दिल्ली से मेरठ तक नमो भारत (Namo Bharat) ट्रेन के पूरे 82 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर के शुरू होने के बाद अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड कनेक्टिविटी को और विस्तार देने की तैयारी है. दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ RRTS कॉरिडोर पर फिलहाल 50-55 मिनट में सफर पूरा हो रहा है. अब दूसरे चरण में तीन नए कॉरिडोर को मंजूरी मिलने की संभावना है, जिनमें गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट रूट को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है.
प्रस्तावित कॉरिडोर्स के शुरू होने के बाद दिल्ली-एनसीआर का कनेक्शन बागपत, शामली, हापुड़, बुलंदशहर और खुर्जा जैसे शहरों से और मजबूत होगा. इससे लाखों यात्रियों के साथ-साथ कारोबार, उद्योग और शिक्षा क्षेत्र को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है.
इन सभी रूटों का सबसे अहम केंद्र गाजियाबाद RRTS स्टेशन होगा. इसे इंटरचेंज हब के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां से यात्री अलग-अलग कॉरिडोर के लिए आसानी से ट्रेन बदल सकेंगे.
देश का पहला RRTS कॉरिडोर
दिल्ली-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर देश का पहला Regional Rapid Transit System (RRTS) प्रोजेक्ट है. यह लाइन दिल्ली के सराय काले खां से मेरठ के मोदीपुरम तक जाती है. इसके रास्ते में दिल्ली, गाजियाबाद और मेरठ में कई स्टेशन बनाए गए हैं. मेरठ सेंट्रल, भैंसाली और बेगमपुल स्टेशन अंडरग्राउंड हैं.
गाजियाबाद से सीधे जुड़ जाएगागा जेवर एयरपोर्ट
दूसरे चरण की सबसे अहम परियोजना 72 किलोमीटर लंबा गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट कॉरिडोर है. यह रूट ग्रेटर नोएडा के परी चौक से होकर जेवर एयरपोर्ट तक जाएगा. इसकी DPR पहले ही NCRTC तैयार कर चुकी है. इसके शुरू होने के बाद दिल्ली और मेरठ से आने वाले यात्रियों को गाजियाबाद स्टेशन पर ट्रेन बदलकर सीधे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पहुंचने की सुविधा मिलेगी.
शामली और बागपत तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी
करीब 55-60 किलोमीटर लंबा प्रस्तावित दिल्ली-शाहदरा-बड़ौत-शामली कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई प्रमुख शहरों को राजधानी से जोड़ेगा. यह रूट शाहदरा और आनंद विहार से निकलकर लोनी, खेकड़ा और बड़ौतत होते हुए शामली तक जाएगा. इसके शुरू होने पर दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर ट्रैफिक का दबाव कम होने की उम्मीद है. फिलहाल करीब दो घंटे लगने वाला सफर घटकर 30-40 मिनट तक सिमटने की संभावना है. इससे बागपत और बरौत की शुगर मिलों, कृषि कारोबार और शैक्षणिक संस्थानों को भी फायदा मिलेगा.
बुलंदशहर और खुर्जा भी हो जाएंगे कनेक्ट
गाजियाबाद-बुलंदशहर-खुर्जा कॉरिडोर की लंबाई करीब 65 से 70 किलोमीटर प्रस्तावित है. यह गाजियाबाद से लालकुआं, दादरी, सिकंदराबाद, बुलंदशहर होते हुए खुर्जा तक जाएगा. इस रूट से खुर्जा की सिरेमिक इंडस्ट्री, दादरी और सिकंदराबाद के इंडस्ट्रियल पार्क तथा लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है. यह कॉरिडोर ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और दिल्ली-हावड़ा रेल लाइन के समानांतर विकसित किया जा सकता है.
हापुड़ और पिलखुआ के लिए भी खुशखबरी
करीब 30-35 किलोमीटर लंबे गाजियाबाद-पिलखुआ-हापुड़ कॉरिडोर को NH-9 (पुराना NH-24) के समानांतर प्रस्तावित किया गया है. यह गाजियाबाद से डासना, पिलखुआ और हापुड़ तक जाएगा. इससे हाईवे पर ट्रैफिक कम होने की उम्मीद है. साथ ही पिलखुआ की हैंडलूम और टेक्सटाइल इंडस्ट्री, इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेजों को बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी. भविष्य में यह इलाका बड़े रिहायशी और कारोबारी केंद्र के रूप में भी विकसित हो सकता है.
यात्रियों को क्या होगा फायदा?
अगर आप दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, बागपत, हापुड़, बुलंदशहर या जेवर एयरपोर्ट के बीच नियमित सफर करते हैं, तो यह नेटवर्क आपके लिए काफी सुविधाजनक साबित हो सकता है. गाजियाबाद इंटरचेंज हब बनने के बाद मेरठ, दिल्ली, जेवर एयरपोर्ट, हापुड़, खुर्जा और बड़ौत के बीच ट्रेन बदलना आसान होगा. इससे छात्रों, नौकरीपेशा लोगों, कारोबारियों और उद्योगों से जुड़े लोगों का सफर पहले से काफी तेज और आसान हो जाएगा.
हरिद्वार और ऋषिकेश तक विस्तार की तैयारी
नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन (NCRTC) भविष्य में इस कॉरिडोर को मोदिपुरम से आगे मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश तक बढ़ाने की भी योजना पर काम कर रही है. अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के साथ उत्तराखंड को भी हाई-स्पीड रेल नेटवर्क का फायदा मिलेगा. हालांकि, इन प्रस्तावित कॉरिडोर्स को केंद्रीय कैबिनेट की अंतिम मंजूरी अभी नहीं मिली है. इन कॉरिडोर्स के बनने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश का ट्रांसपोर्ट नेटवर्क पूरी तरह बदल जाएगा और पश्चिमी यूपी के शहर दिल्ली-एनसीआर के और करीब आ जाएंगे.