देश के लोको पायलटों के लिए बड़ी राहत की तैयारी है. भारतीय रेलवे के सबसे शक्तिशाली 12,000 हॉर्स पावर के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में अब वाटरलेस यूरिनल लगाने की योजना पर काम चल रहा है. फिलहाल इन इंजनों में यूरिनल या टॉयलेट की सुविधा नहीं है, जिससे लंबी दूरी तक मालगाड़ी चलाने वाले लोको पायलटों को परेशानी होती है. रेलवे में महिला लोको पायलटों की बढ़ती भागीदारी के बीच इस सुविधा की जरूरत और भी महत्वपूर्ण हो गई है.
मधेपुरा इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव प्राइवेट लिमिटेड (MELPL) ने बताया है कि रेलवे के साथ इस मुद्दे पर बातचीत एडवांस स्टेज में है. कंपनी एक रेट्रोफिटेड वाटरलेस यूरिनल वाले प्रोटोटाइप का परीक्षण भी कर रही है, जो करीब चार महीने से ऑपरेशन में है और अब तक अच्छा प्रदर्शन कर रहा है.
नए इंजनों में इनबिल्ट यूरिनल
MELPL के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक गर्ग के मुताबिक, मदेपुरा फैक्ट्री से तैयार होकर निकलने वाले नए 12,000 HP लोकोमोटिव में वाटरलेस यूरिनल इनबिल्ट लगाया जाएगा. वहीं पहले से रोलआउट हो चुके इंजनों में रेट्रोफिटिंग के जरिए यह सुविधा जोड़ने की तैयारी है. उन्होंने कहा कि रेलवे के साथ बातचीत एडवांस स्टेज में है और रेलवे चाहता है कि कंपनी द्वारा बनाए जा रहे सभी नए लोकोमोटिव में यह सुविधा शामिल की जाए. महिला लोको पायलटों की मौजूदगी को देखते हुए भी यह बदलाव अहम माना जा रहा है.
चलती ट्रेन में इस्तेमाल नहीं होगा
हालांकि, वाटरलेस यूरिनल को लेकर सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण पहलू है. विवेक गर्ग के मुताबिक, चलते हुए लोकोमोटिव में लोको पायलट का ड्राइविंग डेस्क छोड़कर यूरिनल इस्तेमाल करना उचित नहीं होगा. इसका इस्तेमाल केवल उस स्थिति में किया जाना प्रस्तावित है, जब लोकोमोटिव या ट्रेन रुकी हुई हो.
यूरिनल को लोकोमोटिव में फिट करने के लिए डिजाइन और वाटर सप्लाई सिस्टम में भी बदलाव की जरूरत है. कंपनी के मुताबिक, जब 2014-15 के आसपास 12,000 HP लोकोमोटिव की स्पेसिफिकेशन तय की गई थी, तब इस तरह के वाटरलेस यूरिनल सिस्टम लोकोमोटिव में इंटीग्रेट करने के लिहाज से ज्यादा डेवपल नहीं थे. अब नई तकनीक और डेवलपमेंट के साथ इन्हें शामिल करना संभव हो गया है.
12,000 HP लोकोमोटिव की खासियत
MELPL भारतीय रेलवे और फ्रांस की कंपनी अल्स्टॉम (Alstom) का जॉइंट वेंचर है, जिसमें अल्स्टॉम की 74 फीसदी हिस्सेदारी है. बिहार के मधेपुरा में कंपनी 12,000 HP के इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाती है. इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से भारी माल ढुलाई के लिए किया जाता है. कंपनी ने 15 अगस्त को रेलवे को अपना 650वां लोकोमोटिव सौंपा था. मधेपुरा में तैयार पहला 12,000 HP लोकोमोटिव 18 मई 2020 को पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन से ऑपरेशन में शामिल हुआ था. इस लोकोमोटिव की डिजाइन स्पीड 120 किलोमीटर प्रति घंटा है और यह करीब 6,000 टन तक माल ढो सकता है.
800 लोकोमोटिव की सप्लाई का लक्ष्य
MELPL को 2015 में मार्च 2028 तक 800 लोकोमोटिव बनाने और रेलवे को सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट मिला था. इस प्रोजेक्ट की शुरुआती लागत करीब ₹28,000 करोड़ थी, जिसे बाद में बढ़ाकर ₹33,000 करोड़ से ज्यादा किया गया. इस परियोजना के जरिए भारत 12,000 HP इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव बनाने वाला दुनिया का छठा देश बना. वहीं भारतीय रेलवे इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में जरूरत के आधार पर चरणबद्ध तरीके से वाटरलेस यूरिनल उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रहा है. रेलवे के मुताबिक, फरवरी 2026 तक 2,800 से ज्यादा लोकोमोटिव में यूरिनल की सुविधा दी जा चुकी थी.