार अपनी जरूरत और स्थिति के हिसाब से घर बनाने, नया घर खरीदने या किफायती किराये के मकान का विकल्प चुन सकते हैं.
जमीन है तो घर बनाने में मदद
अगर आपके पास शहर में अपनी जमीन है, लेकिन उस पर पक्का घर बनाने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं, तो योजना के तहत आर्थिक सहायता का प्रावधान है. अपनी जमीन पर नया पक्का घर बनाने वाले पात्र परिवारों को ₹1.5 लाख तक की केंद्रीय सहायता मिल सकती है. यानी जमीन पहले से है तो सरकार की मदद से घर बनाने का रास्ता आसान हो सकता है.
जमीन नहीं है तो क्या होगा?
शहरी इलाकों में बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है जिनके पास अपनी जमीन नहीं है. ऐसे लोगों के लिए सरकार ने अलग व्यवस्था रखी है. इसके तहत सरकार प्राइवेट और पब्लिक एजेंसियों के साथ मिलकर किफायती घर तैयार कराएगी. इसमें पात्र आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के परिवारों के लिए प्रति घर ₹1.5 लाख तक की केंद्रीय सहायता का प्रावधान है. यानी अपनी जमीन नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि योजना का फायदा नहीं मिल सकता. पात्रता पूरी होने पर घर पाने के लिए दूसरे मॉडल का रास्ता मौजूद है.
किराये पर रहने वालों के लिए भी खास व्यवस्था
PMAY 2.0 में एक अहम पहलू किराये के मकानों को लेकर है. शहरों में नौकरी या काम के लिए आने वाले ऐसे लोग, जिनके लिए अपना घर खरीदना फिलहाल आसान नहीं है, उनके लिए किफायती किराये के मकान उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है. इसमें प्रवासी, औद्योगिक मजदूर, कामकाजी महिलाएं और शहरी गरीब जैसे वर्गों को ध्यान में रखा गया है. यानी अगर कोई परिवार या व्यक्ति शहर में रहकर किराया देता है, तो योजना में उसके लिए भी आवास का रास्ता रखा गया है.
घर खरीदने के लिए लोन लिया तो भी फायदा
अगर आपके पास घर खरीदने के लिए कुछ रकम है, लेकिन बाकी पैसे के लिए होम लोन लेना पड़ेगा, तो भी योजना मदद कर सकती है. पात्र लाभार्थियों को ₹8 लाख तक के होम लोन पर सालाना 4 फीसदी ब्याज सब्सिडी का प्रावधान है. इससे लाभार्थी को अधिकतम ₹1.80 लाख तक का फायदा हो सकता है. इसका मतलब यह है कि योजना में सिर्फ घर बनाने वालों को ही नहीं, बल्कि होम लोन लेकर घर खरीदने की तैयारी कर रहे पात्र परिवारों को भी राहत देने की व्यवस्था है.
आपकी सालाना आय कितनी है?
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 का फायदा लेने के लिए सिर्फ शहर में रहना पर्याप्त नहीं है. परिवार की सालाना आय भी तय सीमा के भीतर होनी चाहिए. योजना में तीन आय वर्ग शामिल किए गए हैं...
₹3 लाख तक सालाना आय वाले परिवार
₹3 लाख से ₹6 लाख तक सालाना आय वाले परिवार
₹6 लाख से ₹9 लाख तक सालाना आय वाले परिवार
इसलिए आवेदन या लाभ लेने से पहले अपनी सालाना आय और योजना की पात्रता शर्तों को जरूर जांचना जरूरी है.
आपके लिए कौन-सा विकल्प है?
अगर आप शहरी इलाके में रहते हैं तो सबसे पहले अपनी स्थिति देखें. जमीन है, लेकिन पैसे नहीं हैं? तो घर बनाने वाली सहायता का रास्ता हो सकता है. जमीन नहीं है? तो किफायती घर वाले मॉडल में पात्रता देखी जा सकती है. किराये पर रहते हैं? तो अफोर्डेबल रेंटल हाउसिंग का विकल्प आपके लिए अहम हो सकता है. घर खरीदने के लिए लोन लेना है? तो ब्याज सब्सिडी वाला विकल्प देख सकते हैं. यानी सरकार ने शहरी परिवारों के लिए घर से जुड़ी जरूरतों को एक ही मॉडल में रखने के बजाय अलग-अलग रास्ते तैयार किए हैं.