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HDFC Bank Rate Hike: लोन महंगा... बढ़ेगा EMI का बोझ, देश के सबसे बड़े बैंक ने दिया झटका

HDFC Bank MCLR Hike: मार्केट कैप के लिहाज से देश के सबसे बड़े प्राइवेट बैंक HDFC Bank ने ग्राहकों के लिए कर्ज महंगा कर दिया है. 8 जून से अलग-अलग टेन्योर के लोन पर एमसीएलआर रेट्स बढ़ा दिया गया है.

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एचडीएफसी बैंक के नए एमसीएलआर रेट्स सोमवार से प्रभावी. (FilePhoto: ITG)
एचडीएफसी बैंक के नए एमसीएलआर रेट्स सोमवार से प्रभावी. (FilePhoto: ITG)

देश के सबसे बड़े बैंक HDFC Bank ने अपने ग्राहकों को झटका दे दिया है. बैंक की ओर से कर्ज महंगा कर दिया गया है. एचडीएफसी बैंक ने अपने मार्जिनल कॉस्ट लेंडिंग रेट यानी MCLR में बढ़ोतरी की है. बैंक की वेबसाइट के मुताबिक, नई दरें सोमवार 8 जून से लागू कर दी गई हैं. यानी एमसीएलआर से जुड़े तमाम लोन महंगे हो सकते हैं और ईएमआई का बोझ बढ़ सकता है. 

5-10 बेसिस प्वाइंट का इजाफा
एचडीएफसी बैंक ने अपने एमसीएलआर रेट्स में 5-10 बेसिस प्वाइंट का इजाफा किया है. नई दरों को देखें, तो ओवरनाइट लोन पर एमसीएलआर 8.05 फीसदी से बढ़कर अब 8.10 फीसदी कर दिया गया है. इसके अलावा तीन महीने के लोन के लिए ये बढ़कर 8.20 फीसदी, छह महीने के लिए 8.35 फीसदी हो गया है. 1 साल की अवधि के लिए MCLR को बढ़ाकर 8.40 फीसदी किया गया है. वहीं दो साल के लिए 8.55 फीसदी और साल के लिए अब 8.65 फीसदी हो गया है. 

HDFC Bank Loan Rate Hike

गौरतलब है कि ज्यादातर होम लोन एक साल की एमसीएलआर से जुड़े होते हैं, तो उनके लिए 5 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की गई है. खास बात ये है कि भारतीय रिजर्व बैंक ने बीते शुक्रवार को एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान किया था और रेपो रेट को 5.25 फीसदी पर स्थिर रखा था, इसके बाद भी एचडीएफसी बैंक ने ये फैसला लेते हुए नए ग्राहकों के लिए कर्ज लेना महंगा किया है, तो वहीं लोन ले चुके ग्राहकों पर ईएमआई का बोझ बढ़ाने का काम किया है. 

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किन लोगों पर बढ़ेगा बोझ 
MCLR को लेकर किया गया ये बदलाव उन कस्‍टमर्स पर असर डालेगा, जिनका लोन फ्लोटिंग रेट पर निर्भर है और उन्होंने एमसीएलआर-लिंक्ड लोन ले रखा है. बैंक का MCLR आपकी EMI पर सीधा असर डालता है. MCLR बढ़ने पर लोन का इंटरेस्ट रेट बढ़ जाता है, जिससे आपकी EMI ज्‍यादा हो जाती है. वहीं इसके घटने से लोन का इंटरेस्ट कम हो जाता है, जिससे आपकी EMI सस्ती हो जाती है. 

क्या होता है MCLR, कैसे होता है तय?
एमसीएलआर यानी मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट वह मिनिमम इंटरेस्ट रेट होता है, जिस पर बैंक अपने ग्राहकों को लोन मुहैया कराता है. इसे तय करने के लिए कई अहम फैक्टर्स पर फोकस दिया जाता है. इसमें बैंक की डिपॉजिट रेट, रेपो रेट, ऑपरेशनल कॉस्ट और कैश रिजर्व रेशो को बनाए रखने का खर्च शामिल होता है. आमतौर पर रेपो रेट और रिजर्व रेपो रेट में बदलाव के साथ ही एमसीएलआर पर भी असर होता है.

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