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EPFO Rule Change: जॉब स्विच कर रहे हैं, तो जान लें PF ट्रांसफर से जुड़ा ये नया नियम

PF Transfer New Rule: ईपीएफओ ने हाल ही में अपने कई नियमों में बदलाव (EPFO Rule Change) किया है और इनमें नौकरी बदलने वालों के लिए पीएफ ट्रांसफर समेत कई चेंज शामिल हैं.

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पीएफ ट्रांसफर को लेकर ईपीएफओ ने बदला है नियम. (Photo: ITG)
पीएफ ट्रांसफर को लेकर ईपीएफओ ने बदला है नियम. (Photo: ITG)

क्या आप भी नौकरी बदल रहे हैं, अगर हां तो ये खबर आपके लिए खास है. दरअसल, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी EPFO से जुड़े तमाम नियम बदल चुके हैं और नई नौकरी ज्वाइन करने वालों के लिए इन पीएफ रूल चेंज (PF Rule Change) के बारे में जान लेना जरूरी है. इनमें एक खास है पीएफ ट्रांसफर, जिसे पहले से ज्यादा सरल बनाया गया है. 

नौकरी बदलते ही करना होता था ये काम 
नई नौकरी शुरू करने पर आमतौर पर कई जरूरी काम करने होते हैं, जैसे दस्तावेजों को अपडेट करना, कागजी कार्रवाई पूरी करना और नए वर्कप्लेस में व्यवस्थित होना. अगर पीएफ खाते की बात करें, तो पुरानी कंपनी से से भविष्य निधि की राशि, यानी PF Balance ट्रांसफर करने के लिए अलग से अनुरोध करना होता था, लेकिन ताजा बदलावों के बाद अब यह प्रोसेस काफी सरल हो गया है. EPFO ने एक नई प्रणाली शुरू की है, जिसके तहत पात्र कर्मचारियों को नौकरी बदलने के बाद अलग से पीएफ ट्रांसफर (PF Transfer) अनुरोध जमा करने की जरूरत नहीं होगी. 

ऑटोमैटिक ट्रांसफर हो जाएगा पैसा
नए बदलाव के मुताबिक, अगर यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) आधार से जुड़ा हुआ है और अन्य सभी शर्तें पूरी होती हैं, तो फिर कर्मचारी के नए एंप्लॉयर के साथ जुड़ने पर पीएफ बैलेंस ऑटोमैटिक तरीके से ट्रांसफर हो जाएगा. यह चेंज ईपीएफओ द्वारा अपने सेंट्रलाइज्ड आईटी इनेबल्ड सर्विस (CITES) प्लेटफॉर्म पर आने के बाद लागू किया गया है, जिसे सदस्यों के रिकॉर्ड और सेवाओं को एक ही सिस्टम पर लाने के लिए डिजाइन किया गया है.

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अब ऐसे फटाफट होगा काम
अब तक कर्मचारियों को अपने पिछले नियोक्ता के पीएफ खाते से नए नियोक्ता के खाते में पीएफ राशि ट्रांसफर के लिए जो आवेदन करना पड़ता था. उस पर EPFO द्वारा कार्रवाई की जाती थी और कुछ मामलों में नियोक्ता द्वारा इसका सत्यापन भी किया जाता था.

नई प्रणाली के तहत, संगठन इन सदस्यों के पात्र पीएफ बैलेंस को स्वचालित रूप से ट्रांसफर करेगा, जिनका आधार-ऑथेंटिकेशन UAN सही तरीके से लिंक है. इस बदलाव से ये काम करने के लिए अलग से ऑनलाइन या ऑफलाइन ट्रांसफर आवेदन फाइल की जरूरत खत्म हो जाती है. 

इसके प्रोसेस की बात करें, तो एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर कर्मचारी के पूरे कामकाजी जीवन में एक जैसा ही रहता है. हालांकि, जब भी कोई कर्मचारी किसी नई कंपनी में शामिल होता है, तो एक नई पीएफ मेंबर आईडी बनाई जाती है. अब नए सिस्टम के तहत EPFO इन आईडी को एक ही यूएएन के तहत ऑटोमैटिक जोड़ सकता है और कर्मचारी से पीएफ ट्रांसफर के लिए अलग से अनुरोध की जरूरत नहीं रहती. 

बदलाव से आखिर फायदा क्या? 
PF Transfer  के नियम और प्रोसेस में किए जाने वाले इस बदलाव के उद्देश्य और फायदों की बात करें, तो बता दें कई कर्मचारी अपने करियर के दौरान कई बार नौकरी बदलते हैं. ऐसे में उनके पास अक्सर एक ही यूएएन से जुड़ी कई पीएफ आईडी हो जाती हैं. इन्हें एक साथ लाने से रिटायरमेंट सेविंग पर नजर रखना आसान होगा, एंप्लाई रिकॉर्ड बनाए रखने में भी मदद मिलेगी, तो वहीं कर्मचारियों को अपने पेंशन खाते की शेष राशि कई खातों में देखने के बजाय अब एक ही स्थान पर देखने की सुविधा मिलेगी. 

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